
एक जमाना था जब भारत में रियलिटी शोज़ (Reality Shows) का मतलब सिर्फ टेलीविजन और उसका फिक्स वीकेंड फॉर्मेट होता था. लेकिन डिजिटल क्रांति के इस दौर में अब रियलिटी मनोरंजन की पूरी तस्वीर तेजी से बदल चुकी है. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (OTT Platforms) ने इस जॉनर में एक नया अध्याय लिख दिया है.
भारतीय टीवी जगत का सबसे बड़ा सर्वाइवल शो ‘बिग बॉस’ (Bigg Boss) पिछले 19 सालों से बिना किसी स्क्रिप्ट के एक ही ढर्रे पर राज कर रहा है. लेकिन अब समय के साथ न बदलने वाले इस पारंपरिक फॉर्मेट को सीधी टक्कर देने के लिए ओटीटी पर ‘लॉक अप 2’ (Lock Upp 2) और ‘एलायंस’ (Alliance) जैसे दो बड़े और आधुनिक शोज़ आ चुके हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया से लेकर व्यूअरशिप तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
रितेश-फराह का ‘लॉक अप 2’ और कुणाल खेमू का ‘एलायंस’ बटोर रहा सुर्खियां
ओटीटी की दुनिया में इन दोनों नए शोज़ ने आते ही दर्शकों को अपने नए और अनोखे प्रयोगों से बांध लिया है:
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एकता कपूर का ‘लॉक अप 2’: चार साल के लंबे इंतजार के बाद यह शो बिल्कुल नए अवतार में लौटा है. इस बार इसकी कमान बॉलीवुड एक्टर रितेश देशमुख और मशहूर फिल्ममेकर-यूट्यूबर फराह खान के हाथों में है.
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‘एलायंस’ में कंप्यूटर सिस्टम का जलवा: इस शो के जरिए एक्टर कुणाल खेमू ने बतौर होस्ट अपना ओटीटी डेब्यू किया है. इस शो की सबसे खास बात यह है कि ‘बिग बॉस’ की भारी-भरकम आवाज की तरह नहीं, बल्कि यहां एक कंप्यूटर स्क्रीन (सिस्टम) कंटेस्टेंट्स को टास्क और निर्देश देती है. इन दोनों शोज़ के नए एपिसोड रोजाना (Daily Drops) रिलीज किए जाते हैं, जिससे दर्शकों का सस्पेंस बना रहता है.
कम पाबंदियां और बोल्ड कंटेंट (No Censor Restrictions)
टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग के कड़े नियमों के विपरीत, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भाषा, थीम और संवेदनशील विषयों को लेकर काफी ज्यादा रचनात्मक आजादी (Creative Freedom) मिलती है.
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संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा: ‘लॉक अप 2’ में इस बार LGBTQIA+ समुदाय जैसे विषयों पर खुलकर बात की जा रही है, वहीं टीवी एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने प्रोड्यूसर संजय कोहली पर लगाए गए अपने पुराने विवादित आरोपों पर दोबारा बात कर सनसनी फैला दी है.
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पर्सनल लाइफ के खुलासे: दूसरी तरफ, ‘एलायंस’ शो में पूर्व शादीशुदा जोड़े सोहेल खान और सीमा सजदेह को एक साथ एक ही छत के नीचे लाया गया है, जहां वे अपने अलग होने और निजी जिंदगी के अंतर्विरोधों पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं.
फालतू के झगड़े बंद, अब माइंड गेम्स और रणनीति का दौर
पारंपरिक रियलिटी शोज़ में जहां सिर्फ चीखने-चिल्लाने और शारीरिक झगड़ों के दम पर फुटेज बटोरी जाती थी, वहीं ‘लॉक अप’ और ‘एलायंस’ में गेम पूरी तरह बदल चुका है:
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रणनीति से मिलेगा सर्वाइवल: इन शोज़ में टिके रहना सिर्फ जनता की वोटिंग पर निर्भर नहीं करता. यहां कंटेस्टेंट्स को माइंड गेम्स (Psychological Games), आपसी गठबंधन और सोच-समझकर रणनीतिक फैसले लेने पड़ते हैं.
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नयापन पसंद कर रहे दर्शक: जो दर्शक टीवी पर रोज-रोज के वही घिसे-पिटे झगड़े देखकर ऊब चुके थे, उनके लिए इन शोज़ का यह नया साइकोलॉजिकल फॉर्मेट काफी दिलचस्प और फ्रेश साबित हो रहा है.
सोशल मीडिया रील्स और क्लिप्स बने सफलता की असली चाबी
इन डिजिटल शोज़ की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉट्स और एक्स (X) पर वायरल होने वाले वीडियो क्लिप्स को जाता है. आज के समय में किसी शो की सफलता का पैमाना सिर्फ टीआरपी नहीं, बल्कि उसकी सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चा है.
जैसे म्यूचुअल फंड में सही समय पर किया गया स्मार्ट निवेश भविष्य में बड़ा फायदा देता है, ठीक वैसे ही इन शोज़ के मेकर्स ने सोशल मीडिया और मीम पेजेस पर सही क्लिप्स प्रमोट करके करोड़ों नए और युवा (Gen Z) दर्शकों को अपने प्लेटफॉर्म तक खींच लिया है.
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