News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर आधी आबादी को केंद्र में रखकर बड़ी बिसात बिछाई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल को वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर पहुँच रहे हैं। इस दौरान वे काशी में आयोजित होने वाले विशाल ‘महिला सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक संशोधन बिल (Constitutional Amendment Bill 2026) अपेक्षित समर्थन न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका है।
क्या है भाजपा की रणनीति?
भाजपा इस सम्मेलन के जरिए महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने और सीधे जनता (खासकर महिलाओं) के बीच अपना पक्ष रखने की तैयारी में है।
विपक्ष पर ‘राजनीतिक भ्रूण हत्या’ का आरोप: पीएम मोदी ने हाल ही में राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों की ‘राजनीतिक भ्रूण हत्या’ करने का आरोप लगाया था। वाराणसी के मंच से वे फिर इस मुद्दे को उठा सकते हैं।
50,000 महिलाओं का लक्ष्य: इस सम्मेलन की जिम्मेदारी भाजपा महिला मोर्चा को सौंपी गई है। काशी और आसपास के जिलों से 50 हजार से ज्यादा महिलाओं को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
भावुक संवाद (Emotional Outreach): सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी वाराणसी में महिलाओं से सीधे संवाद करेंगे और यह संदेश देंगे कि सरकार उनके हक के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ‘स्वार्थी राजनीति’ इसमें रोड़े अटका रही है।
28 अप्रैल के कार्यक्रम का पूरा खाका
शक्ति प्रदर्शन: यह सम्मेलन केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के मतदान और उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन होगा।
सुरक्षा और तैयारी: रविवार (19 अप्रैल) को भाजपा की काशी इकाई ने इस दौरे की तैयारियों की समीक्षा की। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के साथ-साथ आयोजन स्थल पर गर्मी को देखते हुए विशेष व्यवस्था की जा रही है।
2026 डीलिमिटेशन (परिसीमन): प्रधानमंत्री सम्मेलन में महिला आरक्षण और भविष्य में होने वाले परिसीमन (जिसके बाद लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 815 हो सकती हैं) के अंतर्संबंधों पर भी बात कर सकते हैं।
विपक्ष का रुख: अखिलेश और डिंपल की घेराबंदी
वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस सम्मेलन और बिल को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। सपा का कहना है कि सरकार महिलाओं को ‘दिखावा’ के तौर पर इस्तेमाल कर रही है और बिना जाति जनगणना के महिला आरक्षण का कोई लाभ पिछड़ी और दलित महिलाओं को नहीं मिलेगा।
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