
अगर आप हर साल नियमित रूप से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते हैं, तो 31 जुलाई 2026 का दिन आपके लिए बेहद निर्णायक है। केंद्र सरकार और आयकर विभाग की तय समयसीमा के अनुसार, गैर-ऑडिट श्रेणी में आने वाले सभी करदाताओं के लिए बिना किसी लेट फीस के आईटीआर जमा करने का आज आखिरी अवसर है। इस वर्ग में मुख्य रूप से नौकरीपेशा (सैलरीड क्लास), पेंशनभोगी, विद्यार्थी, फ्रीलांस काम करने वाले पेशेवर और छोटे कारोबारी शामिल होते हैं, जिनके खातों का सीए (CA) द्वारा ऑडिट कराना अनिवार्य नहीं होता।
आज रात 12 बजे तक यदि आप अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो कल से यानी 1 अगस्त से आपको अपने रिटर्न के साथ भारी पेनल्टी भरनी पड़ेगी। आयकर विभाग की वेबसाइट पर आखिरी समय में भारी ट्रैफिक के कारण पोर्टल धीमा होने की आशंका रहती है, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतिम क्षणों का इंतजार किए बिना अपना काम समय रहते पूरा कर लें।
आखिरी तारीख मिस हुई तो कितना ढीला करना पड़ेगा जेब? जानिए लेट फीस का गणित
आयकर अधिनियम के नियमों के मुताबिक, अगर कोई करदाता 31 जुलाई की तय समयसीमा तक अपना आईटीआर दाखिल करने में असमर्थ रहता है, तो उसे ‘बिलेटेड रिटर्न’ दाखिल करने का विकल्प मिलता है। हालांकि, यह सुविधा मुफ्त नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए आयकर धारा 234F के तहत भारी जुर्माना देना पड़ता है। पेनल्टी की यह राशि आपकी कुल वार्षिक आय के आधार पर तय की जाती है:
-
5 लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर: यदि आपकी कुल कर योग्य आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो आपको 1,000 रुपये की लेट फाइलिंग फीस का भुगतान करना होगा।
-
5 लाख रुपये से अधिक की सालाना कमाई पर: यदि आपकी सालाना आय 5 लाख रुपये की सीमा को पार कर जाती है, तो समयसीमा चूकने के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आपको पूरे 5,000 रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा।
टैक्स विशेषज्ञों और सीए का कहना है कि लेट फीस का इस बात से कोई संबंध नहीं है कि आप ITR-1 (सहज), ITR-2, या ITR-4 (सुगम) में से कौन सा फॉर्म भर रहे हैं। यह शुल्क पूरी तरह से करदाता की कुल वार्षिक आय पर ही आधारित होता है।
बेसिक छूट सीमा से कम आय वालों के लिए क्या हैं नियम?
कई बार करदाताओं के मन में यह सवाल उठता है कि यदि उनकी आय टैक्स छूट की बुनियादी सीमा (Basic Exemption Limit) से कम है, तो क्या उन्हें भी देर से रिटर्न दाखिल करने पर जुर्माना देना होगा? इस संबंध में विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि आपकी सालाना आय मूल कर-मुक्त सीमा से कम है, तो आमतौर पर धारा 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस लागू नहीं होती।
हालांकि, यदि आपके वेतन या अन्य स्रोतों से टैक्स (TDS) कटा हुआ है और आप उस पैसे का रिफंड पाना चाहते हैं, या फिर आपका कोई बकाया टैक्स निकल रहा है, तो देरी करने पर आपको बकाया टैक्स राशि पर मासिक ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है। इसके अलावा, देर से आईटीआर दाखिल करने का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि आयकर विभाग द्वारा आपके टैक्स रिफंड की प्रोसेसिंग में काफी लंबा समय लग जाता है, जिससे आपका पैसा अटक सकता है।
31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न का मौका, लेकिन खो देंगे ये बड़े फायदे
यदि आप आज किसी कारणवश 31 जुलाई की डेडलाइन चूक भी जाते हैं, तो बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। आयकर नियम आपको टैक्स असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए ‘बिलेटेड रिटर्न’ भरने की अनुमति देते हैं। आप 31 दिसंबर 2026 तक या फिर असेसमेंट पूरा होने से पहले कभी भी अपना रिटर्न जमा कर सकते हैं।
हालांकि, बिलेटेड रिटर्न भरने से न केवल आपको 1,000 या 5,000 रुपये की पेनल्टी देनी होती है, बल्कि आप कई महत्वपूर्ण आयकर लाभों से भी हाथ धो बैठते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आपको शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से कोई कैपिटल लॉस (घाटा) हुआ है, तो समय पर रिटर्न न भरने की स्थिति में आप उस नुकसान को अगले वर्षों के मुनाफे के साथ सेट-ऑफ (Carry Forward) नहीं कर पाएंगे।
आईटीआर भरने के बाद भी न करें यह लापरवाही: 60 दिनों का ई-वेरिफिकेशन नियम
आईटीआर फाइलिंग प्रक्रिया केवल ऑनलाइन फॉर्म सबमिट कर देने भर से पूरी नहीं हो जाती। रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ‘ई-वेरिफिकेशन’ (e-Verification) करना अनिवार्य होता है। आयकर विभाग के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, करदाताओं को आईटीआर सबमिट करने के 60 दिनों के भीतर उसे ई-वेरिफाई करना जरूरी है।
ई-वेरिफिकेशन करने के लिए आपके पास कई आसान डिजिटल विकल्प मौजूद हैं:
-
आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी (OTP) के जरिए।
-
अपने बैंक खाते या नेट बैंकिंग सेवा का उपयोग करके।
-
डीमैट खाते या एटीएम (ATM) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) जनरेट करके।
-
यदि डिजिटल माध्यम संभव न हो, तो आईटीआर-वी (ITR-V) की हस्ताक्षरित भौतिक कॉपी सीपीसी बैंगलोर (CPC Bengaluru) डाक द्वारा भेजकर।
यदि आप तय 60 दिनों की समयसीमा के भीतर अपना रिटर्न ई-वेरिफाई नहीं करते हैं, तो आपके द्वारा दाखिल किया गया आईटीआर पूरी तरह से अमान्य (Invalid) मान लिया जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह होगा कि आयकर विभाग की नजर में आपने कभी रिटर्न भरा ही नहीं था, और आप पर बिना रिटर्न भरे रहने के सभी दंडात्मक नियम लागू हो जाएंगे।
अंतिम समय में आईटीआर भरते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
31 जुलाई की इस भागदौड़ में किसी भी प्रकार की गलती से बचने के लिए करदाताओं को कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए:
-
AIS और TIS का मिलान करें: अपने फॉर्म 16 के साथ-साथ एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में दर्ज आय के आंकड़ों का सही से मिलान कर लें।
-
सही टैक्स रिजीम का चुनाव: अपनी बचत और कटौतियों (Deductions) के आधार पर ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) और न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में से अपने लिए सबसे लाभदायक विकल्प चुनें।
-
सटीक बैंक विवरण: रिफंड में देरी से बचने के लिए अपने एक्टिव बैंक अकाउंट का नंबर और आईएफएससी (IFSC) कोड बिल्कुल सही दर्ज करें और सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता वैलिडेट हो।
यदि आपने अभी तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो बिना समय गंवाए आज ही आधिकारिक e-filing पोर्टल पर जाकर अपनी प्रक्रिया पूरी करें और अनावश्यक वित्तीय जुर्माने से खुद को सुरक्षित रखें।
girls globe