
दुनिया भर में जारी आर्थिक अनिश्चितताओं, युद्ध के खतरों और वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा ‘स्टेट ऑफ द इकॉनमी’ (State of the Economy) बुलेटिन के अनुसार, वैश्विक सुस्ती के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से बना हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों (Foreign Investors/FPI & FDI) का भरोसा फिर से तेजी से बहाल हो रहा है। आइए एक बिजनेस रिपोर्टर के नजरिए से आरबीआई की इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं और आंकड़ों को समझते हैं।
विदेशी पूंजी की वापसी और मजबूत बाहरी क्षेत्र
आरबीआई के बुलेटिन में साफ कहा गया है कि हाल के महीनों में विदेशी निवेश में आई तेजी यह दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद भारत का आकर्षण बरकरार है।
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एफडीआई और एफपीआई में सुधार: रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दोनों मोर्चों पर विदेशी निवेशकों का रुख सकारात्मक हुआ है।
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व्यापार समझौतों का फायदा: भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (India-UK CETA) के लागू होने और अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में प्रगति से देश के निर्यात (Exports) और आयात की गति पहली तिमाही में काफी मजबूत रही है।
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विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves): देश के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जो बाहरी आर्थिक झटकों को झेलने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर ने दी अर्थव्यवस्था को रफ्तार
रिजर्व बैंक का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की इस मजबूती के पीछे घरेलू मांग और मजबूत सर्विस सेक्टर (Services Sector) का बड़ा हाथ है:
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सेवा और औद्योगिक क्षेत्र: मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, बैंकिंग और सर्विसेज सेक्टर के सभी प्रमुख आंकड़े (Indicators) लगातार तेजी का संकेत दे रहे हैं।
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कृषि और खाद्यान्न भंडार: हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार में असमानता देखी गई है, लेकिन सरकार के पास पर्याप्त खाद्यान्न स्टॉक होने के कारण खाद्य महंगाई (Food Inflation) पर नियंत्रण रहने की उम्मीद है।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकी निवेश: देश में डिजिटल टेक्नोलॉजी और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे भारी निवेश ने भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत कैसे बना ‘सुरक्षित ठिकाना’?
आरबीआई बुलेटिन में चेतावनी दी गई है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, लाल सागर में समुद्री व्यापार में व्यवधान और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे खतरे अभी भी बने हुए हैं।
फिर भी, मजबूत बैंकिंग प्रणाली (Healthy NBFCs and Banks), नियंत्रित राजकोषीय घाटा और स्थिर सरकारी नीतियों के कारण विदेशी निवेशकों को भारत एक सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न देने वाले बाजार के रूप में दिख रहा है। आने वाले समय में जैसे-जैसे त्योहारी सीजन नजदीक आएगा, भारतीय बाजारों में विदेशी फंड्स का प्रवाह और भी ज्यादा बढ़ने की संभावना है।
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