Wednesday , September 2 2026

LPG Price Today: भारी बढ़ोतरी के बाद भी सरकार को हो रहा ₹700 का घाटा! देखिए दिल्ली से लेकर मुंबई तक के ताजा दाम

पश्चिमी एशिया (West Asia) में लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से जहां एक तरफ पेट्रोल, डीजल और सीएनजी (CNG) के दाम बढ़े हैं, वहीं अब घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर भी एक बड़ी जानकारी सामने आई है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर को बाजार दरों पर बेचने के बावजूद सरकार को अभी भी प्रति सिलेंडर करीब ₹700 का भारी घाटा (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब हाल ही में घरेलू सिलेंडर की कीमतों में ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर के दामों में करीब ₹1,700 तक की बड़ी बढ़ोतरी की जा चुकी है।

राज्यों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर

देशभर में एलपीजी की कीमतें एक समान नहीं हैं। स्थानीय टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन खर्च की वजह से अलग-अलग राज्यों में गैस के दामों में काफी अंतर देखने को मिलता है। फिलहाल देश के कुछ हिस्सों में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू सिलेंडर जहां ₹900 के आसपास मिल रहा है, वहीं कई राज्यों में इसकी कीमत ₹1,000 के आंकड़े को भी पार कर चुकी है।

आइए नीचे दी गई तालिका से समझते हैं कि देश के प्रमुख शहरों में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के आज के रेट्स क्या हैं:

आखिर कैसे तय होते हैं गैस सिलेंडर के दाम?

कई बार लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर हर महीने गैस सिलेंडर के दाम क्यों बदल जाते हैं और अलग-अलग शहरों में इसके रेट्स में अंतर क्यों होता है? इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण जिम्मेदार हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भरता: भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60% हिस्सा विदेशों से आयात (Import) करता है। यही वजह है कि जब भी वैश्विक बाजार में कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी आती है, तो भारत में भी सिलेंडर महंगे हो जाते हैं।

  • डॉलर बनाम रुपया एक्सचेंज रेट: विदेशी बाजारों से गैस की खरीद अमेरिकी डॉलर में की जाती है। यदि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता है, तो कंपनियों के लिए आयात की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा बोझ घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

  • स्थानीय वैट (VAT) और ट्रांसपोर्टेशन: हर राज्य सरकार ईंधन पर अपने हिसाब से लोकल वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगाती है। इसके अलावा, बोटलिंग प्लांट से लेकर आपके घर तक सिलेंडर पहुँचाने का डिस्ट्रीब्यूटर ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी हर शहर का अलग होता है। इसी वजह से दिल्ली और अमृतसर के दामों में अंतर दिखाई देता है।

 बाजार की नजरें कहाँ हैं?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समय कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में $95 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता पर टिकी हैं। अगर वहां हालात सुधरते हैं, तो आने वाले समय में आम जनता को घरेलू ईंधन की कीमतों से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।