
सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और विशेष स्थान रखता है। यह पावन दिन अपने गुरुजनों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस साल यह शुभ पर्व 29 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महान ग्रंथ महाभारत और वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर्व को ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से 5 प्रकार के गुरुओं का पूजन और सम्मान करने से जीवन में सुख, शांति, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
आइए जानते हैं कि वे 5 गुरु कौन से हैं जिनका आशीर्वाद लेना इस दिन बेहद फलदायी माना गया है:
1. मां (जीवन की पहली गुरु)
शास्त्रों में माता को बालक का प्रथम गुरु माना गया है। मां ही बच्चे को बोलना, चलना, सही और गलत का भेद तथा जीवन के प्राथमिक संस्कार सिखाती है।
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कैसे करें सम्मान: गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर सबसे पहले अपनी मां के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। उन्हें उनकी पसंद के वस्त्र या कोई भेंट देकर उनका आभार व्यक्त करें। माता के आशीर्वाद से जीवन में सुरक्षा और अमिट सुख प्राप्त होता है।
2. पिता (कर्तव्य और संघर्ष सिखाने वाले गुरु)
पिता बच्चे को दुनिया की चुनौतियों का सामना करना, कड़ा परिश्रम, अनुशासन और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना सिखाते हैं।
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कैसे करें सम्मान: इस दिन पिता के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें। उन्हें रोली का तिलक लगाएं, माला पहनाएं या उपहार देकर सम्मानित करें। पिता का आशीर्वाद जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
3. शिक्षा देने वाले गुरु (शिक्षक)
विद्यालय, कॉलेज या किसी भी कला-कौशल की शिक्षा देने वाले शिक्षक हमें अज्ञानता के अंधेरे से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और आजीविका कमाने योग्य बनाते हैं।
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कैसे करें सम्मान: गुरु पूर्णिमा पर अपने शिक्षकों और प्राध्यापकों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर या दूर होने पर फोन/संदेश के माध्यम से उनका आभार व्यक्त करें। गुरु का सम्मान करने से मेधा बुद्धि और करियर में प्रगति होती है।
4. आध्यात्मिक गुरु (दीक्षा देने वाले गुरु)
आध्यात्मिक गुरु वह दीपक हैं जो इंसान का परिचय ईश्वर से कराते हैं और मन को शांति व मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
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कैसे करें सम्मान: इस दिन अपने दीक्षा गुरु के आश्रम या स्थान पर जाकर उनके दिए मंत्रों का जाप करें। उनकी पादुकाओं या चरणों का पूजन कर यथाशक्ति दान-दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
5. महर्षि वेदव्यास और त्रिदेव
चूंकि गुरु पूर्णिमा मुख्य रूप से व्यास पूर्णिमा है, इसलिए इस दिन जगतगुरु महर्षि वेदव्यास जी का पूजन करना अनिवार्य माना गया है।
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कैसे करें पूजन: महर्षि वेदव्यास जी के चित्र या मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित करें। इसके साथ ही भगवान दत्तात्रेय (जिन्हें सनातन परंपरा में पहला गुरु माना गया है), भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना अवश्य करें।
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