मेरठ में लापरवाह अफसरों पर हंटर: 9 अधिकारियों की सैलरी कटी, 155 को नोटिस

मेरठ/पीलीभीत। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। मेरठ के जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने जनशिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। डीएम ने सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि जनता की समस्याओं की अनदेखी करने वाले अफसरों की कुर्सी अब सुरक्षित नहीं है।

मेरठ: डीएम की समीक्षा बैठक में मची खलबली

सोमवार को मेरठ के विकास भवन सभागार में आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा के दौरान डीएम डॉ. वीके सिंह का पारा तब चढ़ गया, जब उन्होंने देखा कि कई नोडल अधिकारी और अभियंता बैठक से गायब थे।

  • सैलरी पर कैंची: डीएम ने बैठक में अनुपस्थित पाए गए 9 विभागीय अधिकारियों और अभियंताओं का तत्काल प्रभाव से एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया है।

  • 100% असंतुष्टि पर नोटिस: समीक्षा में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 15 अधिकारियों के खिलाफ शिकायतकर्ताओं ने 100% असंतुष्टि जताई है। यानी इन अधिकारियों ने शिकायतों का निस्तारण तो किया, लेकिन जनता उनके काम से रत्ती भर भी खुश नहीं थी। डीएम ने इन सभी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है।

इन अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस

मेरठ डीएम ने जिन विभागों और अधिकारियों की क्लास लगाई है, उनमें जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, मेरठ, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी, और मवाना, दौराला, हस्तिनापुर व रजपुरा के खंड विकास अधिकारी (BDO) शामिल हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चकबंदी विभाग के उप संचालक को भी स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

डीएम की सख्त हिदायत: मौके पर जाकर करें सत्यापन

डीएम ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर न हो। उन्होंने कहा:”प्रत्येक शिकायतकर्ता से व्यक्तिगत रूप से बात की जाए और अधिकारी खुद मौके पर जाकर सत्यापन करें। निस्तारण में पारदर्शिता और गुणवत्ता सबसे जरूरी है।”

इनका कटा एक दिन का वेतन

वेतन कटौती की मार झेलने वाले अधिकारियों में यांत्रिकी विभाग के अधिशासी अभियंता, होमगार्ड के जिला कमांडेंट, रोडवेज के एआरएम, जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता और एआरटीओ (प्रशासन) शामिल हैं।

पीलीभीत: यूरिया की ‘अंधाधुंध’ बिक्री पर कृषि विभाग का एक्शन

उधर पीलीभीत में भी प्रशासन एक्शन मोड में है। जिले में यूरिया की खपत में पिछले साल के मुकाबले 35 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे विभाग के कान खड़े हो गए हैं।

  • 35 विक्रेताओं को नोटिस: जिला कृषि अधिकारी ने 9 सहकारी समितियों (M-PAX) समेत 35 उर्वरक विक्रेताओं को नोटिस थमाया है।

  • संदेह के घेरे में बिक्री: आईएफएमएस (IFMS) पोर्टल की मॉनिटरिंग में पाया गया कि कई केंद्रों पर पीओएस मशीन के जरिए जो बिक्री दिखाई गई है, वह पिछले साल के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। विभाग को आशंका है कि खाद की कालाबाजारी या अनावश्यक स्टॉक खपाने का खेल चल रहा है। नोटिस पाने वालों में एम-पैक्स माधोटांडा, ललौरीखेड़ा, बीसलपुर और कई निजी खाद भंडार शामिल हैं।