
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (NBFC Sector) में वित्तीय अनुशासन और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक बार फिर सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने कड़े नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोप में 5 नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) का ‘सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन’ (CoR) पूरी तरह रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, अलग-अलग व्यावसायिक और रणनीतिक कारणों से 8 अन्य वित्तीय कंपनियों ने स्वेच्छा से अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट केंद्रीय बैंक को सरेंडर कर दिया है। इस दोहरी कार्रवाई के बाद इन सभी 13 कंपनियों का रजिस्टर्ड एनबीएफसी के तौर पर वित्तीय कारोबार करने का अधिकार समाप्त हो गया है। यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो इन कंपनियों से लोन या वित्तीय सेवाओं के जरिए जुड़े हुए हैं।
आरबीआई ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 5 एनबीएफसी का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किया है। इनमें मुख्य रूप से नियमों की अनदेखी, वैधानिक मानकों को पूरा न करने और संबंधित वित्तीय गतिविधियों के संचालन में विफलता पाई गई थी।
जिन कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए हैं, उनकी सूची इस प्रकार है:
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डार्स फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Dar’s Financial Services Pvt Ltd)
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रोल्टा होल्डिंग एंड फाइनेंस कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड (Rolta Holding and Finance Corporation Pvt Ltd)
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वासुदेव सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड (Vasudeo Securities Pvt Ltd)
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पारसोली कॉरपोरेशन लिमिटेड (Parsoli Corporation Ltd)
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ए सी चोकसी फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (A C Choksi Financial Services Pvt Ltd)
लाइसेंस निरस्त होने के बाद ये कंपनियां अब किसी भी प्रकार की गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था (NBFI) की गतिविधियां नहीं चला सकतीं।
आरबीआई के अनुसार, जिन 8 कंपनियों ने अपना लाइसेंस वापस सौंपा है, उनके फैसले के पीछे अलग-अलग कानूनी और व्यावसायिक कारण रहे हैं:
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NBFI कारोबार से पूरी तरह बाहर निकलने के कारण: चार कंपनियों ने स्वयं इस क्षेत्र से हटने का निर्णय लिया—
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अनुपम मर्केंटाइल लिमिटेड (Anupam Mercantile Ltd)
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ग्रैंड मोटर एंड फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड (Grand Motor and Finance Pvt Ltd)
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स्काई लिमिट इंटरनेशनल फाइनेंस लिमिटेड (Sky Limit International Finance Ltd)
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एएसए इंटरनेशनल इंडिया माइक्रोफाइनेंस लिमिटेड (ASA International India Microfinance Ltd)
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विलय या कानूनी अस्तित्व समाप्त होने के कारण: समामेलन (Amalgamation), विलय (Merger), विघटन (Dissolution) या स्ट्राइक-ऑफ के चलते दो कंपनियों का अलग कानूनी वजूद समाप्त हो गया—
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शिवम सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड (Shivam Securities Pvt Ltd)
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अप्रैल इनवेस्टमेंट एंड फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड (April Investment and Finance Pvt Ltd)
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अन-रजिस्टर्ड कैटेगरी के मानकों को पूरा करने पर: दो कंपनियों को अब अलग से एनबीएफसी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं रही—
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अनाग्राम इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Anagram Industries Ltd): अन-रजिस्टर्ड कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के नियमों के दायरे में आने के कारण।
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सीडीएन फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड (CDN Finance Pvt Ltd): अन-रजिस्टर्ड टाइप-1 एनबीएफसी के मानकों को पूरा करने के कारण।
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आरबीआई द्वारा किसी एनबीएफसी का लाइसेंस रद्द करने या कंपनी द्वारा सरेंडर करने की खबर सामने आते ही आम उपभोक्ताओं और कर्जदारों के मन में कई सवाल खड़े हो जाते हैं। इस स्थिति में ग्राहकों के लिए कानूनी और वित्तीय स्थिति समझना बेहद जरूरी है:
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लोन चुकाने की अनिवार्यता बनी रहेगी: यदि किसी ग्राहक ने इन कंपनियों से कोई पर्सनल, बिजनेस, व्हीकल या गोल्ड लोन ले रखा है, तो लाइसेंस रद्द होने का मतलब यह कतई नहीं है कि कर्ज माफ हो गया है। आपका लोन एग्रीमेंट एक वैध कानूनी अनुबंध (Contract) है। आपको अपनी निर्धारित ईएमआई (EMI) तय समय पर भरनी होगी। यदि कोई अन्य संस्था या बैंक इस लोन बुक का अधिग्रहण करता है, तो आधिकारिक सूचना मिलने के बाद नए चैनल पर भुगतान करना होगा।
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दस्तावेज सुरक्षित रखें: जिन ग्राहकों के लोन इन कंपनियों में चल रहे हैं, उन्हें अपने सभी लोन एग्रीमेंट, ईएमआई भुगतान की रसीदें, एनओसी (NOC) और खाता विवरण तुरंत डाउनलोड कर सुरक्षित रख लेने चाहिए।
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जमा राशि (Deposits) को लेकर सतर्कता: एनबीएफसी में जमा की गई फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर बैंकों की तरह डीआईसीजीसी (DICGC) का ₹5 लाख तक का सरकारी बीमा सुरक्षा कवच लागू नहीं होता है। यदि किसी प्रभावित संस्था के पास पब्लिक डिपॉजिट हैं, तो जमाकर्ताओं को अपने मूलधन और ब्याज की वापसी की प्रक्रिया जानने के लिए तुरंत कंपनी के लिक्विडेटर या आधिकारिक पते पर संपर्क साधना चाहिए।
भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर उपभोक्ताओं को आगाह करता है कि किसी भी वित्तीय संस्था, ऑनलाइन लोन ऐप या निजी फाइनेंस कंपनी के साथ लेन-देन शुरू करने से पहले उसकी प्रमाणिकता अवश्य परखें। इसके लिए कुछ सावधानियां रखनी चाहिए:
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आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट (rbi.org.in) पर सभी पंजीकृत और वैध एनबीएफसी की अद्यतन सूची (List of Registered NBFCs) सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहती है।
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किसी भी कंपनी में निवेश करने या उससे बड़ा लोन लेने से पहले जांच लें कि उसका ‘सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन’ सक्रिय है या नहीं।
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जिन कंपनियों का लाइसेंस रद्द हो चुका है, वे कानूनी तौर पर कोई नया लोन जारी नहीं कर सकतीं और न ही आम जनता से कोई नया डिपॉजिट स्वीकार कर सकती हैं। यदि ऐसी कोई कंपनी नई वित्तीय सेवा की पेशकश करती है, तो उसकी सूचना सीधे केंद्रीय बैंक के ‘सचेत’ (Sachet) पोर्टल पर दी जा सकती है।
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