ITR Filing 2026: जल्दबाजी में की गई ये 5 गलतियां सीधे घर भिजवाएंगी इनकम टैक्स का नोटिस, रहें सावधान

वित्तीय वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण कामों में से एक यानी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तारीख (डेडलाइन) बेहद नजदीक आ रही है। नियमानुसार सभी करदाताओं के लिए 31 जुलाई तक अपना आईटीआर दाखिल करना पूरी तरह अनिवार्य है। टैक्स और फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए आखिरी तारीख या अंतिम दिनों का इंतजार बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आखिरी समय में जल्दबाजी के चक्कर में रिटर्न फाइल करते समय गलतियां होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यदि आप गलत रिटर्न दाखिल करते हैं, अपनी आमदनी छिपाते हैं या किसी सोर्स से हुई कमाई की जानकारी फॉर्म में नहीं देते हैं, तो आपको बाद में भारी कानूनी व वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

अब इंसानी आंखें नहीं, बल्कि AI पकड़ेगा आपकी हर एक चोरी

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार आईटीआर फाइलिंग को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। इसका कड़क कारण यह है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब टैक्स रिटर्न की स्क्रूटनी (जांच) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक और कूटस्थ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। इस डिजिटल अपग्रेडेशन के बाद आपके रिटर्न में की गई छोटी से छोटी विसंगति या गलती भी तुरंत सॉफ्टवेयर की पकड़ में आ जाएगी। यदि एआई की जांच के दौरान आपके रिटर्न में कोई बड़ा झोल या गड़बड़ी मिलती है, तो विभाग बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे आपको नोटिस जनरेट कर देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, टैक्सपेयर्स द्वारा की जाने वाली 5 सामान्य गलतियां ऐसी हैं, जो सीधे इनकम टैक्स का नोटिस घर बुलाती हैं:

1. इनकम (कमाई) की गलत या अधूरी जानकारी देना

इनकम टैक्स फॉर्म सबमिट करने से पहले हर टैक्सपेयर को अपनी कुल सालाना कमाई का बिल्कुल सटीक कैलकुलेशन (गणना) कर लेना चाहिए। इसके लिए आपको अपने फॉर्म 16 (Form 16) और एआईएस (Annual Information Statement – AIS) जैसे महत्वपूर्ण सरकारी डाक्यूमेंट्स का मिलान अवश्य करना चाहिए।

  • अक्सर छूटने वाली इनकम: यदि आपको शेयर बाजार या प्रॉपर्टी से कोई कैपिटल गेंस (पूंजीगत लाभ) हुआ है, या आपके बैंक खातों में जमा राशि पर ब्याज (इंटरेस्ट) मिला है, तो उसे आईटीआर में दिखाना अनिवार्य है। यदि आपके द्वारा घोषित आय और विभाग के पास मौजूद डेटा मैच नहीं खाता है, तो नोटिस आना तय है।

2. टैक्स बचाने के चक्कर में गलत डिडक्शन क्लेम करना

इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम (Old Tax Regime) के तहत टैक्स का बोझ कम करने के लिए कई तरह के डिडक्शंस (छूट) की अनुमति मिलती है। कई बार टैक्सपेयर्स अपना टैक्स लायबिलिटी जीरो या कम करने के लिए फर्जी निवेश दिखाकर गलत डिडक्शंस क्लेम कर लेते हैं। एक्सपर्ट्स की सख्त हिदायत है कि आप केवल उसी छूट का दावा करें, जिसके आप वास्तव में हकदार हैं और जिसका पक्का डाक्यूमेंट्री सबूत (रसीद या सर्टिफिकेट) आपके पास मौजूद हो।

3. फर्जी रसीदें लगाकर HRA का गलत फायदा उठाना

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के जरिए नौकरीपेशा लोग अपना टैक्स काफी हद तक बचा लेते हैं। लेकिन इनकम टैक्स विभाग ने अब एचआरए क्लेम के नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। एचआरए का लाभ लेने के लिए आपको अपने मकान मालिक का पैन (PAN), उसका पूरा पता और बकायदा रेंट रिसीप्ट (किराए की पर्ची) देनी होती है। यदि कोई टैक्सपेयर टैक्स बचाने के लिए फर्जी रेंट एग्रीमेंट या नकली रसीदों का सहारा लेता है, तो एआई टूल्स तुरंत मकान मालिक के पैन डेटा से उसे क्रॉस-वेरिफाई कर लेंगे और गड़बड़ी मिलते ही सीधे पेनाल्टी का नोटिस आएगा।

4. टीडीएस (TDS) अमाउंट का मिसमैच होना

कई बार ऐसा होता है कि आपकी कंपनी या एंप्लॉयर आपकी सैलरी से टीडीएस (Tax Deducted at Source) तो काट लेता है, लेकिन उसे समय पर सरकारी खाते में क्रेडिट नहीं करता या गलत रिटर्न दाखिल कर देता है। ऐसी स्थिति में आपके फॉर्म 16 और टैक्स डिपार्टमेंट के पास मौजूद डेटा में टीडीएस मिसमैच दिखाई देने लगता है। इससे बचने के लिए रिटर्न भरने से पहले अपने फॉर्म 26AS और फॉर्म 16 में दर्ज टीडीएस राशि की बारीकी से जांच कर लें। यदि कोई विसंगति है, तो तुरंत अपने एंप्लॉयर से संपर्क करके उसे ठीक करवाएं।

5. हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन (बड़े लेन-देन) को छिपाना

यदि आपने संबंधित वित्तीय वर्ष के भीतर कोई भी बड़ा वित्तीय लेन-देन (High Value Transaction) किया है, तो उसकी कुंडली आईटीआर में खोलना बेहद जरूरी है। आयकर विभाग की इन तय सीमाओं को हमेशा याद रखें:

  • कैश डिपॉजिट: किसी एक वित्त वर्ष में बैंक खाते में 10 लाख रुपये या उससे अधिक का कैश जमा करना।

  • क्रेडिट कार्ड: क्रेडिट कार्ड के जरिए एक साल में 2 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी या भुगतान करना।

  • म्यूचुअल फंड/शेयर: म्यूचुअल फंड या इक्विटी मार्केट में 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा का निवेश करना।

इन बड़े लेन-देन की जानकारी देश के सभी बैंक और वित्तीय संस्थान सीधे टैक्स विभाग को भेजते हैं। इसलिए यदि आपने अपने आईटीआर में इन ट्रांजैक्शंस का ब्योरा नहीं दिया, तो इसे जानबूझकर जानकारी छिपाना माना जाएगा और विभाग तुरंत आपसे स्पष्टीकरण की मांग करते हुए नोटिस जारी कर देगा। सुखी और तनावमुक्त रहने का यही एकमात्र तरीका है कि समय रहते पूरी ईमानदारी के साथ अपना सटीक आईटीआर दाखिल करें।