Nari Shakti Vandan Act : 2029 में ही मिलेगा महिलाओं को हक सरकार ने बिछाया कानूनी जाल, 2011 की जनगणना बनेगी आधार

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News India Live, Digital Desk: देश की राजनीति में आधी आबादी की भागीदारी को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को प्रभावी बनाने के लिए ‘मास्टर स्ट्रोक’ खेला है। 16 अप्रैल 2026 को जारी एक विशेष गजट नोटिफिकेशन के जरिए 2023 के कानून को आधिकारिक रूप से लागू (Notify) कर दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का रास्ता साफ करना है, जिसे लेकर अब संसद में संशोधनों का दौर शुरू हो गया है।

2029 vs 2034: कहाँ फंसा था पेच?

2023 में जब यह कानून पारित हुआ था, तब इसमें एक शर्त जोड़ी गई थी कि आरक्षण तभी लागू होगा जब:

नई जनगणना (Census) पूरी हो जाए।

उस जनगणना के आधार पर परिसीमन (Delimitation) का कार्य संपन्न हो।

चूंकि नई जनगणना में देरी हो रही थी, इसलिए विशेषज्ञों का मानना था कि यह कानून 2034 से पहले लागू नहीं हो पाएगा। लेकिन सरकार अब इसे 2029 में ही लागू करने पर अड़ गई है।

सरकार की नई रणनीति: 2011 की जनगणना का ‘आधार’

सरकार ने इस समय सीमा को कम करने के लिए एक नई कानूनी प्रक्रिया अपनाई है:

कानून को लागू करना: 16 अप्रैल 2026 को सबसे पहले पुराने कानून को लागू किया गया, क्योंकि संशोधन केवल लागू कानून में ही संभव है।

संशोधन विधेयक: अब सरकार ने लोकसभा में संशोधन पेश किया है ताकि नई जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना को ही परिसीमन का आधार बनाया जा सके।

850 लोकसभा सीटें: यदि यह संशोधन पास हो जाता है, तो परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो सकती है, जिनमें से करीब 280 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

यदि बिल गिर गया तो क्या होगा?

यदि लोकसभा या राज्यसभा में यह नया संशोधन पारित नहीं हो पाता है, तो सरकार को 16 अप्रैल 2026 को लागू हुए पुराने कानून के मूल प्रावधानों का ही पालन करना होगा। ऐसी स्थिति में:

नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन में कम से कम 4 साल का समय लगेगा।

नतीजा यह होगा कि 2029 के चुनाव पुराने ढर्रे पर ही होंगे और महिला आरक्षण के लिए 2034 तक का लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

विपक्ष का हमला: ‘पूरी तरह विचित्र फैसला’

सरकार की इस जल्दबाजी और प्रक्रिया पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे “पूरी तरह विचित्र” बताया है। विपक्ष का तर्क है कि बिल पर वोटिंग और संसद की मंजूरी से पहले ही नोटिफिकेशन जारी करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। कांग्रेस ने इसे चुनावी लाभ लेने की कोशिश करार दिया है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: अब तक का सफर

तारीख घटनाक्रम
19 सितंबर 2023 लोकसभा में विधेयक पेश किया गया।
20-21 सितंबर 2023 लोकसभा और राज्यसभा से भारी बहुमत से पारित।
16 अप्रैल 2026 सरकार द्वारा कानून को लागू करने का नोटिफिकेशन जारी।
भविष्य (प्रस्तावित) 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और 2029 में लागू

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