
RO Water Purifier Myths & Facts: आजकल आधुनिक जीवनशैली में अधिकांश घरों में पीने के पानी को साफ करने के लिए RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) वॉटर प्यूरीफायर का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य पानी में मौजूद अशुद्धियों, भारी धातुओं और हानिकारक बैक्टीरिया को छानकर उसे पीने योग्य बनाना है।
लेकिन पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और इंटरनेट पर आरओ के पानी को लेकर कई तरह के दावे और भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जिसने आम लोगों को गहरे भ्रम में डाल दिया है। कुछ लोग इसे सेहत के लिए अमृत मानते हैं, तो कुछ इसे गंभीर बीमारियों की वजह बताने लगे हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है। आइए जानते हैं आरओ के पानी से जुड़े 4 सबसे बड़े मिथक (Myths), उनकी ग्राउंड रियलिटी और इसके सही इस्तेमाल के तरीके:
RO के पानी से जुड़े 4 बड़े मिथक और उनका वैज्ञानिक सच
मिथक 1: आरओ का पानी पीने से शरीर में मिनरल्स की भारी कमी हो जाती है
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सच्चाई (WHO का पक्ष): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह सच है कि रिवर्स ऑस्मोसिस की प्रक्रिया के दौरान पानी में मौजूद कुछ प्राकृतिक मिनरल्स (जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम) छनकर कम हो जाते हैं। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इसे पीने से आपके शरीर में इन मिनरल्स की पूरी कमी हो जाएगी। मानव शरीर को आवश्यक मिनरल्स का 90% से अधिक हिस्सा एक संतुलित और पौष्टिक आहार (Diet) से मिलता है, न कि केवल पीने के पानी से। यदि आपकी डाइट अच्छी है, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है।
मिथक 2: हर घर और हर इलाके में RO लगाना अनिवार्य है
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सच्चाई: यह पूरी तरह गलत धारणा है। हर घर में आरओ प्यूरीफायर की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपके क्षेत्र में आने वाले पानी का टीडीएस (TDS – Total Dissolved Solids) कितना है और उसमें किस तरह के केमिकल मौजूद हैं। यदि आपके घर में आने वाला नल का पानी पहले से ही साफ, मीठा और सुरक्षित है, तो वहां साधारण यूवी (UV) या यूएफ (UF) फिल्टर से भी काम चल सकता है। हमेशा पानी की जांच कराने के बाद ही प्यूरीफायर चुनें।
मिथक 3: आरओ का पानी 100% शुद्ध होता है, इसलिए इसे कैसे भी स्टोर कर सकते हैं
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सच्चाई (CDC की गाइडलाइन): अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताबिक, पानी चाहे कितना भी शुद्ध क्यों न हो, यदि उसे स्टोर करने का तरीका गलत है, तो वह दोबारा दूषित हो सकता है। आरओ से निकले पानी को हमेशा पूरी तरह से साफ, सूखे और ढक्कन बंद कंटेनर (जैसे कांच या अच्छी क्वालिटी के स्टील/मिट्टी के बर्तन) में ही रखना चाहिए। पानी को लंबे समय तक खुला छोड़ने या गंदे हाथों से निकालने पर उसमें दोबारा बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
मिथक 4: आरओ का पानी पीने से पेट की आंतें (Gut Health) कमजोर हो जाती हैं
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सच्चाई: इंटरनेट पर चल रहे इस दावे का समर्थन करने के लिए वर्तमान में कोई भी आधिकारिक वैश्विक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस में भी ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की गट हेल्थ (पाचन तंत्र की मजबूती) मुख्य रूप से उसकी पूरी लाइफस्टाइल, भोजन में फाइबर की मात्रा, शारीरिक सक्रियता, संक्रमण और दवाओं के इस्तेमाल पर निर्भर करती है, केवल आरओ के पानी पर नहीं।
किन परिस्थितियों में आपके घर के लिए जरूरी है RO प्यूरीफायर?
आरओएस सिस्टम मुख्य रूप से तब सबसे ज्यादा उपयोगी और अनिवार्य माना जाता है जब:
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आपके घर के पानी का TDS लेवल 500 mg/L से अधिक हो और पानी का स्वाद खारा या भारी हो।
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आपके इलाके के भूजल (Groundwater) में आर्सेनिक, फ्लोराइड, सीसा (Lead), या क्रोमियम जैसी खतरनाक और जहरीली भारी धातुएं घुली हुई हों, जिन्हें साधारण फिल्टर नहीं हटा पाते।
इसके विपरीत, यदि पानी का टीडीएस सामान्य है और पानी सुरक्षित है, तो बिना वजह हाई-एंड आरओ लगाने से पानी की बर्बादी (Water Wastage) भी ज्यादा होती है।
RO का पानी इस्तेमाल करते समय इन 4 बातों का रखें विशेष ख्याल
यदि आप अपने घर में आरओ का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसकी शुद्धता और अपनी सेहत बनाए रखने के लिए इन टिप्स को जरूर फॉलो करें:
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नियमित सर्विसिंग और फिल्टर चेंज: आरओ प्यूरीफायर की समय-समय पर अधिकृत मैकेनिक से सर्विसिंग जरूर कराएं। इसके भीतर लगी मेम्ब्रेन (Membrane) और कार्बन फिल्टर को तय समय सीमा के भीतर बदलवाएं, ताकि पानी की गुणवत्ता खराब न हो।
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टीडीएस (TDS) को सही सेट करें: आरओ लगवाते समय टेक्नीशियन से कहकर उसके TDS को 100 से 300 के बीच ही सेट करवाएं। बहुत कम टीडीएस (जैसे 50 से कम) का पानी पीने में पूरी तरह बेस्वाद और मिनरल-विहीन हो जाता है।
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संतुलित आहार लें: चूंकि पानी से मिनरल्स कम होते हैं, इसलिए अपने दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, दही, सूखे मेवे और ताजे फलों को शामिल करें ताकि शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा बनी रहे।
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कांच या तांबे के बर्तन का विकल्प: आरओ के पानी को रिस्टोर करने के लिए प्लास्टिक की बोतलों या कंटेनरों के बजाय कांच के जग या तांबे/मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा लाभकारी माना जाता है।
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