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RBI Forex Swap Impact: आरबीआई के विदेशी मुद्रा दांव का दिखा जबर्दस्त असर, भारतीय बैंकिंग सिस्टम में आया ₹5 लाख करोड़ का छप्परफाड़ कैश

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा और बैंकिंग नकदी को मजबूत करने के लिए उठाए गए रणनीतिक कदमों का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। अगस्त महीने के अंत तक भारतीय बैंकिंग प्रणाली में सरप्लस लिक्विडिटी (अतिरिक्त नकदी) का स्तर ₹5.05 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। यह 15 अप्रैल के बाद पिछले चार महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है।

बैंकों के पास नकदी के इस विशाल सैलाब के पीछे दो प्रमुख कारण हैं: पहला, आरबीआई की रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा (FX Swap) के तहत एनआरआई जमा (FCNR-B) का बड़े पैमाने पर आना और दूसरा, महीने के अंत में हुआ भारी सरकारी खर्च।

आरबीआई ने बैंकों को विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR-B) डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए एक विशेष यूएसडी-आईएनआर (USD-INR) स्वैप विंडो उपलब्ध कराई थी:

  • $65.4 अरब से अधिक की विदेशी पूंजी: बैंकों ने इस विशेष सुविधा के जरिए 21 अगस्त तक लगभग 65.4 अरब डॉलर (कुल फ्लो करीब 72.8 अरब डॉलर) की विदेशी मुद्रा जुटाई।

  • डॉलर के बदले मिला रुपया: जब यह भारी विदेशी मुद्रा बैंकिंग सिस्टम में आई और बैंकों ने इसे आरबीआई के साथ स्वैप (अदला-बदली) किया, तो केंद्रीय बैंक ने बदले में बैंकों को भारी मात्रा में रुपये की तरलता (Rupee Liquidity) प्रदान की।

  • सरकारी व्यय का बूस्टर: इसके साथ ही महीने के आखिरी दिनों में केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और इंफ्रास्ट्रक्चर भुगतानों के वितरण से बाजार में नकदी का प्रवाह और तेज हो गया।

बैंकिंग सिस्टम में नकदी की अत्यधिक भरमार होने से मुद्रा बाजार (Money Market) की दरें अचानक बहुत नीचे न गिर जाएं, इसके लिए आरबीआई लगातार सक्रिय प्रबंधन कर रहा है:

  • केंद्रीय बैंक ने अतिरिक्त फंड को अल्पकाल के लिए सोखने और ओवरनाइट दरों को रेपो रेट के करीब बनाए रखने के लिए वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) का सहारा लिया है।

  • आरबीआई अब तक 23 VRRR नीलामियां आयोजित कर चुका है, जिनमें बैंकों ने अपना अतिरिक्त फंड आरबीआई के पास सुरक्षित पार्क किया। इसके बावजूद बैंकों के पास रोजमर्रा के कामकाज और कर्ज वितरण के लिए नकदी का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

बैंकों के खजाने में नकदी की कोई कमी न होने का सीधा सकारात्मक असर देश के क्रेडिट इकोसिस्टम पर पड़ेगा:

  • आसानी से मिलेंगे लोन: बैंकों के पास लेंडिंग के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध होने से होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन और एमएसएमई (MSME) बिजनेस लोन के अप्रूवल की प्रक्रिया तेज होगी।

  • ब्याज दरों में स्थिरता: नकदी संकट न होने के चलते बैंकों पर डिपॉजिट जुटाने के लिए एफडी दरों को आक्रामक रूप से बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा, जिससे कर्ज की ब्याज दरें स्थिर रहेंगी।

  • क्रेडिट ग्रोथ को बूस्ट: त्योहारी सीजन के दौरान रिटेल और कॉरपोरेट सेक्टर से आने वाली कर्ज की भारी मांग को बैंक बिना किसी वित्तीय तनाव के आसानी से पूरा कर सकेंगे।

एचडीएफसी बैंक और वित्तीय विश्लेषकों की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के दूसरे पखवाड़े और अक्टूबर के दौरान सिस्टम में तरलता ₹4 से ₹4.5 लाख करोड़ के सुविधाजनक दायरे में बनी रहने का अनुमान है। नवंबर में सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) के रिडेम्पशन से इसमें फिर उछाल आ सकता है, जबकि त्योहारी खरीदारी और टैक्स भुगतानों के चलते जनवरी-मार्च 2027 की अंतिम तिमाही में यह स्तर धीरे-धीरे सामान्य दायरे में वापस लौटेगा।