
परमानेंट अकाउंट नंबर यानी पैन (PAN) कार्ड आज के समय में सिर्फ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का एक जरिया मात्र नहीं रह गया है। आधुनिक बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था में यह आपके हर छोटे-बड़े वित्तीय लेन-देन की रीढ़ बन चुका है। नया बैंक अकाउंट खुलवाना हो, म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में निवेश करना हो, नई गाड़ी खरीदनी हो या फिर कोई कीमती प्रॉपर्टी—हर जगह पैन कार्ड की अनिवार्यता तय कर दी गई है।
यदि आप किसी बड़े लेन-देन के समय अपना पैन कार्ड जमा नहीं करते हैं, या अनजाने में भी गलत पैन नंबर दर्ज कर देते हैं, तो न केवल आपका ट्रांजैक्शन अधर में लटक सकता है, बल्कि आप पर भारी-भरकम टैक्स कटौती (Higher TDS) और आयकर विभाग की सख्त कानूनी कार्रवाई का शिकंजा भी कस सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि किन 5 बड़े लेन-देन में पैन कार्ड अनिवार्य है और नियमों की अनदेखी पर क्या सजा हो सकती है।
इन 5 बड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन में PAN देना है अनिवार्य
आयकर नियमों (Income Tax Rules) के तहत सरकार का मुख्य मकसद बड़े और हाई-वैल्यू लेन-देन को करदाताओं की वास्तविक सालाना आय और टैक्स प्रोफाइल से जोड़कर ट्रैक करना है, ताकि काले धन और टैक्स चोरी पर लगाम लगाई जा सके। इसके तहत निम्नलिखित 5 ट्रांजैक्शंस के लिए पैन अनिवार्य है:
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1. ₹20 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी: यदि आप कोई जमीन, मकान, दुकान या फ्लैट खरीद या बेच रहे हैं और उसकी रजिस्ट्री या वैल्यू 20 लाख रुपये से अधिक है, तो दोनों पक्षों (खरीदार और विक्रेता) को अपना पैन नंबर देना अनिवार्य है।
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2. ₹5 लाख से अधिक की गाड़ी: शोरूम से कोई भी नई कार, एसयूवी या हैवी कमर्शियल मोटरसाइकिल/वाहन खरीदने पर, जिसकी कीमत 5 लाख रुपये से अधिक है, पैन कार्ड देना जरूरी होता है।
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3. ₹2 लाख से अधिक की खरीदारी: यदि आप किसी सुनार से नकद या डिजिटल माध्यम से भारी ज्वेलरी खरीदते हैं, या 2 लाख रुपये से अधिक के किसी भी अन्य सामान और सेवाओं (जैसे लग्जरी वेकेशन या होटल बिल्स) का भुगतान करते हैं, तो पैन कार्ड मांगा जाएगा।
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4. ₹1 लाख से अधिक के अनलिस्टेड शेयर्स: शेयर बाजार के बाहर यानी किसी अनलिस्टेड कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री में यदि लेन-देन की रकम 1 लाख रुपये को पार करती है, तो बिना पैन के यह डील अमान्य मानी जाएगी।
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5. डीमैट और इन्वेस्टमेंट अकाउंट्स: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड्स में निवेश करने के लिए नया डीमैट अकाउंट (Demat Account) खोलते समय या किसी भी वित्तीय संस्था में बड़ा निवेश करते समय केवाईसी (KYC) के लिए पैन कार्ड प्राथमिक दस्तावेज है।
क्या PAN न बताने या गलत जानकारी देने पर आ सकता है नोटिस?
आजकल के सख्त ऑटोमेटेड नियमों के कारण जिन ट्रांजैक्शंस में पैन अनिवार्य है, वहां इसके बिना आपका काम आगे ही नहीं बढ़ता। लेकिन यदि कोई व्यक्ति चालाकी दिखाने के लिए गलत या फर्जी पैन नंबर दर्ज करता है, तो आयकर अधिनियम की धारा के तहत उस पर ₹10,000 का सीधा नकद जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा:
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गलत पैन के कारण आपका टीडीएस (TDS) रिफंड फंस सकता है।
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आपको मिलने वाला टैक्स क्रेडिट आपके खाते में दिखाई नहीं देगा।
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टैक्स विभाग की डेटा एनालिटिक्स टीम आपको संदिग्ध मानकर अतिरिक्त स्क्रूटनी (जांच) के दायरे में डाल सकती है।
टैक्स विभाग कैसे रखता है नजर? एक बार जब आप किसी ट्रांजैक्शन में अपना सही पैन नंबर दर्ज करते हैं, तो वह सीधा वित्तीय लेन-देन के विवरण (SFT), एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS में रिफ्लेक्ट होने लगता है। इसके बाद आयकर विभाग का आधुनिक रिस्क असेसमेंट सॉफ्टवेयर आपकी घोषित आईटीआर आय और इन खर्चों की तुलना करता है। यदि आपकी घोषित सालाना आय ₹5 लाख है और आपके पैन पर ₹25 लाख की प्रॉपर्टी दर्ज होती है, तो विभाग तुरंत पैसों के स्रोत (Source of Income) का स्पष्टीकरण मांगने के लिए आपको नोटिस जारी कर सकता है।
पैन नहीं है तो क्या Form 97 का इस्तेमाल किया जा सकता है?
आयकर नियमों के तहत Form 97 उन नागरिकों के लिए एक अस्थाई व्यवस्था के रूप में डिजाइन किया गया है, जिनके पास वर्तमान में किसी वैध कारण से पैन कार्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन उन्हें कोई ऐसा लेन-देन करना पड़ रहा है जहां पैन मांगा जाता है।
हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक Form 97 को पैन कार्ड का स्थायी या कानूनी विकल्प (Substitue) नहीं माना जा सकता। जिन नागरिकों या करदाताओं के लिए कानूनन पैन कार्ड बनवाना अनिवार्य है, वे जानबूझकर पैन कार्ड न बनवाकर Form 97 का सहारा नहीं ले सकते। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसलिए समझदारी इसी में है कि समय रहते अपना पैन कार्ड बनवाएं और हर जगह केवल सही व अपडेटेड पैन नंबर का ही इस्तेमाल करें।
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