
अमेरिका में बसने और वहां का प्रतिष्ठित ग्रीन कार्ड (Green Card) पाने का सपना देखने वाले लाखों विदेशी नागरिकों, विशेषकर भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों के लिए पिछले कुछ दिन भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता से भरे रहे हैं। इस चौतरफा चिंता की मुख्य वजह अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) द्वारा की गई एक नई और बेहद संवेदनशील घोषणा बनी। इस घोषणा में कुछ ऐसे कड़े संकेत दिए गए थे कि जो विदेशी नागरिक वर्तमान में किसी अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और ग्रीन कार्ड हासिल करना चाहते हैं, उन्हें अब अपने आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए वापस अपने देश लौटना होगा, जब तक कि कोई बेहद असाधारण परिस्थिति न हो। हालांकि, बाद में बढ़ते विवाद को देखकर ट्रंप प्रशासन की ओर से इस पर आधिकारिक सफाई पेश की गई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका की कानूनी आव्रजन प्रणाली (Legal Immigration System) को लेकर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर क्या है ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ (AOS) और क्यों खड़ा हुआ यह पूरा विवाद?
अब तक की स्थापित अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था के अनुसार, अमेरिका में वैध रूप से रह रहे कई विदेशी नागरिक—जैसे कि H-1B वीजा धारक पेशेवर, अंतरराष्ट्रीय छात्र (F-1 वीजा), अमेरिकी नागरिकों के जीवनसाथी, शरणार्थी और अन्य वैध गैर-अप्रवासी वीजा धारक—बिना अमेरिका छोड़े ही अपने मौजूदा अस्थायी वीजा को ग्रीन कार्ड में बदलने के लिए कानूनी आवेदन कर सकते थे। अमेरिकी आव्रजन की तकनीकी भाषा में इस पूरी इन-कंट्री प्रक्रिया को ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ (AOS) कहा जाता है।
लेकिन USCIS की हालिया घोषणा में इस्तेमाल की गई भाषा से ऐसा प्रतीत हुआ कि अब आव्रजन अधिकारियों को यह विशेष विवेकाधीन अधिकार दे दिया जाएगा कि वे कुछ खास आवेदकों को अमेरिका के भीतर रहते हुए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति न दें। अधिकारी ऐसे आवेदकों को अपने देश वापस जाकर वहां स्थित अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास (Consular Processing) के जरिए नए सिरे से आवेदन करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इसी संभावित बदलाव की आशंका ने भारतीय प्रवासियों के बीच भारी घबराहट पैदा कर दी थी।
आंकड़ों की जुबानी: ग्रीन कार्ड सिस्टम के लिए क्यों बेहद महत्वपूर्ण है AOS प्रक्रिया?
अमेरिकी सरकार द्वारा जारी किए गए पिछले वित्तीय वर्ष 2024 के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में कुल 13.56 लाख लोगों को ग्रीन कार्ड यानी स्थायी निवास दिया गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से लगभग 58 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका के भीतर ही रहते हुए इसी ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ (AOS) प्रक्रिया का लाभ उठाकर अपना ग्रीन कार्ड सुरक्षित किया था। आंकड़ों के लिहाज से करीब 7.82 लाख ग्रीन कार्ड सिर्फ इसी आंतरिक व्यवस्था के तहत जारी किए गए थे।
इमिग्रेशन कानून के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार बड़े पैमाने पर लोगों को अपने देश जाकर कांसुलर प्रोसेसिंग के जरिए आवेदन करने को कहती है, तो इससे बेहद गंभीर व्यावहारिक दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी, जिनमें शामिल हैं:
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ग्रीन कार्ड की पूरी प्रोसेसिंग में सालों की लंबी और थकाऊ देरी होना।
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विदेशी दूतावासों में वीजा अचानक अस्वीकार (Visa Rejection) होने का भारी खतरा बढ़ जाना।
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तकनीकी कारणों से दोबारा अमेरिका में प्रवेश करने पर सख्त प्रतिबंध (Entry Ban) का खतरा पैदा होना।
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अमेरिका में चलती हुई नौकरी खोने का डर और वहां रह रहे अपने परिवार से लंबे समय तक अलग होने की दर्दनाक नौबत आना।
चौतरफा घिरने के बाद ट्रंप प्रशासन की सफाई: क्या है गृह सुरक्षा विभाग का नया दावा?
इस नई घोषणा के बाद जब अमेरिका के भीतर और वैश्विक स्तर पर इमिग्रेशन वकीलों और टेक कंपनियों द्वारा इसकी तीखी आलोचना शुरू हुई, तो ट्रंप प्रशासन को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने आनन-फानन में इस पूरे मामले पर सफाई जारी करते हुए कहा कि यह कोई नया व्यापक नीतिगत बदलाव (Policy Change) नहीं है।
डीएचएस के अनुसार, USCIS के अधिकारियों के पास आवेदनों को स्वीकार या अस्वीकार करने का यह विवेकाधिकार (Discretionary Power) पहले से ही मौजूद था और प्रत्येक मामले का अंतिम फैसला आवेदक की व्यक्तिगत परिस्थितियों और रिकॉर्ड को देखकर ही किया जाएगा। हालांकि, शीर्ष आव्रजन विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन के इस स्पष्टीकरण के बाद भी जमीनी स्तर पर आवेदकों के बीच बना हुआ भ्रम और डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
सावधान! अब ग्रीन कार्ड इंटरव्यू में पूछे जा रहे हैं ये अजीबोगरीब नए सवाल
अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन (AILA) की एक ताजा रिपोर्ट ने इस प्रशासनिक कड़वाहट को पूरी तरह उजागर कर दिया है। आईला के अनुसार, जमीन पर कई USCIS अधिकारी अब ग्रीन कार्ड के इंटरव्यू के दौरान आवेदकों से सीधे तौर पर ऐसे तीखे और नए सवाल पूछ रहे हैं जो पहले कभी सामान्य मामलों में नहीं पूछे जाते थे। अब इंटरव्यू टेबल पर आवेदकों से पूछा जा रहा है:
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“आपने अमेरिका के भीतर रहते हुए ही एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस (AOS) की प्रक्रिया को क्यों चुना?”
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“आप अपने देश वापस जाकर वहां के अमेरिकी कांसुलर या दूतावास के जरिए इस कागजी प्रक्रिया को पूरा क्यों नहीं करना चाहते?”
रिपोर्ट के मुताबिक, इन कड़े सवालों के जवाब से संतुष्ट न होने पर कुछ मामलों में अधिकारियों ने आवेदकों के फैसले पूरी तरह रोक दिए हैं, कुछ से अतिरिक्त सबूत (RFE) मांगे हैं, तो कुछ के आवेदनों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि ग्रीन कार्ड की पूरी प्रक्रिया अब पहले की तुलना में बहुत अधिक ‘व्यक्तिपरक’ (Subjective) और संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत संतुष्टि पर निर्भर हो गई है।
अब इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर होगा सबसे ज्यादा जोर, इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स की बड़ी सलाह
मौजूदा चुनौतीपूर्ण हालातों को देखते हुए शीर्ष आव्रजन विशेषज्ञों (Immigration Experts) ने आवेदकों को अपने केस मजबूत करने की विशेष सलाह दी है। अब आवेदकों को कागजी तौर पर यह बहुत मजबूती से साबित करना होगा कि वे अमेरिकी समाज और वहां की अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘सकारात्मक और अनिवार्य योगदान’ दे रहे हैं। इसके लिए अब निम्नलिखित दस्तावेजों का महत्व पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है, जिन्हें आवेदन और इंटरव्यू के समय साथ रखना बेहद जरूरी माना जा रहा है:
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टैक्स रिकॉर्ड: पिछले कुछ वर्षों के पूरी तरह से क्लियर और वैध अमेरिकी टैक्स रिटर्न के कागजात।
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स्थायी रोजगार का प्रमाण: अमेरिका में आपकी नौकरी की निरंतरता और उसके बने रहने का पुख्ता कानूनी सबूत।
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नियोक्ता का समर्थन पत्र: आपकी कंपनी या एम्प्लॉयर द्वारा जारी किया गया विशेष सपोर्ट लेटर।
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आर्थिक और सामुदायिक योगदान: अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आपके वित्तीय निवेश, कर योगदान और सामाजिक जुड़ाव का विवरण।
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पारिवारिक और स्थानीय संबंध: अमेरिका में आपके मजबूत पारिवारिक संबंधों और समाज में अच्छे आचरण का प्रामाणिक दस्तावेज।
जानिए इस नए कड़े रुख की सबसे ज्यादा गाज किस पर गिरने वाली है?
आव्रजन मामलों के विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के इस कड़े और बदले हुए प्रशासनिक रुख का सबसे ज्यादा और सीधा असर मुख्य रूप से ‘परिवार आधारित’ (Family-Based) ग्रीन कार्ड आवेदकों पर पड़ने की पूरी आशंका है। विशेष रूप से ऐसे विदेशी नागरिक, जो शुरुआत में महज टूरिस्ट वीजा (B1/B2) या फिर छात्र वीजा (F-1) पर अमेरिका की धरती पर आए थे और बाद में उन्होंने किसी अमेरिकी नागरिक से कानूनी विवाह कर लिया और अब उसी मैरिज के आधार पर अमेरिका के भीतर रहकर ग्रीन कार्ड (Adjustment of Status) के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें अब आव्रजन अधिकारियों के कड़े इम्तिहान, गहन जांच-पड़ताल और लंबी पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है।
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