
असम से एक ऐसी थर्रा देने वाली खबर सामने आई है जिसने दिल्ली-एनसीआर के कुख्यात खोड़ा कांड की यादें ताजा कर दी हैं। अपनी सगी बहन की आबरू और इज्जत की रक्षा करने के लिए बदमाशों से भिड़ जाने वाले एक जांबाज भाई मधुर्ज्य की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस दिल दहला देने वाली वारदात के बाद से ही पूरे इलाके में भारी जनाक्रोश देखा जा रहा था और लोग इंसाफ की गुहार लगा रहे थे। अब इस मामले में असम पुलिस ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रोज अली को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। बहन की रक्षा करते हुए मधुर्ज्य ने गंवाई थी अपनी जान यह खौफनाक वारदात उस वक्त शुरू हुई जब आरोपी रोज अली और उसके साथियों ने मधुर्ज्य की बहन के साथ बदसलूकी और छेड़छाड़ करने की कोशिश की। अपनी बहन को खतरे में देख भाई मधुर्ज्य बिना अपनी जान की परवाह किए दरिंदों के सामने ढाल बनकर खड़ा हो गया। उसने पूरी ताकत से बदमाशों का विरोध किया और अपनी बहन को उनके चंगुल से सुरक्षित बचा लिया, लेकिन इस बहादुरी की उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी। गुस्से से बौखलाए मुख्य आरोपी रोज अली और उसके गुर्गों ने मधुर्ज्य पर जानलेवा हमला कर दिया और बेहद बेरहमी से उसकी जान ले ली। इस घटना ने हर किसी की रूह कंपा दी थी। पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश और ऐसे हुआ एनकाउंटर मधुर्ज्य की हत्या के बाद असम पुलिस मुख्य आरोपी रोज अली की सरगर्मी से तलाश कर रही थी। पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे दबोच तो लिया, लेकिन कानून के शिकंजे से बचने के लिए आरोपी ने एक खतरनाक चाल चली। सूत्रों के मुताबिक, जांच और सीन रिक्रिएशन के दौरान आरोपी रोज अली ने पुलिस की कस्टडी से भागने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों पर ही हमला बोल दिया। आत्मरक्षक कार्रवाई और आरोपी को दोबारा भागने से रोकने के लिए पुलिस को मजबूरन गोलियां चलानी पड़ीं। इस मुठभेड़ में गोली लगने से मुख्य आरोपी रोज अली मौके पर ही ढेर हो गया। खोड़ा कांड से क्यों की जा रही है इस वारदात की तुलना असम की इस घटना की तुलना लोग गाजियाबाद के चर्चित खोड़ा कांड से कर रहे हैं, जहां इसी तरह एक भाई ने अपनी बहन की अस्मत बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी। दोनों ही मामलों में कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। हालांकि, असम पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी रोज अली का एनकाउंटर किए जाने के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। इस मामले ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि अपराधियों के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है और कानून को हाथ में लेने वालों का अंजाम बेहद भयानक होगा।
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