Department of Information and Public Relations : पिकनिक के लिए सरकारी गाड़ी न मिलने पर ब्लैकमेलिंग? सूचना विभाग उठाने जा रहा है बड़ा कदम

Department of Information and Public Relations: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग इन दिनों कुछ तथाकथित पत्रकारों की हरकतों से बेहद परेशान है। विभाग से निजी इस्तेमाल और पिकनिक मनाने के लिए सरकारी गाड़ी की मांग करने वाले कुछ लोगों ने व्यवस्था को ताक पर रख दिया है। हैरानी की बात यह है कि जब विभाग नियमानुसार गाड़ी देने से इनकार करता है, तो ये लोग सीधे ब्लैकमेलिंग पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे छपरी और लैमार किस्म के वाहनखोर तत्वों पर लगाम लगाने के लिए अब विभाग सख्त नियम बनाने की तैयारी कर रहा है।

सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर कसने जा रहा है शिकंजा

विभाग के भीतर से आ रही खबरों के मुताबिक, मान्यता की आड़ में सरकारी संसाधनों का बेजा इस्तेमाल करने वालों की लिस्ट तैयार हो रही है। ये लोग पत्रकारिता की गरिमा को ताक पर रखकर केवल मुफ्त की सुविधाओं का आनंद लेना चाहते हैं। अब नए नियमों के तहत किसी भी निजी काम या पिकनिक जैसे आयोजनों के लिए सरकारी गाड़ी मिलना नामुमकिन हो जाएगा। विभाग का साफ मानना है कि सरकारी गाड़ियां केवल और केवल आधिकारिक कवरेज और जनता से जुड़े जरूरी सरकारी कामों के लिए हैं, न कि किसी की निजी अय्याशी के लिए।

क्या रसूखदार और रंगे सियार लागू होने देंगे नए नियम?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ये कड़े नियम वाकई धरातल पर लागू हो पाएंगे? विभाग के भीतर भी इस बात को लेकर संशय है क्योंकि ये सुविधाभोगी पत्रकार अपनी पैठ का इस्तेमाल कर नियमों को ठंडे बस्ते में डलवाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। सचिवालय से लेकर निदेशालय तक पैरवी का दौर शुरू हो चुका है। अब देखना यह होगा कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग इन कथित पत्रकारों के दबाव में झुकता है या फिर सख्ती से इन नए नियमों को लागू करके एक मिसाल कायम करता है।