
देश के सबसे बड़े रोशनी के महापर्व दीपावली और उसके तुरंत बाद आने वाले आस्था के महापर्व छठ पर अपने गांव और पैतृक घर जाने वाले लाखों मुसाफिरों के लिए रेलवे आरक्षण की खिड़कियां खुल चुकी हैं। दिल्ली, मुंबई, गुजरात, बेंगलुरु, पंजाब और चेन्नई जैसे बड़े औद्योगिक व कामकाजी शहरों से उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीटों को लेकर होड़ शुरू हो चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी नियमित ट्रेनों में बुकिंग खुलते ही महज चंद मिनटों में सीटें भर रही हैं और वेटिंग लिस्ट तेजी से लंबी हो रही है।
दीपावली का मुख्य पर्व नवंबर के दूसरे रविवार यानी 8 नवंबर को मनाया जाना है, जबकि धनतेरस का आरंभ 6 नवंबर से हो रहा है। ऐसे में जो लोग त्योहार से दो-तीन दिन पहले अपने घर पहुंचना चाहते हैं, उनके लिए सितंबर महीने के पहले और दूसरे सप्ताह के दौरान टिकट बुक करना अनिवार्य हो गया है। रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यात्रियों ने समय रहते अपनी यात्रा की तारीख तय कर टिकट बुक नहीं कराया, तो उन्हें बाद में भारी वेटिंग या फिर तत्काल टिकट की अनिश्चितता के भरोसे बैठना पड़ेगा।
रेलवे टिकट आरक्षण प्रणाली में हुए बड़े बदलाव के बाद अब यात्रियों को एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) का विशेष ध्यान रखना होगा। भारतीय रेलवे द्वारा अग्रिम आरक्षण की समयसीमा 120 दिनों से घटाकर 60 दिन कर दी गई है। कई यात्री अब भी पुराने 120 दिन वाले नियम के भ्रम में रहते हैं, जिसके कारण उनकी बुकिंग की सही तारीख छूट जाती है। 60 दिन के इस नए नियम के तहत यात्रा की तारीख को छोड़कर ठीक 60 दिन पहले सुबह 8:00 बजे सामान्य कोटे की ऑनलाइन और काउंटर बुकिंग शुरू होती है।
यदि आपकी यात्रा ट्रेन के प्रारंभिक स्टेशन से 5 नवंबर को शुरू हो रही है, तो उसकी बुकिंग 60 दिन पहले यानी सितंबर के पहले सप्ताह में खुली है। इसी प्रकार 6 नवंबर (धनतेरस) और 7 नवंबर (छोटी दिवाली) की यात्रा के लिए बुकिंग विंडो क्रमशः 7 सितंबर और 8 सितंबर की सुबह 8:00 बजे से खुल रही है। 8 नवंबर (मुख्य दिवाली) के लिए 9 सितंबर को और 10 नवंबर (भाई दूज) के लिए 11 सितंबर को रिजर्वेशन विंडो खुलेगी। इसके बाद 15 और 16 नवंबर को पड़ने वाले छठ महापर्व के लिए 16 और 17 सितंबर से टिकट बुक किए जा सकेंगे। यह गणना ट्रेन के ऑरिजिन यानी प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान के दिन के आधार पर की जाती है।
दिल्ली और मुंबई से पूर्वांचल और बिहार जाने वाले प्रमुख रेल मार्गों पर अभी से सीटों की भारी किल्लत देखी जा रही है। नई दिल्ली, आनंद विहार और पुरानी दिल्ली से पटना, दरभंगा, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, वाराणसी और गया जाने वाली लोकप्रिय सुपरफास्ट और एक्सप्रेस गाड़ियों—जैसे संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति, पूर्वा एक्सप्रेस, मगध एक्सप्रेस और विक्रमशिला एक्सप्रेस—में स्लीपर और थर्ड एसी श्रेणियों में सीटें खुलते ही भर रही हैं।
इसी तरह मुंबई सेंट्रल, लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) और बांद्रा से चलने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस, पवन एक्सप्रेस, कामायनी एक्सप्रेस और भागलपुर एक्सप्रेस में भी धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले की तारीखों के लिए वेटिंग लिस्ट 50 के पार जा चुकी है। सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा से चलने वाली ताप्ती गंगा और सूरत-छपरा क्लोन ट्रेनों में भी श्रमिकों और व्यापारियों की भारी बुकिंग दर्ज की जा रही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पीक सीजन में यात्रियों की संख्या क्षमता से तीन से चार गुना अधिक हो जाती है, जिससे कुछ ही मिनटों में ‘रिग्रेट’ या ‘नो रूम’ की नौबत आ जाती है।
त्योहारी सीजन में सुबह 8:00 बजे जब आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट और रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप पर बुकिंग खुलती है, तब सर्वर पर लाखों यूजर्स का ट्रैफिक एक साथ आता है। ऐसे समय में एक-एक सेकंड कीमती होता है। यदि आप कुछ स्मार्ट ट्रिक्स अपनाते हैं, तो कन्फर्म सीट मिलने की संभावना 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है:
पहला कदम यह है कि बुकिंग खुलने से एक दिन पहले ही अपनी आईआरसीटीसी प्रोफाइल में जाकर ‘मास्टर लिस्ट’ (Master List) तैयार कर लें। मास्टर लिस्ट में परिवार के सभी यात्रियों के पूरे नाम, सही उम्र, जेंडर और बर्थ प्रेफरेंस (लोअर, मिडिल, साइड लोअर) पहले से सेव करके रखें। सुबह 8:00 बजे बुकिंग करते समय आपको दोबारा नाम टाइप नहीं करना पड़ेगा और केवल एक क्लिक में सभी यात्रियों का डेटा फॉर्म में आ जाएगा।
दूसरा महत्वपूर्ण उपाय पेमेंट गेटवे का सही चुनाव है। नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड से भुगतान करते समय ओटीपी (OTP) आने में देरी हो सकती है, जिससे टिकट हाथ से निकल जाता है। इसके बजाय आईआरसीटीसी ई-वॉलेट (IRCTC e-Wallet), पेटीएम वॉलेट या यूपीआई ऑटोपे/क्यूआर कोड स्कैन का विकल्प चुनें। ई-वॉलेट से भुगतान महज एक ट्रांजैक्शन पासवर्ड और एक ओटीपी दर्ज करते ही दो सेकंड में पूरा हो जाता है।
तीसरा, बुकिंग फॉर्म भरते समय “Consider for Auto Upgradation” और “Book only if confirm berths are allotted” वाले विकल्पों में से अपनी जरूरत के अनुसार सही चयन करें। यदि आप स्लीपर क्लास में टिकट बुक कर रहे हैं और चार्ट बनते समय थर्ड एसी में सीट खाली रहती है, तो ऑटो अपग्रेडेशन के जरिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के आपकी सीट एसी में अपग्रेड हो सकती है।
चौथा नियम यह है कि सुबह ठीक 7:55 बजे अपने कंप्यूटर या फोन पर लॉगिन करके बैठ जाएं, ताकि ठीक 8:00 बजे आप सीधे ‘Book Ticket’ पर क्लिक कर सकें। यदि आप ठीक 8 बजे लॉगिन करने का प्रयास करेंगे, तो कैप्चा और सर्वर लोड के कारण लॉग-इन में ही दो से तीन मिनट का समय बर्बाद हो सकता है।
पांचवां, हमेशा ‘विकल्प’ (VIKALP) योजना का चयन करें। यदि आपकी पसंदीदा ट्रेन में टिकट वेटिंग में चला भी जाता है, तो विकल्प स्कीम चुनने पर रेलवे उसी रूट की किसी अन्य ट्रेन में खाली सीट होने पर आपको बिना किसी अतिरिक्त पैसे के कन्फर्म सीट आवंटित कर सकता है।
यदि किसी कारणवश आपकी यात्रा की तारीख पर सामान्य कोटे के सारे टिकट समाप्त हो चुके हैं और वेटिंग लिस्ट 150 से ऊपर जा चुकी है, तो मायूस होने की आवश्यकता नहीं है। रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए कई वैकल्पिक इंतजामात करता है। पहला विकल्प यात्रा से ठीक एक दिन पहले खुलने वाला ‘तत्काल कोटा’ और ‘प्रीमियम तत्काल कोटा’ होता है। एसी क्लास के लिए तत्काल बुकिंग यात्रा की तारीख से एक दिन पहले सुबह 10:00 बजे और नॉन-एसी (स्लीपर) के लिए सुबह 11:00 बजे शुरू होती है।
इसके अतिरिक्त, रेलवे बोर्ड त्योहारी सीजन में अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए सैकड़ों की संख्या में फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें (Diwali-Chhath Special Trains) चलाता है। ये स्पेशल ट्रेनें प्रमुख शहरों के बीच पॉइंट-टू-पॉइंट चलाई जाती हैं। इन ट्रेनों की घोषणा यात्रा से 15 से 20 दिन पहले की जाती है। यदि नियमित गाड़ियों में टिकट न मिले, तो रेलवे के आधिकारिक ट्विटर हैंडल और आईआरसीटीसी पोर्टल पर स्पेशल ट्रेनों के नोटिफिकेशन पर नियमित नजर बनाए रखें। स्पेशल ट्रेनों में एसी, स्लीपर और सामान्य अनारक्षित कोचों की पर्याप्त संख्या होती है, जिससे अंतिम समय में भी घर पहुंचना आसान हो जाता है।
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