
दलाल स्ट्रीट पर इन दिनों विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद और कोलकाता के रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े फंड मैनेजर्स तक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि पोर्टफोलियो को नुकसान से कैसे बचाया जाए। ऐसे नाजुक बाजार परिदृश्य में दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस जेपी मॉर्गन की एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट ने रिटेल ट्रेडर्स और वेल्थ इनवेस्टर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ब्रोकरेज फर्म ने प्रमुख न्यू-एज टेक और क्विक-कॉमर्स दिग्गज स्विगी लिमिटेड के शेयरों पर अपनी मजबूती से बुलिश राय जाहिर की है। फर्म का मानना है कि हालिया बाजार करेक्शन के बाद कई बेहतरीन फंडामेंटल वाली कंपनियों के वैल्यूएशन काफी आकर्षक स्तरों पर आ चुके हैं और स्विगी उनमें से एक सबसे दमदार विकल्प बनकर उभर रहा है।
स्विगी का शेयर हालिया दिनों में व्यापक बाजार दबाव और टेक स्टॉक्स में प्रॉफिट बुकिंग के चलते लगभग 255 रुपये के आसपास ट्रेड करता दिखाई दिया है। यह स्तर कंपनी के 52-हफ्तों के उच्चतम स्तर 460 रुपये से काफी नीचे है और यह अपने 52-वीक लो 235.85 रुपये के बेहद करीब संभलने की कोशिश कर रहा है। जेपी मॉर्गन ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में इस काउंटर पर ओवरवेट रेटिंग बरकरार रखी है और प्रति शेयर 360 रुपये का नया प्राइस टारगेट तय किया है। यदि मौजूदा मार्केट प्राइस से इस नए टारगेट प्राइस का हिसाब लगाया जाए, तो निवेशकों को सीधे तौर पर करीब 41.18 प्रतिशत तक के जबरदस्त मुनाफे की सीधी संभावना दिखाई देती है। ब्रोकरेज का मानना है कि स्टॉक में गिरावट का दौर अब थमने के कगार पर है और यहां से रिस्क-टू-रिवॉर्ड रेशियो पूरी तरह खरीदारों के पक्ष में झुक चुका है।
भारत के मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई में पिछले दो सालों के भीतर लोगों की खरीदारी की आदतें तेजी से बदली हैं। 10 से 15 मिनट के अंदर जरूरी सामानों की डिलीवरी करने वाले क्विक-कॉमर्स मॉडल ने रिटेल इंडस्ट्री का पूरा ढांचा हिलाकर रख दिया है। जेपी मॉर्गन का मुख्य थीसिस स्विगी के क्विक-कॉमर्स वर्टिकल इंस्टामार्ट के आक्रामक विस्तार पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने क्विक-कॉमर्स कारोबार को एडजस्टेड एबिटा ब्रेक-ईवन तक पहुंचाने के लिए वॉल्यूम और डेंसिटी बढ़ाने पर पूरा जोर लगा रही है। कंपनी का लक्ष्य अपने मौजूदा बिजनेस साइज को लगभग ढाई गुना तक बड़ा करना है, जिसके साथ करीब 4 प्रतिशत का पॉजिटिव कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन हासिल करने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। जैसे-जैसे डार्क स्टोर्स की क्षमता और ऑर्डर डेंसिटी बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस सेगमेंट का घाटा तेजी से सिमटेगा।
अक्सर टेक कंपनियों पर यह आरोप लगता है कि वे ग्रोथ के चक्कर में बेतहाशा कैश जलाती हैं, लेकिन स्विगी के मामले में उसका कोर फूड डिलीवरी सेगमेंट एक मजबूत ढाल की तरह काम कर रहा है। जेपी मॉर्गन के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि कंपनी का फूड डिलीवरी कारोबार आने वाले तिमाहियों में 18 से 20 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ता रहेगा। इस सेगमेंट में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 5 प्रतिशत के स्थिर स्तर पर बना हुआ है, जिससे कंपनी को नियमित और टिकाऊ कैश फ्लो प्राप्त हो रहा है। यही कैश फ्लो कंपनी को अपने क्विक-कॉमर्स और अन्य नए प्रयोगों में बिना किसी बाहरी कर्ज या भारी इक्विटी डाइल्यूशन के री-इन्वेस्ट करने की पूरी आजादी देता है। कोर बिजनेस का यह मजबूत आधार स्विगी को कई अन्य घाटे वाली लिस्टेड टेक कंपनियों की तुलना में फंडामेंटली ज्यादा सुरक्षित बनाता है।
स्विगी केवल देश के बड़े 8 या 10 महानगरों तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि लखनऊ, इंदौर, सूरत, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे तेजी से उभरते टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी कंपनी के ऑर्डर्स में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है। इन शहरों में मिडिल क्लास की बढ़ती क्रय शक्ति और स्मार्टफोन के विस्तार से ऑर्डर फ्रीक्वेंसी हर महीने बढ़ रही है। इसके साथ ही स्विगी अपने लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी रूट ऑप्टिमाइजेशन, डिमांड फोरकास्टिंग और हाइपरलोकल इन्वेंट्री मैनेजमेंट में आधुनिक जेनेरेटिव एआई और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का बेहद आक्रामक इस्तेमाल कर रही है। एआई आधारित प्रेडिक्टिव टूल्स की वजह से डिलीवरी का समय घट रहा है और राइडर्स की एफिशिएंसी बढ़ रही है, जिससे प्रति ऑर्डर डिलीवरी लागत में कमी आई है और कंपनी की ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी को सहारा मिल रहा है।
शेयर बाजार में जब भी कोई नया स्टॉक लिस्ट होता है, तो शुरुआती महीनों में उसमें उतार-चढ़ाव और लॉक-इन पीरियड खत्म होने से जुड़ी बिकवाली देखने को मिलती है। स्विगी के शेयर में भी हाल के हफ्तों में कुछ ऐसा ही दबाव दिखा, जिसने शेयर को डिस्काउंटेड वैल्यूएशन पर लाकर खड़ा कर दिया। जेपी मॉर्गन का विश्लेषण बताता है कि अपने सेक्टर की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की तुलना में स्विगी का वैल्यूएशन मल्टीपल अब काफी संतुलित और आकर्षक हो चुका है। तकनीकी चार्ट्स पर भी यह शेयर अपने ओवरसोल्ड जोन से बाहर निकलकर बेस बिल्डिंग फॉर्मेशन में कदम रख रहा है। लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले वैल्यू इनवेस्टर्स के लिए यह एक ऐसा मौका माना जा रहा है जहां सीमित डाउनसाइड रिस्क के साथ मध्यम से लंबी अवधि में मजबूत कैपिटल एप्रिसिएशन मिलने की ठोस उम्मीद बनती है।
भले ही जेपी मॉर्गन जैसी दिग्गज अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म ने स्विगी पर बेहद पॉजिटिव रुख अख्तियार किया हो, लेकिन निवेशकों को बाजार के अंतर्निहित जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्विक-कॉमर्स स्पेस में जोमैटो के ब्लिंकिट, जेप्टो और टाटा के बिगबास्केट जैसे प्लेयर्स के बीच बढ़ती गलाकाट प्रतिस्पर्धा भविष्य में मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डिलीवरी पार्टनर्स से जुड़े गिग वर्कर नियमों में संभावित बदलाव भी इन कंपनियों की ऑपरेशनल लागत को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए भारतीय इक्विटी बाजार में किसी भी स्टॉक में एकमुश्त भारी रकम लगाने के बजाय सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी या गिरावट में चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की रणनीति अपनाना हमेशा समझदारी भरा कदम माना जाता है। किसी भी ट्रेड में प्रवेश करने से पहले अपने सेबी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से राय जरूर लें।
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