नई दिल्ली | भारत के वित्तीय इतिहास में 1 अप्रैल 2026 की तारीख एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज हो गई है। केंद्र सरकार ने 65 साल पुराने ‘आयकर अधिनियम 1961’ को अलविदा कहते हुए अब ‘नया आयकर अधिनियम 2025’ लागू कर दिया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य टैक्स नियमों की जटिलता को खत्म करना और करदाताओं के लिए प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। वित्त अधिनियम-2026 की अधिसूचना के साथ ही अब पुराने और अप्रासंगिक नियमों को हटा दिया गया है, जिससे नौकरीपेशा और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अब ‘वित्तीय वर्ष’ का झंझट खत्म, सीधे ‘कर वर्ष’ की होगी गणना
नए कानून के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलाव टैक्स की गणना के तरीके में किया गया है। अब तक करदाताओं को ‘वित्तीय वर्ष’ (Financial Year) और ‘मूल्यांकन वर्ष’ (Assessment Year) के बीच उलझना पड़ता था, लेकिन अब केवल ‘कर वर्ष’ (Tax Year) ही प्रभावी होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि आप जिस साल पैसा कमाएंगे, उसी साल उस पर टैक्स की गणना और भुगतान किया जाएगा। इससे कागजी कार्रवाई और तकनीकी उलझने काफी कम हो जाएंगी।
उपहार और बच्चों के भत्ते में भारी बढ़ोतरी: मिडिल क्लास की बल्ले-बल्ले
सरकार ने नौकरीपेशा वर्ग को खुश करते हुए भत्तों की सीमा में बड़ी वृद्धि की है। अब कंपनियों से मिलने वाले गिफ्ट वाउचर पर टैक्स छूट की सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा, दशकों पुराने शिक्षा और हॉस्टल भत्ते में भी ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। बच्चों का शिक्षा भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर सीधे 3,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, जबकि हॉस्टल भत्ता अब 300 रुपये के बजाय 9,000 रुपये प्रति माह मिलेगा। यह लाभ पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में लागू होगा।
HRA के नियम हुए सख्त, 4 नए शहरों को मिला ‘मेट्रो’ का दर्जा
अब फर्जी रेंट एग्रीमेंट के जरिए टैक्स बचाना मुमकिन नहीं होगा। एचआरए (HRA) क्लेम करने के लिए अब मकान मालिक का पैन कार्ड और भुगतान का डिजिटल प्रमाण देना अनिवार्य है। हालांकि, किराएदारों के लिए एक अच्छी खबर भी है। सरकार ने बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी अब मेट्रो शहरों की सूची में शामिल कर लिया है। इसका मतलब है कि इन शहरों में रहने वाले कर्मचारी अब अपनी बेसिक सैलरी का 50% तक HRA छूट प्राप्त कर सकेंगे, जो पहले केवल 40% था। अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई सहित कुल 8 शहरों में यह लाभ मिलेगा।
PAN कार्ड के नियमों में बदलाव और क्रेडिट कार्ड पर नजर
पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को भी अब अधिक विशिष्ट बना दिया गया है। अब केवल आधार दिखाने से पैन नहीं बनेगा, बल्कि अलग-अलग श्रेणियों के लिए नए फॉर्म (फॉर्म 93 से 96) भरने होंगे। इसके अलावा, आयकर विभाग की नजर अब आपके खर्चों पर भी है। यदि आप क्रेडिट कार्ड से साल भर में 10 लाख रुपये से अधिक का ऑनलाइन खर्च या 1 लाख रुपये से अधिक का कैश ट्रांजेक्शन करते हैं, तो इसकी जानकारी सीधे विभाग को मिल जाएगी।
कौन सा ITR फॉर्म आपके लिए सही है? (वर्ष 2026-27)
आयकर विभाग ने करदाताओं की आसानी के लिए नए फॉर्म्स की सूची जारी की है:
ITR-1 (सरल): ₹50 लाख तक की आय वाले वेतनभोगी लोगों के लिए।
ITR-2: शेयर बाजार या प्रॉपर्टी से कमाई (Capital Gains) करने वालों के लिए।
ITR-3: बड़े बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए।
ITR-4 (सुगम): ₹50 लाख तक की आय वाले छोटे व्यापारियों के लिए।
ITR-6 और 7: कंपनियों और ट्रस्टों के लिए।
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