
पुणे के आईटी और कॉर्पोरेट हब में 9-टू-5 की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना आज के युवाओं का सबसे बड़ा सपना बन चुका है। इसी कड़ी में पुणे के बानेर-हिंजेवाड़ी बेल्ट में रहने वाले 38 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल दंपति ने महज 38 साल की उम्र में अपनी नौकरी से आजादी पाने और जल्दी रिटायरमेंट लेने का एक अचूक रोडमैप तैयार कर मिसाल पेश की है। आज जब ज्यादातर लोग 60 की उम्र के बाद भी लोन और ईएमआई के जाल में उलझे रहते हैं, तब इस कपल ने ‘FIRE’ यानी फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली (Financial Independence, Retire Early) मॉडल को अपनाकर समय से पहले आर्थिक आजादी हासिल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
क्या है वह एक नियम जिसने तय किया इनका FIRE फॉर्म्युला?
इस दंपति की पूरी वित्तीय योजना की नींव ‘लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन’ (Lifestyle Inflation) पर सख्त लगाम लगाने की नीति पर टिकी है। अधिकांश प्रोफेशनल्स की आय जैसे-जैसे बढ़ती है, वैसे-वैसे उनके खर्च, महंगे गैजेट्स, लग्जरी गाड़ियां और बड़े घर की चाहत भी तेजी से बढ़ने लगती है। इस कपल ने शुरुआत से ही अपनी सैलरी का एक तय पैमाना निर्धारित किया। आय दोगुनी होने के बावजूद उन्होंने अपने मासिक रहन-सहन के खर्चों को कभी अनियंत्रित नहीं होने दिया। आमदनी में हुई हर वेतन वृद्धि को नए खर्चों में बदलने के बजाय उन्होंने 70:30 का कड़ा नियम लागू किया, जहां कुल आय का 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे निवेश में गया और केवल 30 प्रतिशत से घर का पूरा बजट चलाया गया।
अनुशासित निवेश और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन की रणनीति
अर्ली रिटायरमेंट के लिए केवल बचत करना काफी नहीं होता, बल्कि सही एसेट क्लास में निरंतर निवेश सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुणे के इस कपल ने कंपाउंडिंग की ताकत को समझकर म्यूचुअल फंड एसआईपी (Equity Mutual Fund SIP), इंडेक्स फंड्स, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में संतुलित एलोकेशन किया। इक्विटी मार्केट में लंबे समय तक बने रहने से उनके निवेश पोर्टफोलियो ने महंगाई को पछाड़ते हुए लगभग 12 से 14 प्रतिशत का औसत रिटर्न दिया। इसके अलावा, रियल एस्टेट में भारी ईएमआई के जाल में फंसने के बजाय उन्होंने किराये के मकान में रहकर डाउन पेमेंट के बड़े फंड को ग्रोथ एसेट्स में लगाए रखा।
महंगाई और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने का कड़ा सुरक्षा चक्र
रिटायरमेंट प्लानिंग में अक्सर लोग भविष्य की स्वास्थ्य लागत और स्वास्थ्य आपात स्थितियों की उपेक्षा कर देते हैं। इस दंपति ने अपनी रिटायरमेंट रणनीति में हेल्थ इंश्योरेंस और एक समर्पित मेडिकल इमरजेंसी फंड को सबसे शीर्ष प्राथमिकता दी। उन्होंने कॉर्पोरेट बीमा के भरोसे रहने के बजाय अपने पूरे परिवार के लिए एक व्यापक सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लिया। इसके साथ ही, उन्होंने अगले तीन साल के अनिवार्य घरेलू खर्चों के बराबर एक लिक्विड फंड रिजर्व तैयार रखा ताकि शेयर बाजार में किसी भी संभावित मंदी के समय उन्हें अपने बुनियादी निवेश को बेचना न पड़े।
पुणे के युवाओं के लिए बड़ा सबक और भविष्य का वित्तीय रोडमैप
समय से पहले रिटायरमेंट का मतलब काम छोड़ कर खाली बैठना नहीं, बल्कि अपनी पसंद, पैशन और मानसिक शांति के लिए काम करने की स्वतंत्रता पाना है। 38 साल की उम्र में हासिल की गई यह आर्थिक स्वतंत्रता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर वित्तीय अनुशासन, स्पष्ट लक्ष्य और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखा जाए, तो महानगरों में रहते हुए भी समय से पहले आत्मनिर्भर बना जा सकता है। यह केस स्टडी उन सभी वेतनभोगी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो लोन और दिखावे के कल्चर से बाहर निकलकर अपने भविष्य को सुरक्षित और तनावमुक्त बनाना चाहते हैं।
girls globe