
वैश्विक कूटनीति के मंच पर चीन और पाकिस्तान की चालबाजियां एक बार फिर बेनकाब हो गई हैं। बीजिंग में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई हाई-लेवल बैठक के बाद दोनों देशों ने एक साझा बयान (Joint Statement) जारी किया है। इस बयान में एक बार फिर भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देते हुए जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अवांछित टिप्पणी की गई है। भारत ने चीन की इस उकसावे वाली हरकत पर सख्त रुख अपनाते हुए दोनों पड़ोसी मुल्कों को अपनी हद में रहने की हिदायत दी है।
बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल से कश्मीर पर पुराना राग
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन ने हमेशा की तरह अपने सदाबहार दोस्त (All-Weather Friend) का साथ देते हुए कश्मीर मुद्दे को हवा देने की कोशिश की है। बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद जारी संयुक्त घोषणापत्र में दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) और सुरक्षा परिषद के दशकों पुराने प्रस्तावों का हवाला दिया। बयान में कश्मीर विवाद के तथाकथित शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की गई है, जो सीधे तौर पर भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी है।
CPEC के जरिए भारत को घेरने की बड़ी साजिश, सुरक्षा पर सीधा खतरा
इस साझा बयान में सिर्फ कश्मीर का ही जिक्र नहीं है, बल्कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर भी भारत को उकसाने की रणनीतिक कोशिश की गई है। गौरतलब है कि अरबों डॉलर की लागत से बन रहे CPEC का मुख्य मार्ग पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) यानी गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है, जो कि भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। भारत इस अवैध निर्माण का शुरू से विरोध करता आ रहा है। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट के तहत चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह (Gwadar Port) को विकसित कर रहा है, जिससे चीनी नौसेना को हिंद महासागर और अरब सागर में स्थायी एंट्री मिल जाएगी। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा और सीधा खतरा है।
जिनपिंग ने शहबाज को बताया ‘पुराना दोस्त’, दोस्ती को कहा अटूट
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शहबाज शरीफ के साथ बैठक के दौरान पाकिस्तान संग अपनी दोस्ती को ‘अटूट’ करार दिया। जिनपिंग ने शहबाज शरीफ को अपना ‘पुराना दोस्त’ बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने दशकों से विपरीत परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का समर्थन किया है। चीन ने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने और अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की पाकिस्तान की कोशिशों की भी सराहना की। वहीं, शहबाज शरीफ ने भी चीनी नेतृत्व का आभार जताते हुए इस दोस्ती को और आगे ले जाने की कसम खाई।
भारत का दो टूक जवाब: अनुच्छेद 370 के बाद अब चर्चा की कोई गुंजाइश नहीं
चीन और पाकिस्तान के इस नए पैंतरे पर भारतीय खुफिया और राजनयिक सूत्रों ने बेहद कड़ा और मुहतोड़ जवाब दिया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि चीन जानबूझकर वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर रहा है। एक वरिष्ठ भारतीय सूत्र ने दो टूक शब्दों में कहा, “जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अटूट हिस्से थे, हैं और हमेशा रहेंगे। 2019 के संवैधानिक बदलावों के बाद अब किसी भी बाहरी देश, समूह या तीसरे पक्ष के साथ इस मुद्दे पर किसी भी तरह की चर्चा या मध्यस्थता की कोई गुंजाइश ही नहीं बची है। चीन को भारत की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना होगा।”
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