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NPCI का आधिकारिक सर्कुलर जारी: आम जनता के लिए पूरी तरह फ्री रहेगा UPI, सोशल मीडिया की अफवाहों पर लगा विराम

भारत में डिजिटल लेन-देन की जीवनरेखा बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मचे भारी घमासान और संशय के बीच नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। एनपीसीआई ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के पुनर्गठन को लेकर एक औपचारिक सर्कुलर जारी कर दिया है। इस आधिकारिक आदेश के साथ ही उन सभी भ्रामक दावों पर हमेशा के लिए ताला लग गया है, जिनमें यह कहा जा रहा था कि आम उपभोक्ताओं द्वारा ₹2,000 से अधिक का यूपीआई पेमेंट करने पर उनके बैंक खाते से चार्ज काटा जाएगा। सर्कुलर में अक्षरों में दर्ज किया गया है कि देश के आम नागरिकों, खुदरा ग्राहकों और एक खाते से दूसरे खाते में पैसे भेजने (P2P) वाले उपयोगकर्ताओं के लिए यूपीआई सेवा पहले की तरह 100 प्रतिशत मुफ्त बनी रहेगी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज से लेकर देश भर के मेट्रो और ग्रामीण इलाकों में रोजमर्रा के लेनदेन करने वाले करोड़ों नागरिकों को इससे सबसे बड़ी राहत मिली है। सरकार ने साफ किया है कि डिजिटल इंडिया की इस क्रांति में आम उपभोक्ता की जेब पर एक पैसे का भी अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।

एनपीसीआई के नए सर्कुलर के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से जो नया एमडीआर ढांचा लागू हो रहा है, उसका प्रभाव केवल व्यापारिक प्रतिष्ठानों (Merchants) पर पड़ेगा, आम ग्राहकों पर नहीं। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह तकनीकी सेवा शुल्क होता है जो कोई कारोबारी अपने बैंक और पेमेंट गेटवे को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के एवज में देता है। नए नियमों के तहत यदि कोई उपभोक्ता किसी बड़े स्टोर, शोरूम, इलेक्ट्रॉनिक्स आउटलेट या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से ₹2,000 से अधिक की खरीदारी करके यूपीआई से भुगतान करता है, तो उस बड़े मर्चेंट पर 0.40 प्रतिशत (0.4%) की दर से एमडीआर लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, बड़े लेन-देन पर शुल्क को नियंत्रित रखने के लिए प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम ₹300 की ऊपरी सीमा (Cap) तय की गई है।

आइए इस 0.4% एमडीआर और ₹300 कैप के असर को एक सीधे उदाहरण से समझते हैं: यदि आप किसी बड़े मॉल से ₹2,500 के कपड़े खरीदते हैं और क्यूआर कोड स्कैन करके यूपीआई से भुगतान करते हैं, तो आपके बैंक खाते से केवल ₹2,500 ही कटेंगे। मर्चेंट के बैंक द्वारा उस ₹2,500 पर 0.4% की दर से मात्र ₹10 का एमडीआर काटा जाएगा और दुकानदार को ₹2,490 प्राप्त होंगे। इसी तरह यदि कोई ग्राहक ₹50,000 का लैपटॉप खरीदता है, तो 0.4% की दर से मर्चेंट पर ₹200 का शुल्क लगेगा। यदि ट्रांजैक्शन ₹1,00,000 का होता है, तो गणितीय रूप से 0.4% ₹400 बनता है, लेकिन ₹300 की अधिकतम सीमा (Cap) लागू होने के कारण मर्चेंट से केवल ₹300 ही लिए जाएंगे। यह पूरी लागत व्यापारी के व्यावसायिक खर्च का हिस्सा होगी, जिसे किसी भी हाल में ग्राहक के फाइनल बिल में अलग से जोड़ने की कानूनी अनुमति नहीं होगी।

सर्कुलर का सबसे मानवीय और संवेदनशील पहलू देश के करोड़ों छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, फल-सब्जी विक्रेताओं और मोहल्ले के किराना व्यापारियों को दिया गया वैधानिक सुरक्षा कवच है। एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था और सूक्ष्म उद्यमियों (Micro Merchants) को इस नए नियम से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसके लिए ‘P2PM’ (पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट) की विशेष कैटेगरी बनाई गई है। वे सभी छोटे व्यापारी जो अपने क्यूआर कोड या यूपीआई नंबर पर महीने भर में कुल ₹1,00,000 (1 लाख रुपये) तक का डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं, उन पर किसी भी प्रकार का एमडीआर लागू नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि लखनऊ के अमीनाबाद, हजरतगंज या कानपुर के गुमटी बाजार में बैठा कोई छोटा दुकानदार यदि किसी ग्राहक से ₹2,500 या ₹3,000 का एकमुश्त पेमेंट भी लेता है, तब भी उस दुकानदार से कोई कटौती नहीं की जाएगी, क्योंकि उसका मासिक टर्नओवर सुरक्षा सीमा के भीतर है। इसके अतिरिक्त, देश में होने वाले कुल यूपीआई मर्चेंट पेमेंट्स का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ₹2,000 से कम का होता है, और ₹2,000 तक के सभी ट्रांजैक्शन पहले से ही कानूनन शून्य एमडीआर के दायरे में आते हैं।

दैनिक जनजीवन से जुड़ी आवश्यक सेवाओं (Utility Services) और सरकारी पोर्टलों पर डिजिटल भुगतान की गति बनी रहे, इसके लिए सरकार ने सर्कुलर में विशेष रियायतें दी हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, रेलवे, गैस, बिजली, पानी और पेट्रोलियम जैसे सेक्टरों को 0.40% के मानक एमडीआर से पूरी तरह अलग रखा गया है। यदि कोई नागरिक आईआरसीटीसी (IRCTC) से ₹2,000 से अधिक का ट्रेन टिकट बुक करता है, अस्पताल में ₹5,000 की दवाइयों का बिल चुकाता है, स्कूल-कॉलेज की फीस भरता है, ₹3,000 का बिजली बिल जमा करता है या पेट्रोल पंप पर गाड़ी का टैंक फुल करवाता है, तो मर्चेंट-साइड पर प्रतिशत-आधारित शुल्क के बजाय केवल ₹5 का एकमुश्त फ्लैट टोकन चार्ज लगाया जाएगा। इस नाममात्र की लागत के कारण सरकारी विभागों और आवश्यक सेवा प्रदाताओं पर कोई वित्तीय दबाव नहीं आएगा और आम जनता को बिना किसी हिचकिचाहट के डिजिटल पेमेंट करने की सुविधा मिलती रहेगी।

पूंजी बाजार और खुदरा वित्तीय निवेश को बढ़ावा देने के लिए एनपीसीआई ने स्टॉक ब्रोकर्स, म्यूचुअल फंड एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) और सिक्योरिटीज डीलर्स के लिए एक अलग और बेहद रियायती स्लैब निर्धारित किया है। सेबी-पंजीकृत ब्रोकर्स (जैसे Zerodha, Groww, Angel One, Upstox) के ट्रेडिंग अकाउंट में फंड ऐड करने या म्यूचुअल फंड में लम्पसम निवेश करने पर मानक 0.40% के स्थान पर केवल 0.02 प्रतिशत (0.02%) का कंसेशनल एमडीआर लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा भी ₹300 रखी गई है। यानी यदि कोई ट्रेडर अपने ट्रेडिंग वॉलेट में ₹1,00,000 जोड़ता है, तो ब्रोकरेज फर्म पर केवल ₹20 का मामूली एमडीआर देय होगा। सबसे बड़ी राहत यह है कि हर महीने कटने वाली म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP), जो ‘यूपीआई ऑटोपे’ (UPI AutoPay) या बैंक मैंडेट के जरिए प्रोसेस होती है, उस पर कोई एमडीआर लागू नहीं होगा। करोड़ों नौकरीपेशा निवेशकों की मासिक एसआईपी पहले की तरह पूरी तरह फ्री और निर्बाध रूप से जारी रहेगी।

अब यह बुनियादी सवाल उठता है कि आखिर सरकार और एनपीसीआई को यह नया सर्कुलर जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसका उत्तर भारत के डिजिटल पेमेंट नेटवर्क की अभूतपूर्व वृद्धि में छिपा है। वर्तमान समय में देश में हर महीने लगभग 15 से 16 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन प्रोसेस हो रहे हैं। इस विशालकाय नेटवर्क को 24 घंटे बिना किसी सर्वर फेलियर के चालू रखने, हाई-स्पीड डेटा सेंटर्स को मेंटेन करने, उन्नत साइबर सुरक्षा उपाय लागू करने और फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम को मजबूत करने के लिए बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (जैसे बैंकों और फिनटेक कंपनियों) को भारी पूंजीगत खर्च करना पड़ता है। सरकार अब तक इस घाटे की भरपाई अपने बजट से सब्सिडी देकर करती आ रही थी। लेकिन डिजिटल तंत्र को आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से व्यावहारिक (Financially Viable) और वैश्विक मानकों पर टिकाऊ बनाने के लिए यह संतुलित मॉडल तैयार किया गया है। बड़े कॉर्पोरेट और सुपरमार्केट मर्चेंट्स से जुटाए जाने वाले इस मामूली एमडीआर का इस्तेमाल सर्वर की क्षमता बढ़ाने, डाउनटाइम को शून्य करने और भारत के यूपीआई नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

नए सर्कुलर के लागू होने के बीच साइबर ठगों द्वारा लोगों को गुमराह करने और फर्जी एसएमएस भेजने की कोशिशें बढ़ सकती हैं। रिजर्व बैंक और एनपीसीआई ने सभी नागरिकों से सतर्क रहने की अपील करते हुए निम्नलिखित सुरक्षा सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • फर्जी ‘चार्ज डिडक्शन’ कॉल और मैसेज से सावधान: यदि आपके फोन पर कोई कॉल या मैसेज आता है कि ‘नया नियम लागू होने से आपका यूपीआई बंद हो जाएगा या चार्ज कटने वाला है, इसलिए इस लिंक पर क्लिक करें’, तो तुरंत सतर्क हो जाएं; बैंक कभी भी ऐसे लिंक नहीं भेजते।

  • पैसे प्राप्त करने के लिए कभी पिन (PIN) न डालें: याद रखें कि किसी भी दुकान, दोस्त या सरकारी योजना से पैसा प्राप्त करने (Receive Money) के लिए कभी भी यूपीआई पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं होती। यूपीआई पिन केवल तभी डाला जाता है जब आपके खाते से पैसा कट रहा हो।

  • मर्चेंट क्यूआर कोड की जांच: भुगतान करने से पहले स्क्रीन पर दिखने वाले दुकानदार के नाम और खाते की पुष्टि अवश्य कर लें।

  • अनजान ऐप्स और स्क्रीन शेयरिंग से बचें: कभी भी किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर एनीडेस्क या टीमव्यूअर जैसी स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स डाउनलोड न करें।

  • हेल्पलाइन नंबर 1930: यदि आपके साथ यूपीआई के जरिए कोई धोखाधड़ी या साइबर वित्तीय अपराध होता है, तो बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते ट्रांजैक्शन को ब्लॉक किया जा सके।