शिवराज सिंह चौहान ने अपनापन किताब के विमोचन पर खोला 34 साल पुराना राज

केंद्रीय राजनीति में कदम रख चुके पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई किताब ‘अपनापन’ का भव्य विमोचन हो चुका है। यह किताब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके दशकों पुराने अनुभवों और आत्मीय संबंधों पर आधारित है। मंगलवार को इस खास मौके पर शिवराज सिंह चौहान बेहद भावुक नजर आए और उन्होंने पीएम मोदी के साथ अपनी पहली मुलाकात का एक ऐसा अनसुना किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। उन्होंने बताया कि कैसे साल 1992 में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के बाद नरेंद्र मोदी पार्टी कार्यकर्ताओं को याद कर रोने लगे थे।

जब चरम पर था आतंकवाद और नरेंद्र मोदी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

शिवराज सिंह चौहान ने 90 के दशक के उस दौर को याद करते हुए कहा, “…उस समय कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था। घाटी के लाल चौक पर कोई तिरंगा फहराने की कल्पना भी नहीं कर सकता था। तब डॉ. मुरली मनोहर जोशी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। भाजपा ने फैसला किया कि उनके नेतृत्व में कन्याकुमारी से कश्मीर तक ‘एकता यात्रा’ निकाली जाएगी, ताकि पूरे भारत को भावनात्मक रूप से एक किया जा सके और श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया जाए।”

उन्होंने आगे बताया, “इस ऐतिहासिक और बेहद जोखिम भरी यात्रा को पूरे देश में संचालित और मैनेज करने का जिम्मा नरेंद्र मोदी जी को सौंपा गया था। उस समय मैं लोकसभा का उपचुनाव जीतकर संसद पहुंचा ही था। मेरे पास दिवंगत प्रमोद महाजन जी का फोन आया कि एकता यात्रा से युवाओं को जोड़ने के लिए ‘केसरिया वाहिनी’ बनाई जा रही है और मुझे उसका संयोजक बनना है। बस, इसी सिलसिले में मेरी नरेंद्र भाई से पहली मुलाकात हुई थी।”

आतंकवादियों ने दी थी खुली चुनौती, मोदी ने कहा- ‘लाल चौक पर फैसला होगा’

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने उस खौफनाक दौर का जिक्र करते हुए बताया कि 23 जनवरी को पंजाब के फगवाड़ा में आतंकवादियों ने एकता यात्रा में शामिल कार्यकर्ताओं की बस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी, जिसमें 6 कार्यकर्ता शहीद हो गए। आतंकियों को लगा कि यात्रा रुक जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

चौहान ने बताया, “श्रीनगर के लाल चौक पर आतंकियों ने पोस्टर चिपका दिए थे, दीवारों पर लिखा था- ‘आओ, किसने अपनी मां का दूध पिया है, जो लाल चौक पर आकर तिरंगा फहराए। अगर जिंदा लौट गए, तो आतंकवादी इनाम देंगे।’ आतंकियों की इस गीदड़भभकी पर नरेंद्र भाई ने गरजते हुए जवाब दिया था कि ‘लाल चौक पर ही फैसला हो जाएगा कि किसने अपनी मां का दूध पिया है।’ तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भी सुरक्षा का हवाला देकर यात्रा को रोकने की पूरी कोशिश की थी।”

जब लाल चौक से लौटकर रातभर रोते रहे नरेंद्र मोदी

शिवराज सिंह चौहान ने किताब के विमोचन में उस ऐतिहासिक पल के बाद की कहानी बयां की। उन्होंने कहा कि पाबंदियों के चलते पूरी यात्रा को जाने की इजाजत नहीं मिली, जिसके बाद डॉ. मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी और तीन अन्य लोग ही श्रीनगर पहुंचे और लाल चौक पर तिरंगा फहराकर भारत की संप्रभुता को बुलंद किया।

चौहान ने बताया, “जब नरेंद्र भाई लाल चौक से मिशन फतह करके जम्मू वापस लौटे, तो वहां लाखों कार्यकर्ता देश भक्ति के जोश में डूबे थे। लेकिन नरेंद्र भाई का मन उन कार्यकर्ताओं के लिए तड़प रहा था, जो दिन-रात इस यात्रा को सफल बनाने में जुटे थे, पर सुरक्षा कारणों से लाल चौक पर तिरंगा फहराते हुए नहीं देख पाए थे। नरेंद्र भाई उन कार्यकर्ताओं के त्याग को याद करके उस रात सोए नहीं और बच्चों की तरह रोते रहे। यह किस्सा सुनाते हुए आज भी मेरा गला रूंध जाता है।”

’17 साल सीएम रहे, लेकिन दामन पर एक भी दाग नहीं’

इस विमोचन कार्यक्रम में मौजूद पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफ की। नायडू ने चौहान को ‘जमीनी स्तर का असली नेता’ (मास लीडर) बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 17 वर्षों के लंबे कार्यकाल के दौरान शिवराज सिंह चौहान का पूरा राजनीतिक जीवन ‘बेदाग’ रहा है, जो आज के दौर में बेहद दुर्लभ है।