Hariyali Teej 2026: मनचाहे वर और अखंड सौभाग्य का महापर्व! कुंवारी कन्याएं और सुहागिन महिलाएं इस दिन रखेंगी हरियाली तीज का व्रत, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

विशेष आध्यात्मिक रिपोर्टर, नई दिल्ली/वाराणसी: सनातन धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भक्ति, आनंद और उत्सवों का पवित्र काल माना जाता है। सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला ‘हरियाली तीज’ (Hariyali Teej) का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला यह व्रत न केवल सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद लाता है, बल्कि कुंवारी कन्याओं के लिए भी यह बेहद फलदायी माना गया है। मान्यता है कि यदि अविवाहित कन्याएं पूरे विधि-विधान और निष्ठा के साथ हरियाली तीज का व्रत और शिव-गौरी का पूजन करती हैं, तो उन्हें मनचाहा, योग्य और संस्कारी जीवनसाथी प्राप्त होता है।

प्रकृति के सौंदर्य, झूलों के आनंद और सोलह शृंगार के इस अनूठे उत्सव को लेकर इस वर्ष भी महिलाओं और युवतियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में हरियाली तीज किस तारीख को मनाई जाएगी, इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, कुंवारी कन्याओं के लिए इस व्रत के क्या विशेष नियम हैं और पूजन की प्रामाणिक विधि क्या है।

हरियाली तीज 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Hariyali Teej 2026 Date & Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाई जाती है। वर्ष 2026 में हरियाली तीज की सही तिथि और पूजा के शुभ मुहूर्त की गणना इस प्रकार है:

  • हरियाली तीज की तारीख: 15 अगस्त 2026 (शनिवार)

  • तृतीया तिथि का प्रारंभ: 14 अगस्त 2026 को रात 10:24 बजे से

  • तृतीया तिथि का समापन: 15 अगस्त 2026 को रात 12:18 बजे तक

  • उदयातिथि के अनुसार व्रत: उदयातिथि की मान्यता के अनुसार हरियाली तीज का मुख्य व्रत एवं पूजन 15 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

पूजा के विशेष शुभ मुहूर्त (Choghadiya & Muhurat):

  • प्रातःकाल पूजा का शुभ मुहूर्त (शुभ चौघड़िया): सुबह 07:30 बजे से सुबह 09:08 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त (अत्यंत फलदायी): दोपहर 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक

  • सायंकाल/प्रदोष काल पूजा मुहूर्त (सर्वोत्तम): शाम 06:45 बजे से रात 08:52 बजे तक

विशेष योग: हरियाली तीज पर प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) में भगवान शिव और माता पार्वती की बालू (रेत) या मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करना शास्त्रों में सर्वाधिक उत्तम माना गया है।

मनचाहा वर पाने के लिए कुंवारी कन्याएं क्यों रखें हरियाली तीज का व्रत?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 107 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। इसके बाद अपने 108वें जन्म में, सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को ही भगवान शिव ने माता पार्वती की निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।

इसी वजह से यह तिथि ‘शिव-गौरी पुनर्मिलन दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।

कुंवारी कन्याओं के लिए इस व्रत का महत्व:

  • योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति: मान्यता है कि जो कुंवारी कन्याएं इस दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखकर मां पार्वती और भगवान भोलेनाथ का पूजन करती हैं, उनके विवाह में आ रही सभी बाधाएं (जैसे देरी, कुंडली दोष आदि) दूर हो जाती हैं।

  • मनचाहे वर का आशीर्वाद: जिस प्रकार माता पार्वती की मनोकामना पूरी हुई थी, उसी प्रकार कुंवारी कन्याओं को उनकी पसंद का गुणी, संस्कारी और स्नेही वर प्राप्त होता है।

  • ग्रह दोषों से शांति: विवाह योग्य कन्याओं के लिए इस दिन व्रत रखने और ‘उमा-महेश्वर’ मंत्र का जाप करने से बृहस्पति (गुरु) और शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जो वैवाहिक सुख के कारक माने जाते हैं।

हरियाली तीज पूजा विधि: कुंवारी कन्याएं और महिलाएं ऐसे करें पूजन

हरियाली तीज की पूजा विधि बेहद सरल और भावपूर्ण होती है। इस दिन घर की सफाई करके और स्वयं शुद्ध होकर पूरे नियमबद्ध तरीके से पूजन करना चाहिए:

  1. प्रातःकाल स्नान और संकल्प: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। साफ-सुथरे हरे, लाल या पीले रंग के सुंदर वस्त्र धारण करें (काले और नीले रंग के वस्त्रों से पूरी तरह परहेज करें)। इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर भगवान शिव व माता पार्वती के समक्ष व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा मंडप की तैयारी: घर के मंदिर या साफ-सुथरे स्थान पर एक चौकी (चौका) बिछाएं और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। आप शुद्ध मिट्टी या बालू से भी पार्थिव शिव-पार्वती की प्रतिमा बना सकते हैं।

  3. भगवान शिव का अभिषेक व पूजन: सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें। इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। शिवलिंग पर चंदन का त्रिपुंड लगाएं और 3 पत्तियों वाले अखंडित बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद पुष्प और भस्म चढ़ाएं।

  4. माता पार्वती को शृंगार सामग्री: सुहागिन महिलाएं माता पार्वती को सोलह शृंगार की वस्तुएं (हरा जोड़ा, चुनरी, हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, आलता, बिछिया आदि) अर्पित करें। कुंवारी कन्याएं मां पार्वती को लाल चुनरी, पुष्प, फल और अक्षत अर्पित कर मनचाहे वर के लिए प्रार्थना करें।

  5. व्रत कथा का पाठ और आरती: शाम के समय (प्रदोष काल में) घी का दीपक और धूपबत्ती जलाकर हरियाली तीज की पारंपरिक व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इसके बाद आरती करके कपूर से भगवान शिव और माता पार्वती की उरति उतारें।

  6. भोग और प्रसाद: शिव-पार्वती को खीर, घेवर, मालपुआ और ताजे मौसमी फलों का भोग लगाएं।

कुंवारी कन्याओं और सुहागिनों के लिए जरूरी नियम व सावधानियां

हरियाली तीज का व्रत निष्ठा और पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • हरा रंग समृद्धि का प्रतीक: हरियाली तीज पर हरे रंग का विशेष महत्व होता है। हरा रंग प्रकृति, सुख, समृद्धि और नवजीवन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महिलाएं और कन्याएं इस दिन हरे रंग की साड़ी/सूट, हरी चूड़ियां और हाथों में मेहंदी अवश्य लगाएं।

  • निर्जला व फलाहार नियम: सुहागिन महिलाएं आमतौर पर यह व्रत निर्जला (बिना अन्न-जल) रखती हैं। हालांकि, कुंवारी कन्याएं या गर्भवती/अस्वस्थ महिलाएं फल, दूध और जल का सेवन करके फलाहारी व्रत भी रख सकती हैं।

  • क्रोध व नकारात्मकता से बचें: व्रत के दिन किसी की चुगली न करें, न ही किसी पर क्रोध करें। अपने मन में सकारात्मक विचार रखें और दिन भर “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” मंत्र का जाप करती रहें।

  • सांस्कृतिक परंपराएं: पूजा के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों और सास के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें। इस दिन झूला झूलने और तीज के लोकगीत गाने की भी प्राचीन परंपरा है, जो मन को प्रसन्नता से भर देती है।

सावन का यह पवित्र पर्व सुहागिनों के सुहाग की रक्षा करने वाला और कुंवारी कन्याओं के सपनों को साकार करने वाला माना गया है। सही तिथि और मुहूर्त में पूरे भाव से शिव-गौरी की साधना करें और मनचाहा आशीर्वाद प्राप्त करें।