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Gold Price Today: नवरात्रि के चौथे दिन भी गिरा सोना, दिल्ली से चेन्नई तक ₹1,50,000 के नीचे फिसले 24K के दाम; जानें प्रमुख शहरों के ताजा रेट्स

त्योहारी सीजन में सोने के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिए नवरात्रि का चौथा दिन बड़ी राहत लेकर आया है। देश भर के सर्राफा बाजारों में पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी पर ब्रेक लग गया है और सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर दक्षिण भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्र चेन्नई तक 24 कैरेट शुद्ध सोने (99.9% शुद्धता) का भाव ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है। नवरात्रि के पावन पर्व पर मां कुष्मांडा के पूजन के साथ शुरू हुए आज के कारोबारी दिन में खुदरा खरीदारों के चेहरों पर चमक लौट आई है, क्योंकि पिछले सप्ताह सोना ₹1.51 लाख से ₹1.52 लाख के रिकॉर्ड उच्च स्तर के पार चला गया था। घरेलू वायदा बाजार (MCX) पर भी सुस्त वैश्विक संकेतों के चलते बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है, जिससे खुदरा बाजारों में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है।

देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय वैट (VAT), ऑक्ट्रॉय और परिवहन लागत के कारण सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिलता है। हालांकि, आज देश के लगभग सभी बड़े महानगरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट दोनों श्रेणियों में कीमतें नीचे आई हैं:

  • राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली: दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,49,430 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जो कल ₹1,49,440 था। वहीं गहने बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,36,980 से ₹1,36,990 प्रति 10 ग्राम दर्ज की जा रही है। 18 कैरेट सोना भी गिरकर ₹1,12,070 प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है।

  • चेन्नई और तमिलनाडु: दक्षिण भारत के सबसे बड़े आभूषण बाजार चेन्नई में भी सोने के तेवर ढीले पड़े हैं। चेन्नई में आज 24 कैरेट सोना ₹1,49,280 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,36,840 प्रति 10 ग्राम पर आ गई है।

  • मुंबई और आर्थिक राजधानी क्षेत्र: मुंबई के प्रसिद्ध झावेरी बाजार में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,49,300 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर स्थिर है, जबकि 22 कैरेट सोना ₹1,36,850 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है।

  • कोलकाता और पूर्वी भारत: कोलकाता में 24 कैरेट सोना ₹1,49,350 और 22 कैरेट जेवराती सोना ₹1,36,900 प्रति 10 ग्राम के आसपास दर्ज किया गया है।

  • लखनऊ और उत्तर प्रदेश: नवाबों के शहर लखनऊ में 24 कैरेट शुद्ध सोने की दर ₹1,49,430 और 22 कैरेट का भाव ₹1,36,980 प्रति 10 ग्राम पर स्थिर देखा गया है।

सोने की कीमतों में आई इस हालिया गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर कई अहम आर्थिक कारक एक साथ काम कर रहे हैं:

  1. मुनाफावसूली (Profit Booking): पिछले पखवाड़े में सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। जब भी कोई कमोडिटी अपने रिकॉर्ड स्तर को छूती है, तो बड़े संस्थागत निवेशक और हैज फंड्स मुनाफावसूली शुरू करते हैं। विदेशी बाजारों (कॉमेक्स) में निवेशकों द्वारा की गई भारी बिकवाली का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार पर पड़ा है।

  2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव के कारण गैर-ब्याज देने वाली संपत्ति (Non-yielding asset) जैसे सोने में संस्थागत प्रवाह धीमा हुआ है। जब वैश्विक निवेशक बॉन्ड मार्केट की ओर रुख करते हैं, तो सोने की हाजिर मांग पर दबाव बन जाता है।

  3. पश्चिम एशिया में कूटनीतिक वार्ताओं की उम्मीद: यमन और लाल सागर क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय मध्यस्थों की ओर से कूटनीतिक वार्ताओं की खबरों ने युद्ध के तात्कालिक जोखिम प्रीमियम (Risk Premium) को थोड़ा कम किया है, जिससे सोने में ‘सेफ हेवन’ बाइंग में कुछ ठहराव आया है।

  4. घरेलू आयात शुल्क कटौती का असर: केंद्र सरकार द्वारा हाल के बजट में सोने और चांदी पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को युक्तिसंगत बनाए जाने के बाद से अवैध तस्करी पर लगाम लगी है और घरेलू बाजार में आपूर्ति की स्थिति बेहतर बनी हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर अचानक कृत्रिम कमी पैदा नहीं हो रही है।

भारतीय संस्कृति में नवरात्रि के नौ दिन, करवा चौथ और उसके बाद आने वाले धनतेरस व दीपावली के पावन पर्व को कीमती धातुओं की खरीदारी के लिए सबसे शुभ काल माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इन दिनों में सोना या चांदी घर लाना मां लक्ष्मी और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार, भाव के ₹1.50 लाख से नीचे आने का सीधा मनोवैज्ञानिक फायदा खुदरा बाजार को मिल रहा है। जो परिवार आगामी शादी-ब्याह के सीजन के लिए आभूषण खरीदने से झिझक रहे थे, वे अब दुकानों और बड़े शोरूमों का रुख कर रहे हैं। तनिष्क, कल्याण ज्वैलर्स, मालाबार गोल्ड और पीसी ज्वैलर जैसे बड़े रिटेलर्स ने भी नवरात्रि के अवसर पर मेकिंग चार्ज पर 20% से 50% तक की छूट की घोषणा की है, जिससे ग्राहकों को दोहरा लाभ मिल रहा है।

खुदरा खरीदारी करते समय ग्राहकों को अक्सर कैरेट (Carat) के गणित में भ्रम हो जाता है:

  • 24 कैरेट (99.9% शुद्ध): इसे सबसे शुद्ध सोना माना जाता है और इसका आधिकारिक हॉलमार्क कोड ‘999’ होता है। चूंकि यह बहुत लचीला और मुलायम होता है, इसलिए इसका उपयोग आभूषण बनाने में नहीं किया जाता। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सोने के सिक्के, बार और बिस्कुट (सॉलिड गोल्ड) के रूप में निवेश के लिए होता है।

  • 22 कैरेट (91.6% शुद्ध): भारतीय पारंपरिक शादी के आभूषण बनाने के लिए 22 कैरेट सोना सबसे मुफीद होता है, जिसका हॉलमार्क कोड ‘916’ है। इसमें 91.6% शुद्ध सोना और शेष 8.4% तांबा या चांदी जैसी मजबूत धातुएं मिलाई जाती हैं ताकि गहनों को मजबूती मिल सके।

  • 18 कैरेट (75.0% शुद्ध): इसका हॉलमार्क कोड ‘750’ होता है। हीरे और कुंदन जड़े आधुनिक व हल्के आभूषणों (Diamond & Studded Jewellery) के लिए इसका उपयोग सर्वाधिक किया जाता है। यह 22 कैरेट की तुलना में कठोर और किफायती होता है।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े नियमों के तहत देश भर में सोने के आभूषणों पर 6 अंकों का ‘HUID’ (Hallmark Unique Identification) कोड अनिवार्य कर दिया गया है। आभूषण खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

  1. तीन निशान जांचें: सोने के हर गहने पर बीआईएस का त्रिकोणीय लोगो, शुद्धता का ग्रेड (जैसे 22K916 या 18K750) और 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक HUID कोड खुदा होना चाहिए।

  2. बीआईएस केयर ऐप (BIS Care App): ग्राहक अपने मोबाइल में बीआईएस केयर ऐप डाउनलोड करके आभूषण पर दर्ज 6 अंकों के HUID कोड को स्कैन कर सकते हैं। इससे स्क्रीन पर तुरंत ज्वेलर का नाम, लाइसेंस नंबर और हॉलमार्किंग की तारीख सामने आ जाती है।

  3. पक्का जीएसटी बिल लें: बिना बिल के नकद खरीदारी से हमेशा बचें। पक्के बिल में सोने का शुद्ध वजन, मेकिंग चार्ज और 3% जीएसटी का अलग-अलग विवरण होना चाहिए। यदि भविष्य में कभी उसी आभूषण को बदलना या बेचना पड़े, तो पक्का बिल होने पर ज्वेलर पूरे वजन और शुद्धता का सही मूल्य चुकाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होता है।

कमोडिटी और बुलियन बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान गिरावट एक स्वस्थ तकनीकी सुधार (Healthy Correction) है। ऐतिहासिक रूप से अक्टूबर से दिसंबर के दौरान त्योहारों और शादियों के चलते भारत में सोने की मांग सबसे चरम पर रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई, ब्याज दरों की अनिश्चितता और डॉलर की संभावित नरमी को देखते हुए लंबी अवधि में सोने का बुनियादी ढांचा (Long-term Fundamentals) बेहद मजबूत बना हुआ है। यदि आप धनतेरस या शादी के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो किसी बड़े क्रैश का इंतजार करने के बजाय मौजूदा गिरावट में टुकड़ों-टुकड़ों (Staggered Manner) में खरीदारी करना सबसे सुरक्षित और विवेकपूर्ण रणनीति होगी।