
सरकारी गलियारों से लेकर बैंक की शाखाओं तक इन दिनों एक ही चर्चा गर्म है महंगाई भत्ता (DA)। हाल ही में केंद्र सरकार ने अपने 50 लाख से ज्यादा कर्मचारियों का डीए 58 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया, जिससे सरकारी खेमे में खुशी की लहर है। लेकिन जैसे ही बैंक कर्मचारियों के लिए 0.70% की मामूली बढ़ोतरी का ऐलान हुआ, सोशल मीडिया से लेकर यूनियन की बैठकों तक ‘भेदभाव’ के सवाल उठने लगे। पहली नजर में 2% बनाम 0.7% का यह अंतर बहुत बड़ा और पक्षपाती लग सकता है, लेकिन इसके पीछे का सच आंकड़ों की पेचीदा कैलकुलेशन में छिपा है।
एक ही इंडेक्स, फिर क्यों है आंकड़ों में इतना अंतर?
हैरानी की बात यह है कि बैंक कर्मचारी हों या केंद्रीय कर्मचारी, दोनों का महंगाई भत्ता एक ही आधार पर तय होता है ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स’ (CPI-IW)। यानी बाजार में बढ़ती कीमतों के जो आंकड़े श्रम मंत्रालय जारी करता है, वही दोनों के लिए बेस बनते हैं। असल खेल इस डेटा के इस्तेमाल करने के तरीके और समय (Timeframe) का है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जहां सरकारी कर्मचारियों के डीए की समीक्षा साल में दो बार (छह-छह महीने पर) होती है, वहीं बैंक कर्मचारियों का डीए हर तीन महीने में बदल जाता है।
तीन महीने बनाम छह महीने का गणित
मई से जुलाई 2026 की तिमाही के लिए बैंक कर्मचारियों का डीए 25% से बढ़कर 25.70% हुआ है। यह 0.70% की बढ़त केवल पिछली तिमाही यानी तीन महीने की महंगाई को दर्शाती है। वहीं, केंद्रीय कर्मचारियों को मिला 2% का इजाफा पिछले छह महीनों के औसत और लंबी अवधि के बेस पर आधारित है। इसे आसान शब्दों में ऐसे समझें कि बैंक कर्मचारियों को अपनी सैलरी में छोटी-छोटी किश्तों में जल्दी-जल्दी बढ़ोतरी मिलती रहती है, जबकि सरकारी कर्मचारियों को छह महीने के इंतजार के बाद एक बड़ा ‘जंप’ मिलता है।
नियमों और समझौतों का बड़ा असर
दोनों वर्गों के लिए वेतन और भत्तों के नियम बिल्कुल अलग हैं। सरकारी कर्मचारी जहां केंद्रीय वेतन आयोग (Pay Commission) के ढांचे में बंधे हैं, वहीं बैंक कर्मचारियों की सैलरी और भत्ते ‘इंडियन बैंक्स एसोसिएशन’ (IBA) और यूनियनों के बीच होने वाले ‘द्विपक्षीय समझौतों’ (Bipartite Settlements) पर निर्भर करते हैं। बैंकिंग सेक्टर में डीए को हर तीन महीने में बाजार की स्थितियों के हिसाब से ढालने की सुविधा है, ताकि कर्मचारियों को महंगाई की मार तुरंत महसूस न हो।
कौन सा सिस्टम है कर्मचारियों के लिए बेस्ट?
अब सवाल उठता है कि फायदा किसमें है? बैंक कर्मचारियों के सिस्टम का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट यह है कि उन्हें बढ़ती महंगाई का लाभ तुरंत मिलता है, उन्हें छह महीने तक बजट बिगड़ने का इंतजार नहीं करना पड़ता। दूसरी ओर, सरकारी कर्मचारियों को एक साथ बड़ी रकम मिलती है, जो भविष्य की बचत और एरियर के लिहाज से आकर्षक लगती है। अंततः, 0.70% और 2% का यह फासला किसी भेदभाव का नतीजा नहीं, बल्कि महंगाई को नापने के दो अलग-अलग पैमाने हैं।
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