
देशभर में ई-20 (E20) पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के फैसले से आम नागरिकों और मिडिल क्लास पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया है कि सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी और नीतियों का लाभ आम जनता या उपभोक्ताओं को मिलने के बजाय सीधे तौर पर केवल इथेनॉल उत्पादकों को मिला है, जिससे वाहन चालकों की जेब पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
जयराम रमेश का सरकार पर तंज, बोले- माइलेज घटने पर कम होनी चाहिए थी कीमत
कांग्रेस पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को आड़े हाथों लेते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि साल 2025 से देश के नियमित पेट्रोल पंपों पर असल में केवल E20 पेट्रोल ही मिल रहा है, जबकि पहले यह दावा किया गया था कि इथेनॉल मिश्रण के बाद वैकल्पिक ईंधन काफी किफायती दरों पर उपलब्ध होगा। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार को यह पहले से ही ज्ञात था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है, तो सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इसकी खुदरा कीमत में आनुपातिक कमी करनी चाहिए थी ताकि आम आदमी को राहत मिल सके।
उपभोक्ताओं को उठाना पड़ा 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च
कांग्रेस पार्टी ने एक स्वतंत्र विश्लेषण का हवाला देते हुए दावा किया है कि अप्रैल 2023 से लेकर मार्च 2026 के बीच एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण कम माइलेज की भरपाई करने के लिए देश के आम उपभोक्ताओं को सामूहिक रूप से लगभग 88,234 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े हैं। पार्टी ने नीति आयोग के इथेनॉल रोडमैप का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें उपभोक्ताओं को वित्तीय और कर प्रोत्साहन देने की सिफारिश की गई थी, लेकिन इसके उलट सरकार ने एथेनॉल उत्पादकों के पक्ष में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम सब्सिडी मंजूर कर दी, जिससे मिडिल क्लास को कोई फायदा नहीं हुआ।
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