
बारिश का सुहावना मौसम जहाँ भीषण गर्मी से राहत दिलाता है, वहीं अपने साथ डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, डायरिया और स्किन इन्फेक्शन जैसी तमाम मौसमी बीमारियों की सौगात भी लेकर आता है। मानसून के दौरान हवा में नमी (Humidity) बढ़ने और पाचन अग्नि मंद पड़ने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर हो जाती है। इस मौसमी संकट से निपटने और लोगों को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) ने मानसून विशेष स्वास्थ्य दिशानिर्देश जारी किए हैं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो किचन में मौजूद आयुर्वेदिक औषधियों और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर आप बिना किसी भारी-भरकम दवा के इस पूरे सीजन में पूरी तरह सेहतमंद रह सकते हैं। आइए जानते हैं आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए प्रमुख उपाय।
1. पाचन शक्ति रखें मजबूत: हल्का और सुपाच्य भोजन लें
आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में जठराग्नि (पाचन अग्नि) कमजोर हो जाती है, इसलिए खान-पान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है:
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ताजा और गर्म खाना: बासी या ठंडा भोजन खाने से बचें। हमेशा ताजा पका हुआ, हल्का और सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करें।
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सेंधा नमक और सोंठ का प्रयोग: खाना बनाते समय उसमें चुटकी भर सेंधा नमक, भुना जीरा, सोंठ (सूखा अदरक) और हींग का उपयोग करें। यह आपकी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है।
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उबला पानी (Boiled Water): पीने के लिए हमेशा पानी को अच्छी तरह उबालकर, गुनगुना करके ही पिएं। उबला पानी शरीर के टॉक्सिन्स (विषैले पदार्थों) को बाहर निकालता है और वॉटर बॉर्न डिजीज से बचाता है।
2. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा और हर्बल टी
मौसमी वायरल इन्फेक्शन, सर्दी और जुकाम से बचने के लिए आयुष मंत्रालय ने हर्बल ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सिफारिश की है:
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आयुष काढ़ा: तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च और शुंठी (सोंठ) को पानी में उबालकर तैयार किया गया काढ़ा दिन में एक बार पिएं। स्वादानुसार इसमें थोड़ा गुड़ या नींबू का रस मिला सकते हैं।
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हल्दी वाला दूध (Golden Milk): रात को सोने से पहले आधा चम्मच हल्दी वाला गर्म दूध पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
3. मच्छरों से बचाव और घर के आसपास स्वच्छता
मानसून में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है, जो डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों की वजह बनता है:
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नीम के तेल का दिया या धुआं: शाम के समय घर में नीम के तेल का दीपक जलाएं या नीम के सूखे पत्तों का धुआं करें। यह एक प्राकृतिक मॉस्किटो रिपेलेंट (Mosquito Repellent) का काम करता है।
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जलजमाव न होने दें: घर के आसपास, कूलर, गमलों या खाली बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
4. स्किन इन्फेक्शन से बचाव के आयुर्वेदिक टिप्स
नमी के कारण त्वचा में खुजली, घमौरियां और फंगल इन्फेक्शन होना बेहद आम है:
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नीम के पानी से स्नान: नहाने के पानी में नीम के पत्ते उबालकर या नीम का रस मिलाकर नहाने से स्किन पर मौजूद बैक्टीरिया खत्म होते हैं।
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तिल या सरसो का तेल: नहाने से पहले शरीर पर हल्का तिल का तेल या सरसो के तेल की मालिश करना त्वचा के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।
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