IMD Weather Live: देश के 18 राज्यों में 85 KM की रफ्तार से आंधी और भारी बारिश का अलर्ट; पहाड़ों पर बढ़ा भूस्खलन का खतरा

देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून ($South-West\ Monsoon$) अब पूरी तरह आक्रामक और सक्रिय हो चुका है, जिसके कारण कई राज्यों में तबाही और आफत का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज (10 जुलाई 2026) के लिए दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश (UP) सहित देश के 18 राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी (रेड और ऑरेंज अलर्ट) जारी की है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान कुछ प्रभावित स्थानों पर हवा की रफ्तार 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे के विनाशकारी स्तर तक पहुंच सकती है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और आईएमडी ने आम जनता से गैर-जरूरी और अनावश्यक यात्राओं से पूरी तरह बचने तथा मौसम से जुड़ी आधिकारिक गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने की भावुक अपील की है।

अगले 48 घंटे उत्तर भारत के लिए भारी; जलभराव और पेड़ गिरने की आशंका

मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी हिस्सों में अगले 48 घंटे के दौरान मानसूनी बारिश का दौर और ज्यादा हिंसक व तेज हो सकता है।

  • प्रभावित क्षेत्र: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में बिजली कड़कने के साथ मूसलाधार बारिश और अंधड़ चलने की संभावना है।

  • शहरी इलाकों में आफत: तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर बड़े-बड़े पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इसके साथ ही प्रमुख शहरों में भारी जलभराव (Waterlogging) के कारण यातायात (Traffic) पूरी तरह बाधित हो सकता है।

इन 18 राज्यों में जारी हुआ भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

आईएमडी ने जिन 18 राज्यों को विशेष निगरानी और सतर्कता सूची में रखा है, वे निम्नलिखित हैं:

ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली का कहर: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, बंगाल) के कई राज्यों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है। खराब मौसम के दौरान लोगों को खुले मैदानों, जलस्रोतों, ऊंचे पेड़ों और ट्रांसफार्मर से दूर रहने को कहा गया है। इसके अलावा कुछ राज्यों में बड़े आकार के ओले गिरने की भी आशंका जताई गई है।

पर्वतीय राज्यों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ और मछुआरों के लिए सख्त मनाही

  • ताश के पत्तों की तरह ढह रहे पहाड़: हिमालयी राज्यों (विशेषकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide), चट्टानें गिरने और नदियों-नालों के जलस्तर में अचानक अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में घूमने गए पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को पहाड़ों की तरफ न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

  • समुद्र में जाने पर पाबंदी: तटीय क्षेत्रों और समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों के साथ-साथ मछुआरों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। खराब मौसम और समुद्र में उठने वाली ऊंची तूफानी लहरों को देखते हुए मछुआरों को अगले आदेश तक गहरे समुद्र में नहीं जाने की हिदायत दी गई है।

क्यों अचानक इतना आक्रामक हुआ मानसून? समझिए तकनीकी कारण

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान में उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के वायुमंडल के ऊपर एक बेहद मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बना हुआ है। इसके साथ ही, मानसून की मुख्य ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इन दोनों शक्तिशाली मौसम प्रणालियों की जुगलबंदी के कारण ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी भारत के मैदानी भागों में पहुंच रही है, जो इस महा-बारिश और तेज चक्रवाती हवाओं की मुख्य वजह है।

आईएमडी की राज्यवार जिला स्तर पर विशेष नजर

10 जुलाई को दिल्ली की सभी सीमाओं और उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों (विशेषकर पश्चिमी और मध्य यूपी) में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है।