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Shani Dev Puja Rules: शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल क्यों है वर्जित?

हिंदू धर्म में किसी भी देवी-देवता की पूजा करते समय नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। आमतौर पर हम पूजा-पाठ में तांबे और पीतल के बर्तनों को सबसे शुद्ध मानकर इस्तेमाल करते हैं। तांबे के लोटे से जल चढ़ाना और तांबे की थाली में आरती करना शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि न्याय के देवता शनि देव की पूजा में तांबे का स्पर्श भी वर्जित है? यदि आप अनजाने में शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं, क्योंकि यह भक्ति का फल देने के बजाय आपको शनि के क्रोध का पात्र बना सकता है। आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक कारण और पूजा से जुड़े जरूरी नियम।

आखिर शनि देव को क्यों नहीं प्रिय है तांबा?

ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, तांबा सूर्य देव की धातु मानी जाती है। सूर्य देव को अर्घ्य देने और उनकी उपासना में तांबे के लोटे का प्रयोग सर्वश्रेष्ठ होता है। वहीं, दूसरी ओर शनि देव और सूर्य देव के बीच पिता-पुत्र का रिश्ता होने के बावजूद शत्रुता का भाव है। शनि देव अपने पिता सूर्य से बैर रखते हैं, यही कारण है कि उनकी पूजा में सूर्य से संबंधित धातु ‘तांबा’ का उपयोग पूरी तरह वर्जित किया गया है। मान्यता है कि शनि देव की पूजा में तांबे का इस्तेमाल करने से वे रुष्ट हो जाते हैं और जातक को इसके नकारात्मक परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

शनि पूजा में किस धातु का करें उपयोग?

धार्मिक अनुष्ठानों में आमतौर पर लोहे को शुभ नहीं माना जाता, लेकिन शनि देव के मामले में नियम बिल्कुल उलट हैं। लोहे का सीधा संबंध शनि देव से है। इसलिए जब भी आप शनि देव का अभिषेक करें या उन्हें तेल अर्पित करें, तो हमेशा लोहे के बर्तनों का ही चुनाव करें। शनि देव की पूजा में लोहे के साथ-साथ सरसों के तेल का संयोजन उन्हें अति प्रसन्न करता है और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

लाल रंग से बढ़ सकती है शनि की नाराजगी

तांबे के साथ-साथ शनि देव की पूजा में लाल रंग की वस्तुओं का परहेज करना भी बहुत जरूरी है। लाल रंग मंगल का प्रतीक है और शनि देव का मंगल के साथ भी शत्रु भाव रहता है। इसलिए शनि देव को कभी भी लाल वस्त्र, लाल फूल या लाल फल अर्पित न करें। शनि महाराज को काला और नीला रंग अत्यंत प्रिय है। उनकी कृपा पाने के लिए उन्हें नीले फूल (अपराजिता) और काले वस्त्र अर्पित करना शुभ फलदायी होता है।

भूलकर भी न मिलाएं नजरें, वक्र दृष्टि कर सकती है बेहाल

शनि देव की पूजा करते समय सबसे महत्वपूर्ण नियम उनकी आंखों में न देखना है। शास्त्रों के अनुसार, शनि देव की दृष्टि में ‘वक्र’ (टेढ़ापन) होता है, और उनकी सीधी नजर जिस पर पड़ती है, उसके जीवन में उथल-पुथल शुरू हो सकती है। इसलिए हमेशा उनकी मूर्ति के चरणों की ओर देखते हुए प्रार्थना करें। इसके अलावा, शनि देव अनुशासन और स्वच्छता के देवता हैं। गंदे हाथों से या अशुद्ध मन से की गई पूजा लाभ के स्थान पर हानि पहुंचा सकती है, इसलिए पूर्ण सात्विकता और नियमबद्धता का पालन करें