
संसद के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) से ठीक पहले विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर मचे आंतरिक घमासान और दरारों के बीच, विपक्ष ने सरकार को संसद में घेरने के लिए अपनी नई और आक्रामक रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) में हुई हालिया टूट के साथ-साथ तमिलनाडु में डीएमके (DMK) की कथित नाराजगी ने विपक्षी एकजुटता पर कई सवाल खड़े किए थे।
कांग्रेस के शीर्ष रणनीतिकार भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि इन अप्रत्याशित घटनाक्रमों से गठबंधन के विरोध की धार थोड़ी कमजोर जरूर हुई है, लेकिन विपक्ष अपनी बची हुई पूरी ताकत को झोंककर सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलेगा।
खरगे के आवास पर रणनीति बैठक; राहुल गांधी भी रहे मौजूद
मानसून सत्र में सरकार पर तीखा प्रहार करने के उद्देश्य से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक हाई-लेवल बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल विशेष रूप से मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में मुख्य रूप से तीन एजेंडों पर चर्चा हुई—संसद सत्र के दौरान फ्लोर मैनेजमेंट, विपक्षी दलों की एकजुटता को बनाए रखना और कांग्रेस संगठन से जुड़े अहम बदलाव।
राम मंदिर ‘चढ़ावा चोरी’ को भ्रष्टाचार और आस्था का बड़ा मुद्दा बनाएगा विपक्ष
बैठक के समापन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बड़ा और बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला।
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विपक्ष का आरोप: वेणुगोपाल ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचारों में से एक है।
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आस्था पर चोट: उन्होंने इसे केवल एक वित्तीय घोटाला न मानकर करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था पर एक बड़ा आघात बताया।
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VHP और संघ पर निशाना: कांग्रेस नेता ने इस कथित चोरी के लिए सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) को जिम्मेदार ठहराया और ऐलान किया कि आगामी संसद सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को पूरी ताकत और जोर-शोर से उठाएगा।
नाराज DMK को साधने में जुटा विपक्ष, एकजुटता का दावा
तमिलनाडु में टीवीके (TVK) सरकार में कांग्रेस के शामिल होने के बाद से उपजी नाराजगी के कारण द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर जारी है। हालांकि, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने आश्वस्त करते हुए बताया कि ‘इंडिया’ गठबंधन के कई प्रमुख घटक दल लगातार डीएमके के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में बने हुए हैं। कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि इस स्थानीय नाराजगी के बावजूद डीएमके संसद के भीतर इंडिया गठबंधन के सामूहिक और एकतरफा निर्णयों के खिलाफ नहीं जाएगा, जिससे सरकार को घेरने की राह में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी।
नई रणनीति: ‘एक समय पर एक मुद्दा’ ताकि बना रहे सरकार पर दबाव
इस बार के मानसून सत्र में विपक्ष ने अपनी पुरानी गलतियों से सीखते हुए एक नई संसदीय रणनीति तैयार की है। विपक्ष के नेताओं के अनुसार, इस बार सदन में एक साथ सभी मुद्दों को उठाकर हंगामा करने के बजाय ‘एक समय पर एक मुद्दा’ (One Issue at a Time) नीति पर काम किया जाएगा:
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सिलसिलेवार घेराबंदी: विपक्षी दल सभी ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों को एक साथ उठाने के बजाय हर दिन या हर हफ्ते सिलसिलेवार ढंग से अलग-अलग एजेंडे के तहत सामने लाएंगे।
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लगातार दबाव: इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि पूरे सत्र के दौरान सरकार पर लगातार और व्यवस्थित रूप से दबाव बना रहे और चर्चा से सरकार बच न पाए।
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चर्चा की मांग: कई गंभीर और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर केवल हंगामा करने के बजाय सदन के नियमों के तहत विस्तृत चर्चा की भी मांग की जाएगी।
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