
नई दिल्ली। “कुछ बाहर का स्वादिष्ट खाने का मन है? चलो तुरंत ऑनलाइन ऑर्डर कर लेते हैं।” क्या आप भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर ऐसा ही करते हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो यह खबर आपको समय रहते सावधान करने के लिए है। आजकल की बदलती और सुस्त लाइफस्टाइल, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और प्रोसेस्ड फूड की आदतों के कारण लोगों में फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या महामारी की तरह तेजी से बढ़ रही है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई लोग इसे बेहद आम या मामूली बीमारी समझकर पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। आम जनता के बीच फैटी लिवर को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और गलत धारणाएं फैली हुई हैं।
इसी गंभीर विषय पर प्रकाश डालते हुए एम्स (AIIMS), हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेंड मशहूर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो साझा कर फैटी लिवर से जुड़े तीन सबसे बड़े मिथकों (Myths) का वैज्ञानिक सच उजागर किया है। डॉक्टर के अनुसार, सही जानकारी और समय पर जीवनशैली (Lifestyle) में थोड़े से सुधार करके इस गंभीर समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
मिथक 1: फैटी लिवर केवल ज्यादा घी-तेल या फैट खाने से होता है
आमतौर पर लोगों के मन में यह धारणा बैठी हुई है कि भोजन में ज्यादा घी, मक्खन, तेल या वसायुक्त चीजें शामिल करने से ही लिवर में चर्बी जमा होती है। डॉ. सौरभ सेठी के मुताबिक, यह पूरी तरह सच नहीं है। फैटी लिवर का सबसे बड़ा असली विलेन केवल फैट नहीं, बल्कि भोजन में मौजूद हाई-फ्रक्टोज और प्रोसेस्ड सामग्रियां हैं।
बाजार में मिलने वाले पैकेज्ड सॉफ्ट ड्रिंक्स, डिब्बाबंद मीठे पेय पदार्थ, प्रोसेस्ड स्नैक्स और रिफाइंड जंक फूड में फ्रक्टोज की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो लिवर में सीधे तौर पर फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इसके अतिरिक्त, घटिया गुणवत्ता वाले सीड ऑयल्स (सस्ते रिफाइंड तेल) भी इस बीमारी को बढ़ाते हैं। डॉक्टर ने साफ किया कि सभी फैट बुरे नहीं होते; एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल, एवोकाडो और नट्स (मेवे) में पाए जाने वाले हेल्दी फैट्स वास्तव में आपके लिवर की सुरक्षा करते हैं।
मिथक 2: फैटी लिवर कोई जानलेवा या गंभीर बीमारी नहीं है
चूंकि यह बीमारी आजकल बहुत से लोगों की रिपोर्ट में निकल आती है, इसलिए लोग इसे हल्के में ले लेते हैं। डॉ. सेठी ने चेतावनी दी है कि यह सोच बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। अगर फैटी लिवर का समय पर इलाज और प्रबंधन न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे अंदर ही अंदर गंभीर रूप धारण कर लेता है। यह आगे चलकर नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH), फाइब्रोसिस, लिवर सिरोसिस और अंत में लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों में तब्दील हो सकता है।
इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अपने शुरुआती चरणों में यह कोई लक्षण (Silent Killer) नहीं दिखाती। इसलिए नियमित रूप से ब्लड टेस्ट (जैसे LFT) और डॉक्टरी परामर्श लेना बेहद जरूरी है।
मिथक 3: डाइट और लाइफस्टाइल बदलने से फैटी लिवर ठीक नहीं हो सकता
कई मरीजों को ऐसा लगता है कि एक बार लिवर में फैट जमा हो जाने के बाद उसे दवाओं के बिना ठीक करना असंभव है और केवल खानपान बदलने से कोई खास फायदा नहीं होगा। डॉ. सौरभ सेठी इसे एक बड़ा भ्रम मानते हैं। उनके अनुसार, फैटी लिवर एक ऐसी प्रतिवर्ती (Reversible) स्थिति है, जिसे सही खानपान, वजन नियंत्रण और नियमित व्यायाम की मदद से न केवल सुधारा जा सकता है, बल्कि कई मामलों में लिवर को पूरी तरह पहले जैसा स्वस्थ भी बनाया जा सकता है। इसके लिए बाजार में बिकने वाले किसी भी महंगे डिटॉक्स टी, नकली सप्लीमेंट्स या किसी चमत्कारी प्रोडक्ट के जाल में फंसने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
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