Infertility Risk: भारतीय युवाओं में तेजी से क्यों बढ़ रहा है बांझपन का खतरा? इन 5 खराब आदतों को एक्सपर्ट ने बताया सबसे बड़ी वजह

लखनऊ। आज के आधुनिक दौर में जहां मेडिकल साइंस ने अपार तरक्की कर ली है, वहीं दूसरी ओर भारतीय युवाओं में एक बेहद गंभीर और साइलेंट हेल्थ क्राइसिस पैर पसार रहा है। यह संकट है—इनफर्टिलिटी (Infertility) यानी बांझपन का बढ़ता जोखिम। टीवी9 हिंदी की एक विशेष हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याएं रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स और आईवीएफ (IVF) स्पेशलिस्ट्स का स्पष्ट मानना है कि इस खतरे के पीछे कोई जेनेटिक या जन्मजात बीमारी नहीं, बल्कि युवाओं की रोजमर्रा की खराब लाइफस्टाइल (Bad Lifestyle Habits) सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। अनजाने में की जाने वाली कुछ सामान्य आदतें हमारे शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ रही हैं, जो अंततः माता-पिता बनने के सुख में एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ाने वाली 5 सबसे खराब आदतें:

  • 1. अत्यधिक मानसिक तनाव और एंग्जायटी (Chronic Stress): आज की कॉर्पोरेट लाइफ और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन न बना पाने के कारण युवा लगातार तनाव में जी रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब शरीर लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो ‘कोर्टिसोल’ (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन जैसे आवश्यक रीप्रोडक्टिव हार्मोन्स के प्राकृतिक स्राव को बुरी तरह प्रभावित करता है, जिससे फर्टिलिटी घटने लगती है।

  • 2. सिगरेट, शराब और नशीले पदार्थों का सेवन (Smoking & Alcohol): युवाओं में सोशल ड्रिंकिंग और स्मोकिंग का बढ़ता चलन प्रजनन अंगों के लिए जहर के समान साबित हो रहा है। तंबाकू में मौजूद निकोटीन और अन्य हानिकारक केमिकल्स पुरुषों में स्पर्म काउंट (Sperm Count) व उसकी गतिशीलता (Motility) को तेजी से घटाते हैं। वहीं, महिलाओं में यह अंडों की गुणवत्ता (Egg Quality) को खराब कर देता है, जिससे कंसीव करने में भारी कठिनाई होती है।

  • 3. प्रोसेस्ड फूड और अनहेल्दी डाइट (Junk Food & Obesitiy): जंक फूड, अत्यधिक ऑयली, डिब्बाबंद भोजन और मैदे से बनी चीजों का लगातार सेवन करने से शरीर में न्यूट्रिशन की कमी हो जाती है। इसके कारण मोटापा (Obesity) तेजी से बढ़ता है। महिलाओं में मोटापा सीधे तौर पर पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस (PCOS) जैसी बीमारियों को जन्म देता है, जो अनियमित पीरियड्स और इनफर्टिलिटी का सबसे मुख्य कारण हैं।

  • 4. देर रात तक जागना और अधूरी नींद (Poor Sleep Cycle): लैपटॉप, मोबाइल स्क्रीन और ओटीटी के चक्कर में रातभर जागना आज के युवाओं की पहचान बन चुका है। डॉक्टरों के अनुसार, जब हम रात में गहरी नींद में होते हैं, तो हमारा शरीर हार्मोन्स को रेगुलेट और टिश्यूज को रिपेयर करता है। स्लीप साइकिल बिगड़ने से शरीर का नेचुरल बॉडी क्लॉक (Circadian Rhythm) तबाह हो जाता है, जिसका सीधा असर फर्टिलिटी साइकिल्स पर पड़ता है।

  • 5. फिजिकल एक्टिविटी की कमी (Sedentary Lifestyle): ऑफिस में 8 से 10 घंटे लगातार बैठकर काम करना और दिनभर में कोई भी शारीरिक व्यायाम, योग या वॉक न करना भी एक बड़ी वजह है। निष्क्रिय जीवनशैली के कारण पेल्विक एरिया (प्रजनन अंगों के आसपास के हिस्से) में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पाता, जिससे पुरुषों में एग्रेसिव स्पर्म प्रोडक्शन और महिलाओं में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया बाधित होती है।

डॉक्टरों की सलाह: समय रहते लाइफस्टाइल में करें ये जरूरी सुधार

फर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि इस गंभीर खतरे से बचने का एकमात्र और सबसे सुलभ तरीका यह है कि युवा तुरंत अपनी आदतों में सुधार करें। अपनी दैनिक दिनचर्या में कम से कम 30 से 45 मिनट का व्यायाम या योग जरूर शामिल करें। घर का बना शुद्ध सात्विक, हरी पत्तेदार सब्जियों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें। चीनी और मैदे से पूरी तरह दूरी बना लें। यदि शादी के एक साल बाद तक प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में समस्या आ रही है, तो बिना किसी सामाजिक संकोच या शर्म के, पति-पत्नी दोनों को एक साथ किसी योग्य गायनेकोलॉजिस्ट या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलकर जरूरी मेडिकल असेसमेंट (जैसे सीमेन एनालिसिस और ओवेरियन रिजर्व टेस्ट) कराना चाहिए, क्योंकि इनफर्टिलिटी केवल महिला केंद्रित समस्या नहीं है।