Kerala Waqf Board: केरल वक्फ बोर्ड पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के उस फैसले को दी चुनौती जिसने रोक दिए थे सारे अधिकार

नई दिल्ली। केरल वक्फ बोर्ड ने केरल हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख किया है, जिसने बोर्ड की शक्तियों पर व्यावहारिक रूप से ब्रेक लगा दिया था। हाई कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम के तहत बोर्ड के गठन में हुए कथित वैधानिक उल्लंघनों और अनियमितताओं से जुड़े मुद्दे हल होने तक बोर्ड को कोई भी बड़ा नीतिगत या प्रशासनिक फैसला लेने से रोक दिया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे आगामी सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है।

सुप्रीम कोर्ट में वक्फ बोर्ड की दलील

आज शीर्ष अदालत में राज्य वक्फ बोर्ड के वकील ने याचिका का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बेंच को अवगत कराया कि हाई कोर्ट द्वारा कोई भी बड़ा या महत्वपूर्ण फैसला लेने पर लगाई गई रोक के कारण बोर्ड व्यावहारिक रूप से पूरी तरह निष्क्रिय और ठप हो गया है। दैनिक कामकाज प्रभावित होने की वजह से बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करने और हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई है।

जानिए क्या था केरल हाई कोर्ट का विवादित आदेश?

इससे पहले, केरल हाई कोर्ट ने बीती 15 जुलाई को एक अंतरिम निर्देश जारी कर राज्य वक्फ बोर्ड के हाथ बांध दिए थे। हाई कोर्ट ने पहली नजर में यह पाया था कि मौजूदा वक्फ (संशोधन) अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बोर्ड के गठन में स्पष्ट अनियमितताएं थीं। कानून के मुताबिक बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जाना अनिवार्य था, जिसका कथित रूप से उल्लंघन किया गया।

भाजपा नेता की याचिका पर हुआ था एक्शन

हाई कोर्ट का यह सख्त निर्देश भाजपा (BJP) नेता शॉन जॉर्ज द्वारा दायर याचिका सहित कई अन्य जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई के बाद आया था। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने न केवल नीतिगत फैसलों पर रोक लगाई थी, बल्कि बोर्ड को यह भी कड़ा निर्देश दिया था कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) या किसी भी तरह के बड़े वित्तीय खर्च से जुड़ा कोई भी निर्णय नहीं ले सकता है। अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।