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Foreign Assets FAST DS Scheme: विदेशों में संपत्ति या कमाई छिपाई है? 30% टैक्स और पेनल्टी के साथ 31 दिसंबर तक बताने का आखिरी मौका, जानिए क्या है FAST-DS स्कीम

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और वित्त मंत्रालय ने विदेशों में अघोषित संपत्ति, विदेशी बैंक खातों, विदेशी कंपनियों के शेयरों (ESOPs/RSUs) या विदेशी आमदनी रखने वाले छोटे करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए एक नई स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना FAST-DS (Foreign Assets of Small Taxpayers – Disclosure Scheme, 2026) को अधिसूचित कर दिया है। यह योजना 16 अगस्त 2026 से प्रभावी होकर 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। यदि किसी भारतीय निवासी करदाता ने जाने-अनजाने में अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के ‘शेड्यूल एफए’ (Schedule FA) में विदेशी संपत्तियों का ब्योरा नहीं दिया था, तो यह उनके लिए भारी पेनल्टी और ब्लैक मनी एक्ट (Black Money Act) के तहत जेल जाने के जोखिम से बचने का आखिरी कानूनी मौका है।

क्या है FAST-DS स्कीम और किसे मिलेगा इसका फायदा?

FAST-DS केंद्र सरकार द्वारा छोटे करदाताओं, पूर्व में विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों, मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों (जिन्हें विदेशी स्टॉक्स मिले हैं) और भारत लौट चुके अनिवासी भारतीयों (Returning NRIs) के लिए लाई गई एकमुश्त अनुपालन विंडो (One-Time Compliance Window) है।

  • ब्लैक मनी एक्ट 2015 के तहत विदेशी संपत्ति न दिखाने पर संपत्ति के उचित बाजार मूल्य (FMV) पर 30% टैक्स के साथ-साथ 90% तक की भारी पेनल्टी (कुल 120%) और ₹10 लाख प्रति वर्ष का जुर्माना लगता है।

  • FAST-DS स्कीम के तहत करदाता तय टैक्स या शुल्क चुकाकर कानूनी कार्रवाई, मुकदमों और भारी जुर्माने से पूर्ण वैधानिक छूट (Statutory Immunity) प्राप्त कर सकते हैं।

योजना के तहत टैक्स और शुल्क की गणना: 2 मुख्य श्रेणियां

इस योजना के तहत संपत्तियों और कमाई के प्रकार के आधार पर दो अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं:

  • श्रेणी 1: पूरी तरह अघोषित संपत्ति और विदेशी आय (Undisclosed Assets/Income up to ₹1 Crore):

    • पात्रता सीमा: अघोषित विदेशी संपत्ति और विदेशी आय का कुल कुल मूल्य 1 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए (मूल्यांकन तिथि 31 मार्च 2026)।

    • कुल देय राशि (60%): संपत्ति या आय के उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value) पर 30% फ्लैट टैक्स और उस टैक्स के बराबर (100%) अतिरिक्त शुल्क/पेनल्टी (30%), यानी कुल मिलाकर संपत्ति के मूल्य का 60% सरकार को चुकाना होगा।

    • उदाहरण: यदि किसी की 50 लाख रुपये की अघोषित संपत्ति है, तो ₹15 लाख टैक्स और ₹15 लाख अतिरिक्त शुल्क मिलाकर कुल ₹30 लाख चुकाने होंगे। इसके बाद ब्लैक मनी एक्ट के तहत कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

  • श्रेणी 2: तकनीकी चूक वाली संपत्ति (Taxes Already Paid up to ₹5 Crore):

    • पात्रता सीमा: जिन करदाताओं ने अपनी विदेशी आय पर पहले ही टैक्स चुका दिया था या जो संपत्ति एनआरआई रहते हुए बनाई गई थी, लेकिन वे केवल ITR के शेड्यूल एफए (Schedule FA) में रिपोर्ट करना भूल गए थे, उनके लिए ₹5 करोड़ तक की सीमा रखी गई है।

    • फ्लैट फीस: इस श्रेणी में किसी बड़े टैक्स के बजाय केवल ₹1,00,000 (1 लाख रुपये) की एकमुश्त फ्लैट फीस देकर संपत्ति को वैध किया जा सकता है।

कौन सी विदेशी संपत्तियां आती हैं इसके दायरे में?

  • विदेशी बैंकों में खुले सेविंग्स, करंट या फिक्स्ड डिपॉजिट खाते।

  • विदेशी टेक कंपनियों के शेयर्स, ई-सॉप्स (ESOPs), आरएसयू (RSUs) या म्यूचुअल फंड्स।

  • विदेशों में खरीदी गई अचल संपत्ति (मकान, फ्लैट या जमीन)।

  • विदेशी एक्सचेंजों या वॉलेट्स में रखी गई क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs)।

  • विदेशी ट्रस्टों में हिस्सेदारी या विदेशों में रिश्तेदार से विरासत में मिली संपत्ति।

योजना की समय सीमा और महत्वपूर्ण तारीखें

  • शुरुआत की तारीख: 16 अगस्त 2026।

  • अंतिम तिथि: 31 दिसंबर 2026 (इसके बाद कोई घोषणा स्वीकार नहीं की जाएगी)।

  • मूल्यांकन तिथि (Valuation Date): 31 मार्च 2026 के आधार पर संपत्तियों का फेयर मार्केट वैल्यू तय किया जाएगा।

  • टैक्सपेयर्स को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से फॉर्म 1 भरकर ऑनलाइन डिक्लेरेशन दाखिल करना होगा।