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RBI MPC Meeting 2026: 4 बार यथावत रखने के बाद क्या आज 0.25% बढ़ेगा रेपो रेट? 5.50% होने पर होम लोन EMI और बचत पर असर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक के फैसलों की औपचारिक घोषणा आज सुबह 10:00 बजे गवर्नर द्वारा की जाएगी। वित्तीय बाजारों, अर्थशास्त्रियों और करोड़ों बैंक उपभोक्ताओं की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को 5.25% पर बरकरार रखेगा या फिर महंगाई को थामने के लिए नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% पर ले जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में कुल 125 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती करने के बाद रिजर्व बैंक पिछली चार बैठकों से लगातार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर बनाए हुए था। यदि आज यह वृद्धि घोषित होती है, तो यह फरवरी 2023 (जब दरें 6.50% तक बढ़ाई गई थीं) के बाद पहली बार दर वृद्धि (Rate Hike) का कदम होगा।

पिछले चार द्विमासिक चक्रों के दौरान केंद्रीय बैंक ने देश में औद्योगिक गतिविधियों और विकास की रफ्तार को सहारा देने के लिए अपने रुख को ‘न्यूट्रल’ रखते हुए दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। हालांकि, मौजूदा बैठक में आर्थिक समीकरण तेजी से बदले हैं:

  • खुदरा महंगाई में उछाल: खाद्य पदार्थों और सब्जियों की अस्थिर कीमतों के चलते खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) में हालिया महीनों में तेजी आई है।

  • अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई तेजी से आयात बिल बढ़ने और चालू खाता घाटे पर दबाव की स्थिति बनी है।

  • वैश्विक केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित वैश्विक वित्तीय बाजारों में बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर बने रहने से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ गया है, जिसे नियंत्रित करने के लिए घरेलू ब्याज दरों को आकर्षक बनाना जरूरी माना जा रहा है।

संभावित 25 bps बढ़ोतरी (5.25% → 5.50%) का सीधा असर

वित्तीय घटक मौजूदा स्थिति (5.25%) 25 bps बढ़ोतरी के बाद (5.50%) आम जनता और बाजार पर तात्कालिक प्रभाव
होम लोन ईएमआई (RLLR/EBLR) औसतन 8.50% वार्षिक दर बढ़कर 8.75% होने का अनुमान ₹40 लाख के 20 वर्षीय लोन पर मासिक ₹635 और कुल ब्याज में ~₹1.5 लाख का इजाफा
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) 7.00% – 7.75% p.a. 15 से 25 bps तक बढ़ने की संभावना वरिष्ठ नागरिकों और बचतकर्ताओं की फिक्स्ड ब्याज आय में बढ़ोतरी
ऑटो व पर्सनल लोन फ्लोटिंग दरें निम्नतम स्तर पर नए व फ्लोटिंग कर्ज 0.25% महंगे त्योहारी सीजन में नई कार या कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन की लागत में मामूली वृद्धि
शेयर बाजार (Equities) संवेदनशील स्तर पर कारोबार रियल्टी और ऑटो शेयरों पर अल्पकालिक दबाव बैंकिंग व एनबीएफसी सेक्टर के मार्जिन पर मिला-जुला असर

देश के सभी प्रमुख वाणिज्यिक बैंक (जैसे SBI, PNB, HDFC Bank, ICICI Bank) अपने फ्लोटिंग रेट रिटेल लोन्स को रेपो लिंक्ड एक्सटर्नल लेंडिंग रेट (EBLR/RLLR) से जोड़ते हैं। आरबीआई द्वारा रेपो रेट में बदलाव करते ही बैंक स्वतः अपनी उधारी दरें बढ़ा देते हैं। यदि किसी कर्जदार का ₹30 लाख का होम लोन 20 साल के लिए चल रहा है, तो 0.25% ब्याज दर बढ़ते ही या तो उसकी मासिक किस्त में लगभग ₹475 की वृद्धि हो जाएगी, अथवा बैंक लोन की अवधि (Tenure) 8 से 12 महीने आगे बढ़ा देगा।

ऋणधारकों के लिए जहां दर-वृद्धि चिंता का कारण बनती है, वहीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों और फिक्स्ड इनकम निवेशकों के लिए यह फायदेमंद साबित होती है। रेपो रेट में इजाफा होने के बाद बैंकों को क्रेडिट ग्रोथ को पूरा करने के लिए जमा राशि आकर्षित करनी पड़ती है, जिसके चलते कमर्शियल और स्मॉल फाइनेंस बैंक अपनी 1 से 3 साल की एफडी दरों में 15 से 30 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी करेंगे। वरिष्ठ नागरिकों को चुनिंदा बैंकों में 8.25% से 8.50% तक के रिटर्न मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी।

  1. आंशिक पूर्व-भुगतान (Part Prepayment): यदि आपकी ईएमआई बढ़ती है, तो साल में एक बार अपने बोनस या अतिरिक्त बचत से मूलधन का 5% चुकाएं; इससे बढ़ी हुई अवधि स्वतः घटकर पुरानी सीमा में आ जाती है।

  2. ईएमआई का विकल्प चुनें, अवधि का नहीं: बैंक सामान्यतः बिना पूछे लोन की अवधि बढ़ा देते हैं। बैंक को लिखित निर्देश देकर अवधि स्थिर रखते हुए मासिक ईएमआई बढ़वा लें, ताकि कुल ब्याज का भुगतान सीमित रहे।

  3. कम ब्याज वाले बैंक में बैलेंस ट्रांसफर: यदि आपका मौजूदा बैंक अत्यधिक लेंडिंग स्प्रेड ले रहा है, तो प्रतिस्पर्धी दरों वाले किसी अन्य बैंक में कम प्रोसेसिंग चार्ज पर होम लोन ट्रांसफर कराने का विकल्प देखें।