पुरुषोत्तम मास 2026: 17 मई से शुरू हो रहा है साल का 13वां महीना, विष्णु की कृपा पाने के लिए न करें ये गलतियां

नई दिल्ली: हिंदू कैलेंडर में भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य संचय के लिए ‘पुरुषोत्तम मास’ को सबसे पवित्र और फलदायी माना गया है। हर तीन साल में एक बार आने वाला यह अतिरिक्त महीना, जिसे ‘अधिकमास’ या ‘मलमास’ भी कहा जाता है, इस साल 2026 में 17 मई से शुरू होने जा रहा है। 15 जून तक चलने वाले इस विशेष महीने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने अपना ‘पुरुषोत्तम’ नाम इस महीने को दिया है।

क्यों खास है पुरुषोत्तम मास का माहात्म्य?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास में किए गए जप, तप, दान और साधना का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यह महीना पिछले जन्मों के पापों को नष्ट करने और अक्षय पुण्य (जो कभी खत्म न हो) प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। लेकिन, जितनी महिमा इस महीने में पुण्य कमाने की है, उतनी ही सावधानी वर्जित कार्यों को लेकर भी बरतनी चाहिए, अन्यथा अनजाने में किए गए अपराध कई गुना पाप के भागीदार बना सकते हैं।

अधिकमास में इन 5 कार्यों से रहें दूर, वरना भुगतना पड़ सकता है भारी नुकसान

1. मांगलिक कार्यों पर पूर्ण पाबंदी पुरुषोत्तम मास पूरी तरह से आत्मिक शुद्धि और ईश्वर भक्ति का समय है। इस दौरान विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, नए घर का निर्माण शुरू करना या नया व्यापार आरंभ करना जैसे मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि इस समय किए गए सांसारिक शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

2. ब्रह्मचर्य और पवित्रता का उल्लंघन यह महीना शारीरिक और मानसिक शुद्धता का काल है। शास्त्रों के अनुसार, अधिकमास में ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। इस नियम का उल्लंघन करना न केवल आध्यात्मिक प्रगति को रोकता है, बल्कि व्यक्ति को दोष का भागीदार भी बनाता है।

3. तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों का सेवन पवित्र पुरुषोत्तम महीने में मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और मदिरा जैसे नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित है। सात्विक आहार ग्रहण करने से मन शांत रहता है और भगवान की भक्ति में एकाग्रता बनी रहती है। तामसिक भोजन का त्याग इस महीने की अनिवार्य शर्त है।

4. अनैतिक आचरण और कटु वचन वैसे तो झूठ बोलना, किसी को धोखा देना या किसी की निंदा करना हमेशा गलत है, लेकिन पुरुषोत्तम मास में इन आदतों से बचना बेहद जरूरी है। इस महीने में किया गया कोई भी अनैतिक कार्य या किसी का दिल दुखाना सामान्य से कहीं अधिक पाप दिला सकता है।

5. गुप्त दान की महिमा और दिखावे से बचाव अधिकमास में दान का विशेष महत्व है, लेकिन दान देते समय अहंकार या प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। साथ ही, खराब अनाज, बासी भोजन या तिल के तेल जैसी वस्तुओं का दान करने से बचना चाहिए। दान हमेशा अपनी सामर्थ्य के अनुसार और श्रद्धा भाव से करना चाहिए।