
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को औद्योगिक नगरी कानपुर से जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे (Lucknow-Kanpur Expressway) के निर्माण कार्य में हो रही देरी और गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। परियोजना का निर्माण कर रही प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक (PNC Infratech) ने मीडिया में चल रही उन खबरों का पूरी तरह से खंडन किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कंपनी को डीबार या ब्लैकलिस्ट (Blacklist) कर दिया है। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि उन्हें एनएचएआई की तरफ से कोई डिबारमेंट आदेश नहीं मिला है, बल्कि केवल एक प्रक्रियात्मक ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया गया है जिसका जवाब दिया जा रहा है। हालांकि, इस पूरे मामले पर एनएचएआई के अधिकारियों के दावों और रुख ने संशय की स्थिति पैदा कर दी है।
कंपनी का पक्ष: न कोई ब्लैकलिस्टिंग हुई, न काम रुका
पीएनसी इंफ्राटेक ने शेयर बाजारों और मीडिया को दी गई अपनी सफाई में कहा है कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे परियोजना पर काम योजना के अनुसार जारी है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा निर्माण कार्य की गति, समय-सीमा और गुणवत्ता मानकों की नियमित समीक्षा के तहत एक सामान्य कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। कंपनी ने दावा किया है कि उन्होंने नोटिस का विस्तृत और तकनीकी जवाब एनएचएआई के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। पीएनसी का कहना है कि कंपनी को एनएचएआई के किसी भी आगामी टेंडर या वर्तमान प्रोजेक्ट से प्रतिबंधित (Debar/Blacklist) नहीं किया गया है और सोशल मीडिया या मीडिया के एक वर्ग में चलाई जा रही ब्लैकलिस्टिंग की खबरें पूरी तरह से भ्रामक और निराधार हैं।
NHAI का रुख और जमीनी हकीकत: निर्माण में देरी पर सख्ती
दूसरी तरफ, एनएचएआई (NHAI) के क्षेत्रीय अधिकारियों और सूत्रों का कहना अलग है। एनएचएआई के मुताबिक, एक्सप्रेस-वे के कुछ पैकेजों में भूमि अधिग्रहण, उपयोगिता स्थानांतरण (Utility Shifting) और निर्माण की तय समय-सीमा का पालन न होने के कारण कंपनी के प्रदर्शन पर सवाल उठे थे। एनएचएआई के अधिकारियों का तर्क है कि बार-बार चेतावनी और डेडलाइन बढ़ाए जाने के बावजूद कार्य की प्रगति असंतोषजनक पाई गई, जिसके बाद सख्त दंडात्मक कार्रवाई के तहत ठेकेदार कंपनी को नोटिस जारी कर ब्लैकलिस्टिंग या पेनल्टी लगाने की चेतावनी दी गई थी। एनएचएआई का मानना है कि निर्माण में हो रही देरी से न केवल परियोजना की लागत बढ़ रही है, बल्कि लखनऊ और कानपुर के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को भी ट्रैफिक जाम की भीषण समस्या से जूझना पड़ रहा है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे क्यों है उत्तर प्रदेश के लिए बेहद अहम?
लगभग 63 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन (एक्सपेंडेबल टू 8-लेन) एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारों में से एक है।
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सफर का समय घटेगा: वर्तमान में लखनऊ से कानपुर जाने में 1.5 से 2 घंटे या उससे अधिक समय लगता है, जबकि इस एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद यह दूरी महज 45 से 50 मिनट में पूरी हो सकेगी।
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कनेक्टिविटी: यह एक्सप्रेस-वे लखनऊ के शहीद पथ को कानपुर के आजाद मार्ग चौराहे से जोड़ेगा और बीच में नवाबगंज पक्षी विहार व उन्नाव से होकर गुजरेगा।
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3-डी एलिवेटेड रूट: इसका एक बड़ा हिस्सा (लगभग 18 किमी) एलिवेटेड हाईवे के रूप में बनाया जा रहा है, ताकि अमौसी एयरपोर्ट और घनी आबादी वाले इलाकों को बिना बाधा के पार किया जा सके।
आगे क्या होगा? परियोजना की समय-सीमा पर सभी की नजरें
कंपनी और एनएचएआई के बीच जारी इस जुबानी और कानूनी खींचतान के बीच सबसे बड़ा सवाल एक्सप्रेस-वे के पूरा होने की अंतिम तारीख (Deadline) को लेकर है। यदि एनएचएआई कंपनी के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है और कोई दंडात्मक कदम उठाता है, तो परियोजना का काम री-टेंडरिंग की वजह से और आगे खिसक सकता है। वहीं, यदि पीएनसी इंफ्राटेक काम में तेजी लाकर एनएचएआई के मानकों को पूरा कर देती है, तो विवाद समाप्त हो जाएगा। फिलहाल, लखनऊ और कानपुर के नागरिक इस खींचतान के बीच जल्द से जल्द एक्सप्रेस-वे के चालू होने का इंतजार कर रहे हैं।
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