
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के बड़े हिस्से के लिए अगले 24 से 48 घंटों का गंभीर मौसम बुलेटिन जारी किया है। सक्रिय मानसून ट्रफ और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure Area) के चलते देश के 18 राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश (Heavy to Extremely Heavy Rainfall) की प्रबल आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए स्थानीय प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मौसमी तंत्र का सबसे व्यापक असर उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों, गंगा के मैदानी इलाकों, मध्य भारत तथा पश्चिमी तटवर्ती क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। जिन 18 प्रमुख राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट प्रभावी किया गया है, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, महाराष्ट्र (कोंकण क्षेत्र), गुजरात और तटीय कर्नाटक शामिल हैं। इन क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी दी गई है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण हालात अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार तेज बारिश से संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) और चट्टानें खिसकने (Mudslides) की घटनाएं बढ़ सकती हैं। नदी-नालों के जलस्तर में अचानक उछाल आने से फ्लैश फ्लड और बादल फटने जैसी मौसमी आपदाओं का खतरा गहरा गया है। स्थानीय प्रशासन ने चारधाम यात्रा मार्ग और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर जाने वाले यात्रियों को अनावश्यक यात्रा से बचने और केवल आधिकारिक मौसम सलाह का पालन करने की सख्त हिदायत दी है।
दूसरी ओर, मैदानी और महानगरीय क्षेत्रों जैसे दिल्ली, लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, पटना, भोपाल और मुंबई में मूसलाधार बारिश के चलते निचले इलाकों में भारी जलभराव (Urban Flooding) और यातायात बाधित होने की पूरी संभावना है। सीवरेज सिस्टम पर दबाव बढ़ने और दृश्यता (Visibility) कम होने से सड़क व रेल यातायात पर सीधा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने शहरी नागरिकों को जलभराव वाले रास्तों, खुले नालों और पुराने जर्जर ढांचों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
राष्ट्रीय स्तर पर मौसम के इस आक्रामक मिजाज के पीछे कई शक्तिशाली मौसमी प्रणालियों का एक साथ सक्रिय होना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में मानसून ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर सक्रिय रूप से गुजर रही है। इसके साथ ही उत्तरी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे तटीय इलाकों के ऊपर एक मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) विकसित हो चुका है, जिसने निचले वायुमंडल में भारी नमी को आकर्षित किया है।
इसके अतिरिक्त, उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और पूरब से आ रही नम मानसूनी हवाओं के बीच तीव्र टकराव (Confluence) हो रहा है। इस टकराव के कारण वायुमंडलीय अस्थिरता चरम पर पहुंच गई है, जिससे भारी कपासी-वर्षी बादलों (Cumulonimbus Clouds) का सघन निर्माण हो रहा है। यही कारण है कि सीमित समय के भीतर बहुत तेज और मूसलाधार वर्षा दर्ज की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों संभागों में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, बरेली और मेरठ समेत कई जिलों में बादलों की जोरदार गड़गड़ाहट के साथ रुक-रुक कर भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने से उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए किसानों को खुले खेतों में जाने से बचने का परामर्श दिया गया है।
बिहार के उत्तरी और मध्य जिलों जैसे पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और पूर्णिया में अगले 24 घंटों के दौरान मध्यम से भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही वर्षा के चलते गंडक, कोसी और बागमती जैसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे और दिन के अलग-अलग समय पर तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश होने के पूरे आसार हैं। अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमट सकता है, जिससे मौसम सुहावना रहेगा, हालांकि पीक ट्रैफिक घंटों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
इस भारी बारिश का सीधा प्रभाव कृषि कार्यों पर भी पड़ने वाला है। खरीफ फसलों, विशेषकर धान की रोपाई और वृद्धि के लिए यह वर्षा कई क्षेत्रों में वरदान साबित हो रही है, लेकिन जिन खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है, वहां दलहन, तिलहन और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में अतिरिक्त पानी को जमा न होने दें और कीटनाशक या रासायनिक खादों का छिड़काव मौसम साफ होने तक टाल दें।
आम जनता के लिए मौसम विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने निम्नलिखित सुरक्षा उपाय जारी किए हैं:
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आंधी-तूफान या बिजली कड़कने के दौरान कभी भी ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों, टिन शेड या धातु के ढांचों के नीचे शरण न लें।
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घर के भीतर रहते समय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें और लैंडलाइन फोन व पानी के नलों के सीधे संपर्क से बचें।
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यदि आप वाहन चला रहे हैं, तो भारी बारिश के दौरान वाहन को किसी सुरक्षित और खुले स्थान पर रोक लें; जलमग्न अंडरपास में गाड़ी ले जाने का जोखिम बिल्कुल न लें।
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मवेशियों को खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे बांधने के बजाय पक्के और सुरक्षित आश्रयों में रखें।
मौसम विभाग लगातार सैटेलाइट और रडार इमेजरी के जरिए इस वेदर सिस्टम की पल-पल की निगरानी कर रहा है और जिला स्तर पर नाउकास्ट (Nowcast) अलर्ट जारी किए जा रहे हैं। नागरिकों से अनुरोध है कि वे किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर ही भरोसा करें।
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