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Oyo IPO: ओयो के आईपीओ का घटेगा आकार! खबर तो ऐसी ही आ रही

हॉस्पिटैलिटी और होटल चेन सेक्टर की दिग्गज कंपनी ओयो (OYO) की पैरेंट कंपनी प्रिज़्म (Prism / Oravel Stays) को लेकर शेयर बाजार और प्राइमरी मार्केट के गलियारों में एक बहुत बड़ी खबर तेजी से वायरल हो रही है। जो निवेशक लंबे समय से इस मेगा आईपीओ (IPO) का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह खबर काफी अहम साबित होने वाली है। मार्केट सूत्रों और हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओयो अपने प्रस्तावित आईपीओ के साइज को आधा (लगभग 50 प्रतिशत तक) घटा सकती है।

पहले जहां कंपनी लगभग 6,650 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू लाने की तैयारी में थी, वहीं अब खबर आ रही है कि इसे घटाकर करीब 3,350 करोड़ रुपये (लगभग $400-600 मिलियन डॉलर) किया जा सकता है। इस बड़े फैसले के पीछे कंपनी का बदलता फाइनेंशियल मॉडल, मजबूत होता कैश फ्लो और बैलेंस शीट को तेजी से सुधारने की रणनीति बताई जा रही है।

ओयो के आईपीओ का साइज आधा होने की खबर से रिटेल और संस्थागत (Institutional) दोनों तरह के निवेशकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो यह कंपनी की एक सुविचारित रणनीति का हिस्सा है।

कंपनी ने बीते कुछ वर्षों में लागत कटौती (Cost Optimization) और विदेशी बिजनेस के रीस्ट्रक्चरिंग पर तेजी से काम किया है। मोटेल 6 (Motel 6), स्टूडियो 6, बेलविल्ला (Belvilla) और डेनसेंटर (DanCenter) जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के जुड़ने और ऑपरेशन्स सुधरने से कंपनी का एबिटडा (EBITDA) लगातार सकारात्मक हो चुका है। जब कंपनी अपने आंतरिक कैश फ्लो से ही बिजनेस चलाने और कर्ज चुकाने में सक्षम हो रही है, तो बाजार से ज्यादा नए शेयर जारी करके मौजूदा इक्विटी को डाइल्यूट (Dilute) करने की जरूरत कम हो जाती है।

इसके अलावा, विश्लेषकों का मानना है कि छोटा इश्यू साइज बाजार में आसानी से एब्जॉर्ब हो जाता है, जिससे लिस्टिंग के दिन बेहतर प्रीमियम और मजबूत रिस्पॉन्स मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

कंपनी के अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) और रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे आईपीओ में कोई भी ऑफर फॉर सेल (OFS) कंपोनेंट शामिल नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि सॉफ्टबैंक (SoftBank), संस्थापक रीतेश अग्रवाल, माइक्रोसॉफ्ट, एयरबीएनबी, पीक XV पार्टनर्स या लाइटस्पीड जैसे मौजूदा निवेशक और प्रमोटर्स अपना एक भी शेयर नहीं बेच रहे हैं।

पूरी जुटाई जाने वाली राशि ‘फ्रेश इश्यू’ के रूप में सीधे कंपनी के खजाने में जाएगी। कंपनी का मुख्य उद्देश्य आईपीओ से मिलने वाले फंड का एक बड़ा हिस्सा अपने पुराने कर्ज (Debt Repayment) को चुकाने में खर्च करना है। जब कंपनी अपना डेट बोझ कम कर लेगी, तो ब्याज का खर्च घटेगा और शुद्ध मुनाफा (Net Profit) सीधे तौर पर बढ़ जाएगा।

रीतेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली इस कंपनी ने सेबी (SEBI) के पास कॉन्फिडेंशियल और पब्लिक रूट से दस्तावेज जमा कराए थे। बाजार के विशेषज्ञों का अनुमान है कि कंपनी अपने इस संशोधित साइज के साथ इसी चालू वित्त वर्ष के दौरान शेयर बाजार (NSE और BSE) पर कदम रख सकती है।

आईपीओ के साइज में कटौती की खबर के बाद अनलिस्टेड शेयर मार्केट (Pre-IPO Market) में भी हलचल देखने को मिल रही है। निवेशक इसे ओयो के लिए एक पॉजिटिव संकेत के रूप में देख रहे हैं क्योंकि कंपनी अब सिर्फ बड़े वैल्यूएशन के पीछे भागने के बजाय प्रॉफिटेबिलिटी और सस्टेनेबल ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आने वाले दिनों में जब कंपनी अंतिम RHP दाखिल करेगी, तब इसका प्राइस बैंड और सटीक लिस्टिंग डेट पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।