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डिलीवरी बॉय और ड्राइवरों की चमकेगी किस्मत, मोदी सरकार लाने जा रही है धांसू स्कीम मिलेंगे ये 7 फायदे

अगर आप भी जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर या किसी अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए काम करते हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगी। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश के करोड़ों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। सरकार इन कर्मचारियों को पारंपरिक नौकरीपेशा लोगों की तरह सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) के दायरे में लाने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रही है।

श्रम और रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव और महानिदेशक (श्रम कल्याण) आशुतोष पेडनेकर ने इस मेगा प्लान का खुलासा करते हुए बताया कि सरकार गिग वर्कर्स के लिए एक खास वेलफेयर स्कीम पर काम कर रही है। इसके तहत एक्सीडेंटल इंश्योरेंस से लेकर बच्चों की पढ़ाई के लिए लोन तक, कई बेहतरीन सुविधाएं सीधे कामगारों को दी जाएंगी।

‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ से मिलेगी आर्थिक मजबूती

सरकार ने इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए ‘नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ के गठन को हरी झंडी दे दी है। यह बोर्ड विशेष रूप से इस सेक्टर में काम करने वाले लोगों के कल्याण के लिए नीतियां बनाएगा। इसके साथ ही एक समर्पित ‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ भी तैयार किया जा रहा है। इस फंड के जरिए सरकार फंड मैनेजर्स और एग्रीगेटर कंपनियों के साथ मिलकर कामगारों की मदद करेगी।

इन 7 बड़ी सुविधाओं से सुरक्षित होगा गिग वर्कर्स का भविष्य

सरकार की इस नई पहल के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को निम्नलिखित महत्वपूर्ण फायदे दिए जाएंगे:

  • एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (दुर्घटना बीमा): सड़क पर काम के दौरान होने वाले हादसों से सुरक्षा।

  • हेल्थ फैसिलिटी (स्वास्थ्य सुविधाएं): बीमारी के इलाज के लिए चिकित्सा सहायता।

  • मैटरनिटी सपोर्ट: महिला डिलीवरी पार्टनर्स को गर्भावस्था के दौरान आर्थिक मदद।

  • बुजुर्गों के लिए सुरक्षा: भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ओल्ड-एज प्रोटेक्शन या पेंशन की व्यवस्था।

  • कैश असिस्टेंस: जरूरत के समय सीधे बैंक खाते में वित्तीय सहायता।

  • एजुकेशन लोन: कामगारों और उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए आसान लोन की सुविधा।

  • अंतिम संस्कार के लिए मदद: किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार को अंतिम संस्कार के खर्च के लिए आर्थिक सपोर्ट।

22 जून तक कंपनियों को पूरा करना होगा यह जरूरी काम

इस ऐतिहासिक योजना का लाभ सीधे और बिना किसी देरी के असली हकदार तक पहुंचाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। सभी प्लेटफॉर्म और एग्रीगेटर कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कर्मचारियों का पूरा डेटा 22 जून तक ‘ई-श्रम’ (e-Shram) पोर्टल के साथ लिंक कर दें।

इस कदम के बाद कंपनियों का डेटाबेस सीधे सरकारी पोर्टल से जुड़ जाएगा, जिससे कर्मचारियों को मिलने वाले फायदों की ‘रियल-टाइम ट्रैकिंग’ की जा सकेगी। इसके अलावा, कामगार खुद एक मोबाइल ऐप के जरिए यह देख सकेंगे कि उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं मिल रही हैं और उनके क्या अधिकार हैं।

आखिर कौन होते हैं गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स?

बहुत से लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि इस कैटेगरी में कौन से लोग आते हैं। इसे आसान शब्दों में ऐसे समझें:

  • गिग वर्कर्स (Gig Workers): ये वे कर्मचारी होते हैं जो किसी कंपनी के साथ पारंपरिक सैलरी या पक्के एम्प्लॉई के रूप में नहीं जुड़ते, बल्कि फ्रीलांसर, इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर या पार्ट-टाइम प्रोजेक्ट के आधार पर काम करते हैं।

  • प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Platform Workers): ये वे लोग हैं जो किसी मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे ग्राहकों को सेवाएं देते हैं। उदाहरण के लिए, ओला-उबर के ड्राइवर, अर्बन कंपनी के जरिए घर आकर सर्विस देने वाले प्रोफेशनल या स्विगी-जोमैटो के डिलीवरी पार्टनर्स इसी श्रेणी में आते हैं।

दशक के अंत तक 2.5 करोड़ तक पहुंचेगी संख्या

भारत के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब नए श्रम कानूनों (New Labour Codes) के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का कानूनी अधिकार दिया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में भारत में लगभग 1 करोड़ लोग इस सेक्टर में काम कर रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार को देखते हुए सरकार का अनुमान है कि इस दशक के अंत तक देश में गिग वर्कर्स की संख्या बढ़कर 2.5 करोड़ के पार पहुंच सकती है। यही वजह है कि सरकार इनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इतनी तत्परता दिखा रही है।