FASTag और ANPR कैमरों से अब अपराधियों पर कसेगा शिकंजा: टोल प्लाजा डेटा पर होगी एनआईए और ईडी की पैनी नजर

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने वाला ‘फास्टैग’ (FASTag) अब केवल टोल टैक्स वसूली तक सीमित नहीं रहने वाला है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए एक बेहद कड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। अब टोल प्लाजा पर लगे फास्टैग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों के डेटा का इस्तेमाल देश में वाहन चोरी, संगठित अपराध और आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए एक शक्तिशाली हथियार के रूप में किया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से इस संबंध में नए दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं, जो देश की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित होंगे।

सुरक्षा एजेंसियों को मिलेगी डायरेक्ट फीड और रियल-टाइम अलर्ट

अक्सर यह देखा गया है कि आतंकवादी घटनाओं या हमलों में वाहनों का इस्तेमाल विस्फोटक ले जाने या वाहनजनित आईईडी (VBIED) के रूप में किया जाता है। इसके अलावा अपराधी और वाहन चोर अपनी गाड़ियों की नंबर प्लेट बदलकर या फर्जी प्लेट लगाकर आसानी से एक राज्य से दूसरे राज्य निकल जाते हैं। इस नए प्लान के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों को टोल प्लाजा के डेटा की डायरेक्ट फीड मिलेगी। जैसे ही कोई ब्लैकलिस्टेड या संदिग्ध वाहन किसी भी टोल प्लाजा पर पहुंचेगा, एजेंसियों के पास तुरंत रियल-टाइम अलर्ट पहुंच जाएगा। इससे संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध गाड़ियों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी और किसी भी घटना के बाद आतंकियों या अपराधियों को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

वाहन चोरी और हिट-एंड-रन मामलों का तुरंत होगा खुलासा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल औसतन डेढ़ से दो लाख वाहन चोरी होते हैं, जिनमें अकेले दिल्ली-एनसीआर से जुड़े मामलों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक होती है। चोरी किए गए इन वाहनों को अपराधी कुछ ही घंटों में पूर्वोत्तर राज्यों, नेपाल सीमा या जम्मू-कश्मीर की तरफ भगा ले जाते हैं। नए एएनपीआर कैमरे केवल नंबर प्लेट ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि वाहन के रंग, मेक और मॉडल का भी सटीक मिलान करेंगे। यदि फास्टैग और गाड़ी के असली विवरण में कोई अंतर पाया गया, तो टोल प्लाजा पर ही वाहन को दबोच लिया जाएगा। इसके अलावा, हिट-एंड-रन मामलों, लूट, डकैती, अपहरण और हथियारों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों का सटीक रूटमैप और टाइम-स्टैम्प डेटा निकालकर अपराधियों तक पहुंचना अब बेहद आसान हो जाएगा।

आम जनता की निजता का रखा जाएगा पूरा ध्यान

इस पूरी प्रक्रिया में नागरिकों की गोपनीयता (Privacy) का विशेष ध्यान रखा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह संवेदनशील डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और इसे आम जनता के लिए सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। केवल अधिकृत और प्रमुख कानून प्रवर्तन एजेंसियों जैसे कि पुलिस, एनआईए, ईडी और परिवहन विभागों को ही इसका नियंत्रित एक्सेस मिलेगा। डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक कनिष्ठ मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय की गई है, जिसके तहत केवल वरिष्ठ अधिकारियों के औपचारिक अनुरोध पर ही आवश्यक जानकारी साझा की जाएगी।