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Sensex एक्सपायरी पर क्लोजिंग ऑक्शन में खेल: SEBI का 2 कंपनियों पर बड़ा एक्शन, 3 बड़े ऑर्डर्स से अचानक उछला था इंडेक्स; ₹3.67 करोड़ जब्त

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में हेरफेर और अनुचित कारोबारी गतिविधियों पर नकेल कसते हुए दो बड़ी संस्थाओं—विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट (Copthall Mauritius Investment Ltd) और घरेलू ब्रोकरेज फर्म मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग (Mansi Share and Stock Broking Pvt Ltd)—पर सख्त अंतरिम आदेश पारित किया है।

सेबी ने दोनों संस्थाओं को सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित (Barred) कर दिया है और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में उनकी भागीदारी पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही नियामक ने दोनों संस्थाओं द्वारा डेरिवेटिव्स पोजिशन से कमाए गए कुल ₹3.67 करोड़ के अवैध मुनाफे (Wrongful Gains) को जब्त (Impound) करने का आदेश दिया है।

यह कार्रवाई 3 अगस्त 2026 से लागू हुए नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) मैकेनिज्म के तहत हेरफेर का पहला औपचारिक मामला है।

क्या हुआ था 13 अगस्त को? सेंसेक्स में दिखे थे 3 बड़े प्राइस स्पाइक्स

13 अगस्त 2026 को बीएसई (BSE) सेंसेक्स की साप्ताहिक ऑप्शंस एक्सपायरी थी। नए नियमों के अनुसार, दोपहर 3:20 बजे से 3:30 बजे के बीच क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के जरिए इंडेक्स का अंतिम क्लोजिंग भाव और इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) तय होना था।

सेबी की सर्विलांस टीम ने पाया कि नीलामी के दौरान कुछ ही सेकंडों के भीतर सेंसेक्स में असामान्य और तीव्र उतार-चढ़ाव (Price Spikes) दर्ज किए गए:

  • पहला स्पाइक: दोपहर 3:20:41 से 3:20:43 बजे के बीच मात्र 2 सेकंड में सेंसेक्स 362.02 अंक उछलकर 77,661.40 से 78,023.42 पर पहुंच गया।

  • दूसरा स्पाइक: दोपहर 3:24:08 से 3:24:20 बजे के बीच 12 सेकंड में इंडेक्स 132.67 अंक चढ़ा।

  • तीसरा स्पाइक: दोपहर 3:25:49 से 3:26:17 बजे के बीच मात्र 28 सेकंड में 405.08 अंक की भारी छलांग लगी।

कॉपथॉल और मानसी ने कैसे रचा ‘ऑर्डर और कैंसिलेशन’ का खेल?

सेबी के जांच आदेश के अनुसार, दोनों कंपनियों ने एक-दूसरे से मिले बिना (Independently) अपने-अपने ऑप्शंस सौदों को फायदा पहुंचाने के लिए कैश मार्केट के ऑक्शन में अत्यधिक आक्रामक ऑर्डर्स लगाए:

1. कॉपथॉल मॉरीशस की रणनीति (आक्रामक बाय ऑर्डर्स)

कॉपथॉल मॉरीशस ने सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में रेफरेंस प्राइस से लगभग 3% अधिक कीमत पर भारी-भरकम खरीदारी (Limit Buy Orders) के ऑर्डर डाले:

  • पहले स्पाइक के दौरान कुल ₹66.64 करोड़ के बाय ऑर्डर्स में से 99.91% (₹66.58 करोड़) हिस्सेदारी अकेले कॉपथॉल की थी।

  • दूसरे स्पाइक में कंपनी का हिस्सा 96.09% और तीसरे स्पाइक में 85.21% रहा।

  • कॉपथॉल ने इंडेक्स को ऊपर खींचने के बाद लगभग ₹98.12 करोड़ के बाय ऑर्डर्स (32.79% शेयर) अचानक कैंसिल कर दिए।

  • उद्देश्य: कंपनी के पास एक्सपायरी डे पर भारी मात्रा में ‘लॉन्ग कॉल’ (Long Call) और ‘शॉर्ट पुट’ (Short Put) पोजिशन्स थीं, जिन्हें सेंसेक्स के ऊपर बंद होने से सीधा लाभ मिला। सेबी ने इसका अवैध लाभ ₹2.96 करोड़ आंका है।

2. मानसी ब्रोकिंग की रणनीति (आक्रामक सेल ऑर्डर्स और दबाव)

मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग ने सेंसेक्स के 8 प्रमुख शेयरों में रेफरेंस प्राइस से 2.5% नीचे की दर पर लगभग 12.65 लाख शेयरों के भारी सेल ऑर्डर डाले।

  • इन भारी बिकवाली ऑर्डर्स से सेंसेक्स के भाव पर करीब 5 मिनट तक नीचे की ओर कृत्रिम दबाव (Price Suppression) बना रहा।

  • इसके बाद कंपनी ने इन सभी सेल ऑर्डर्स को एक साथ कैंसिल कर दिया, जिससे इंडेक्स अचानक 232.96 अंक उछल गया।

  • उद्देश्य: मानसी के पास एक्सपायरी डे पर ‘पुट ऑप्शंस’ (Put Options) की खुली पोजीशन थीं। इंडेक्स को नीचे दबाकर कंपनी ने अपने पुट ऑप्शंस को ऊंचे प्रीमियम पर स्क्वायर-ऑफ कर लिया। सेबी के अनुसार मानसी ने इस तरीके से ₹71.64 लाख का अनुचित लाभ कमाया।

सेबी ने क्या लिया कड़ा एक्शन?

बाजार नियामक ने सख्त कदम उठाते हुए आदेश दिया है:

  • कॉपथॉल मॉरीशस और मानसी शेयर ब्रोकिंग (प्रोपराइटरशिप अकाउंट) को पूंजी बाजार से तत्काल प्रभाव से डिबार कर दिया गया है।

  • दोनों संस्थाओं पर क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में किसी भी प्रकार का ऑर्डर डालने पर रोक लगा दी गई है।

  • दोनों इकाइयों को अवैध रूप से कमाए गए कुल ₹3.67 करोड़ की राशि को सेबी के पक्ष में लियन (Lien) के साथ फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा कराने का निर्देश दिया गया है।

बाजार और निवेशकों पर इसका क्या असर पड़ता है?

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) द्वारा तय किए गए अंतिम भाव के आधार पर ही सभी फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (F&O) सौदों का अंतिम सेटलमेंट, म्यूचुअल फंडों की एनएवी (NAV) और पोर्टफोलियो वैल्यूएशन तय होते हैं। ऐसे में अंतिम 10 मिनट में बड़े ऑर्डर्स डालकर और फिर उन्हें कैंसिल करके इंडेक्स में हेरफेर करने से आम रिटेल ट्रेडर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

सेबी के इस त्वरित और कड़े एक्शन से यह स्पष्ट संदेश गया है कि नए ट्रेडिंग मैकेनिज्म में किसी भी तरह की एल्गोरिद्मिक या आक्रामक मैन्युपुलेशन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।