इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कहा जाता है कि न कोई स्थाई दुश्मन होता है और न ही कोई स्थाई दोस्त, लेकिन क्या देश दशकों पुराने अहसानों का कर्ज चुकाते हैं? यह सवाल आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के साथ जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने अपने सैन्य विमानों को पाकिस्तान के एयरबेस पर छिपाया है। अगर इन दावों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह साल 1971 के उस घटनाक्रम की याद दिलाता है जब ईरान ने मुश्किल वक्त में पाकिस्तान की मदद की थी।
नूर खान एयरबेस पर सस्पेंस: पाकिस्तान की सफाई
अमेरिकी हमलों के डर से ईरानी विमानों के पाकिस्तान में शरण लेने की खबरों पर इस्लामाबाद ने सख्त रुख अपनाया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन दावों को ‘अविश्वसनीय’ करार देते हुए खारिज कर दिया है। अधिकारियों का तर्क है कि ‘नूर खान बेस’ रावलपिंडी जैसे घने शहर के बीचों-बीच स्थित है, जहाँ विमानों के इतने बड़े बेड़े को दुनिया की नजरों से छिपाकर रखना तकनीकी रूप से नामुमकिन है।
हालांकि, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि पाकिस्तान ईरान की मदद कर रहा है, तो अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे विवाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका पर फिर से विचार करना चाहिए।
1971 का वो ‘एहसान’: जब ईरान बना था पाकिस्तान का सुरक्षा कवच
इतिहास के पन्ने पलटें तो साल 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध याद आता है। उस समय भारतीय वायुसेना (IAF) ने पाकिस्तानी आसमान पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था और उनके एयरबेस पर भारी बमबारी कर रही थी।
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विमानों को पनाह: अपने लड़ाकू और नागरिक विमानों को नष्ट होने से बचाने के लिए पाकिस्तान ने ईरान से मदद मांगी। तत्कालीन शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने तुरंत अपने एयरबेस पाकिस्तान के लिए खोल दिए।
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हथियारों की सप्लाई: ईरान ने न केवल विमानों को छिपाया, बल्कि सैन्य हेलीकॉप्टर, गोला-बारूद और ईंधन भी मुहैया कराया।
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अमेरिकी कनेक्शन: उस समय अमेरिका सीधे मदद नहीं कर पा रहा था, इसलिए उसने ईरान के जरिए गुपचुप तरीके से पाकिस्तान तक सैन्य साजो-सामान पहुंचाया था।
बदले हुए समीकरण: चीन का बढ़ता प्रभाव
पिछले 50 सालों में कूटनीति के मायने पूरी तरह बदल चुके हैं। आज का समीकरण कुछ इस प्रकार है:
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चीन पर निर्भरता: साल 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान ने अपने 80% हथियार चीन से खरीदे हैं, जिससे वह बीजिंग के बेहद करीब आ गया है।
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ईरान-अमेरिका विवाद: ईरान अब अमेरिका का सबसे बड़ा विरोधी है, जबकि पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने पुराने संबंधों को सुधारने और चीन की दोस्ती निभाने के बीच झूल रहा है।
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अफगानिस्तान का रुख: ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को सुरक्षा के लिहाज से काबुल और हेरात (अफगानिस्तान) भी भेजा है, जो यह दर्शाता है कि वह अपने संसाधनों को चारों तरफ फैला रहा है।
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