
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में पिछले कई महीनों से जारी भयंकर तनाव और परमाणु युद्ध की आहट के बीच दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। लंबे समय से एक-दूसरे के खून के प्यासे बने अमेरिका और ईरान अब एक ‘फाइनल सीजफायर डील’ (अंतिम युद्धविराम समझौते) के बेहद करीब पहुंच गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनयिक सूत्रों के हवाले से मिली सनसनीखेज रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों महाशक्तियों के बीच अंतिम समझौते के मसौदे को तैयार करने के लिए बैकचैनल से बेहद गंभीर कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी महाडील में पड़ोसी देश पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका में सबसे आगे निकल आया है।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के तेहरान दौरे पर टिकीं दुनिया की नजरें
अंतरराष्ट्रीय न्यूज पोर्टल ‘अल अरबिया’ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस गुप्त समझौते को अंतिम रूप देने के लिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर बुधवार को अचानक ईरान की राजधानी तेहरान का दौरा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि जनरल मुनीर वहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच तैयार हुए ‘अंतिम मसौदा समझौते’ (Final Draft Agreement) की आधिकारिक घोषणा भी कर सकते हैं।
रिपोर्ट्स में यह भी संकेत दिया गया है कि हज का सीजन खत्म होने के तुरंत बाद इस वार्ता का अगला और औपचारिक दौर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित किया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीति में पाकिस्तान की ‘बैकचैनल’ भूमिका को मजबूत किया है। आपको बता दें कि यह हलचल बीते 8 अप्रैल से लागू एक बेहद नाजुक और अस्थायी युद्धविराम के बीच हो रही है, जिसे स्थायी शांति में बदलने के लिए पाकिस्तान पिछले एक महीने से अप्रत्यक्ष बातचीत को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि, अभी तक इस्लामाबाद या तेहरान ने इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इस ऐतिहासिक समझौते में क्या हैं दोनों देशों की मुख्य शर्तें?
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यदि यह समझौता आधिकारिक रूप से सफल होता है, तो इसमें दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई प्रमुख मुद्दों को शामिल किया गया है:
होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना: वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और बहाल किया जाएगा।
प्रतिबंधों में ढील: अमेरिका द्वारा ईरान के ऊपर लगाए गए कड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों में बड़ी राहत दी जाएगी।
जमे हुए फंड की रिहाई: ईरान की सबसे बड़ी मांग है कि अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जमे हुए) पड़े उसके अरबों डॉलर के विदेशी कोष को तुरंत रिहा किया जाए।
समुद्री नाकाबंदी का खात्मा: फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई आक्रामक नाकाबंदी को हटाया जाएगा, जिससे समुद्री सुरक्षा की गारंटी मिल सके।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद माना- ‘मैंने रोक दिया था ईरान पर हमला’
इस महाडील की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से भी होती है जो उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में दिया था। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि मध्यस्थों के जरिए तेहरान (ईरान) से एक नया और संशोधित शांति प्रस्ताव मिलने के बाद उन्होंने अमेरिकी सेना को ईरान पर होने वाले बड़े सैन्य हमले को रोकने का आदेश दिया था।
ट्रंप ने बताया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे शक्तिशाली खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं ने उनसे व्यक्तिगत रूप से अपील की थी कि वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कूटनीति और बातचीत को थोड़ा और समय दें।
‘अमेरिका नया युद्ध थोपना चाहता है’ – ईरान की आखिरी चेतावनी
एक तरफ जहां समझौते की मेज सजी है, वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई भी साफ नजर आ रही है। बुधवार सुबह ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने एक ऑडियो संदेश जारी कर कहा, “अमेरिका मध्य पूर्व में शांति का नाटक कर रहा है, जबकि वह असल में यहां एक और नया युद्ध शुरू करना चाहता है।”
गालिबाफ ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि दुश्मन तमाम आर्थिक और राजनीतिक दबाव के बावजूद अपने सैन्य इरादों से पीछे नहीं हटा है। अगर ट्रंप प्रशासन ने शांति समझौते पर पूरी ईमानदारी से हस्ताक्षर नहीं किए और धोखा दिया, तो ईरानी सेना भी इसका ऐसा विनाशकारी और उचित जवाब देगी जिसे अमेरिका कभी भूल नहीं पाएगा।
8 अप्रैल का युद्धविराम और जेडी वेंस का बड़ा बयान
याद दिला दें कि 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए एक अस्थायी समझौते ने दोनों पक्षों के बीच सीधे और घातक टकराव को रोक दिया था, जिसने वैश्विक शेयर बाजारों और तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया था। इसके बाद भी दोनों देशों के बीच लगातार जुबानी जंग जारी है।
हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा था, “अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में काफी अच्छी प्रगति हो रही है।” हालांकि, वेंस ने ईरान को अपनी हद में रहने की चेतावनी देते हुए यह भी जोड़ दिया कि अमेरिका की घातक सेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है।
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