
मानसून की विदाई से पहले उत्तर और मध्य भारत के मौसम में बड़ा और खतरनाक उलटफेर देखने को मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा सात दिवसीय राष्ट्रीय बुलेटिन के अनुसार, 7 सितंबर से 13 सितंबर 2026 के दौरान देश के कई राज्यों में मानसूनी बादल बेहद आक्रामक रूप में बरसने वाले हैं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उससे सटे इलाकों में बना निम्न दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) अब राज्य के मध्य भागों पर केंद्रित हो गया है। इस मौसमी तंत्र के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी से आ रही तीव्र नम पूर्वी हवाएं और मानसूनी ट्रफ का सक्रिय होना पूरे उत्तर और पूर्वी भारत में बादलों की भारी घेराबंदी कर रहा है।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सप्ताह सामान्य से कहीं अधिक भीगा और संवेदनशील रहने वाला है। विशेष रूप से 7 से 9 सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कई जनपदों में अत्यधिक भारी वर्षा (Extremely Heavy Rainfall) और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। वहीं, उत्तर ओडिशा और झारखंड के रास्ते पश्चिम बंगाल की ओर अगले 48 घंटों में एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र भी तेजी से आकार ले रहा है, जिससे पूर्वी राज्यों में जलभराव, नदियों के उफान और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी परिस्थितियां पैदा होने का जोखिम बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश पर केंद्रित लो-प्रेशर सिस्टम का सबसे व्यापक प्रभाव इसी राज्य के जनपदों पर देखा जा रहा है। मौसम केंद्र लखनऊ के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 7 और 8 सितंबर को पूरे प्रदेश में बादलों की सघन मौजूदगी के साथ व्यापक स्तर पर वर्षा का दौर चलेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों—सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत और बदायूं में जहां 7 सितंबर को गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल में 8 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बरकरार है।
गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, आजमगढ़, बलिया, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर जैसे जनपदों में 8 और 9 सितंबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और तेज वज्रपात (Lightning Strike) का खतरा बना रहेगा। राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, अयोध्या और सुल्तानपुर में भी सप्ताह के मध्य तक रुक-रुक कर बौछारें पड़ने और तापमान में गिरावट आने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में काम करते समय खुले स्थानों या बड़े पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें, क्योंकि बिजली गिरने से जानमाल की क्षति का जोखिम बढ़ जाता है।
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के लिए आने वाला पूरा हफ्ता मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड में 7 सितंबर को मूसलाधार बारिश के बाद 10 से 13 सितंबर के बीच भारी से बहुत भारी वर्षा का एक और तीव्र दौर सक्रिय होने जा रहा है। देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी और बागेश्वर जनपदों में गर्जना और आकाशीय बिजली के साथ तेज बारिश की चेतावनी दी गई है।
लगातार हो रही बारिश के चलते पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी धंसने, चट्टानें खिसकने और प्रमुख मार्गों पर बोल्डर गिरने (Landslide) की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऋषिकेश-बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले चारधाम तीर्थयात्रियों को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा जारी स्थानीय एडवाइजरी का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। नदी-नालों और संवेदनशील घाटियों के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों को भी संभावित फ्लैश फ्लड को देखते हुए सुरक्षित पक्के स्थानों पर रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पूर्वी भारत के मैदानी भागों में बिहार मानसूनी बारिश का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। आईएमडी के सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, बिहार में 7 से 9 सितंबर के दौरान व्यापक स्तर पर भारी बारिश दर्ज की जाएगी, जबकि 8 से 10 सितंबर के बीच राज्य के कुछ अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और सुपौल जैसे सीमावर्ती जिलों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट है।
नेपाल के तराई इलाकों और उत्तरी बिहार में एक साथ हो रही बारिश के कारण कोसी, बागमती, कमला बलान और गंडक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है। दूसरी तरफ, झारखंड में 8 से 11 सितंबर के दौरान मध्यम से भारी वर्षा, बादलों की तेज गर्जना और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है। रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और चाईबासा में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
मध्य भारत के राज्यों में मानसूनी परिसंचरण की सक्रियता पूरे सप्ताह बरकरार रहने वाली है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 7 सितंबर को बारिश के बाद पूर्वी मध्य प्रदेश—जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल, दमोह, सतना और छिंदवाड़ा में 7, 8, 11 और 12 सितंबर को भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में 8 से 12 सितंबर तक बादलों का डेरा रहेगा, जहां कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश और बिजली गिरने का अनुमान है। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग और बस्तर संभागों में स्थानीय नदियों और बांधों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि अचानक जलभराव की स्थिति से बचा जा सके।
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मानसूनी सिस्टम पूरे सात दिनों तक पूरी ताकत से सक्रिय रहेगा। असम और मेघालय में 7 से 13 सितंबर तक लगातार भारी बारिश का पूर्वानुमान है। अरुणाचल प्रदेश में 8-9 सितंबर तथा 11 से 13 सितंबर के बीच मूसलाधार वर्षा हो सकती है, जबकि नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी सप्ताहभर भारी बारिश के स्पेल जारी रहेंगे।
पश्चिमी तट की बात करें तो कोंकण और गोवा में 13 सितंबर तक व्यापक वर्षा जारी रहेगी। दक्षिण भारत में केरल और माहे में 10 से 12 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है, जबकि तमिलनाडु और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में 7 सितंबर की बारिश के बाद सप्ताह के बाकी दिनों में बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना है, जहां किसी बड़े अलर्ट की घोषणा नहीं की गई है।
7 से 13 सितंबर के बीच देश के बड़े हिस्से में सक्रिय इस मौसमी तंत्र को देखते हुए आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने नागरिकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण जीवनरक्षक सावधानियां जारी की हैं:
जब भी आसमान में बिजली कड़के या तेज आंधी चले, तो किसी भी खुले मैदान, खेत, बिजली के खंभे, ट्रांसफॉर्मर या ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। घर के भीतर टीवी, कंप्यूटर और फ्रिज जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के स्विच बंद रखें।
सड़क यात्रा करते समय भारी जलभराव वाले अंडरपास और जलमग्न पुलियों से वाहन निकालने का प्रयास न करें। पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने से पहले संबंधित राज्य पुलिस और आपदा नियंत्रण कक्ष से मार्गों की ताजा स्थिति जान लें और गैर-जरूरी यात्राओं को मौसम सामान्य होने तक टालें।
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