
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली समेत संपूर्ण उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बेहद उग्र रूप धारण करने वाली हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में 10 अगस्त तक रुक-रुक कर मूसलाधार और मध्यम स्तर की बारिश का नया पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम की गंभीरता को देखते हुए आईएमडी ने दिल्ली में लगातार ‘येलो अलर्ट’ (Yellow Alert) लागू कर दिया है। दिल्ली ही नहीं, बल्कि मानसूनी द्रोणी (Monsoon Trough) के उत्तर की ओर खिसकने के कारण उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और पहाड़ी राज्य जम्मू-कश्मीर तक बादलों का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इन तमाम राज्यों में तेज मानसूनी बारिश का दौर जारी रहने वाला है, जिससे तापमान में गिरावट आने के साथ-साथ निचले इलाकों में जलभराव की समस्या गहरा सकती है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की आपसी सक्रियता के कारण मानसून का यह दौर अगले एक सप्ताह तक बना रहेगा।
उत्तर भारत में मानसून की वापसी और दिल्ली-एनसीआर का मौसम हाल
दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से जारी उमस और तेज धूप के बाद अब बादलों ने फिर से डेरा डाल लिया है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि 10 अगस्त तक दिल्ली के सफदरजंग, पालम, लोधी रोड और आयानगर जैसे प्रमुख वेदर स्टेशनों के अंतर्गत बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ बारिश होगी। इस दौरान दिन का अधिकतम तापमान घटकर 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच आ सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
दिल्ली से सटे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी अगले 5 दिनों तक मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। बारिश के कारण दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता (AQI) में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा और यह ‘अच्छी’ से ‘संतोषजनक’ श्रेणी में बनी रहेगी। हालांकि, लगातार होने वाली बारिश से कार्यालय जाने वाले लोगों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक बादलों का डेरा
मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसूनी हवाओं का रुख इस समय मैदानी इलाकों पर बेहद अनुकूल बना हुआ है। उत्तर प्रदेश में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, बरेली और आगरा समेत 40 से अधिक जिलों में 10 अगस्त तक गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटीय बस्तियों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
उधर, पूर्वी भारत के राज्यों- बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी मानसूनी बारिश की रफ्तार तेज हो गई है। बिहार के किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, पटना और गया में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर भारी बारिश होने का अंदेशा है। पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी जिलों जैसे दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार के साथ-साथ कोलकाता और तटीय क्षेत्रों में तूफानी हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। गंगीय पश्चिम बंगाल में कम दबाव के क्षेत्र के असर से समुद्री तटीय इलाकों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
जम्मू-कश्मीर और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन व फ्लैश फ्लड का अलर्ट
मैदानी इलाकों के अलावा पहाड़ी राज्यों में भी मौसम की मार काफी गंभीर बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम विभाग ने बेहद सावधानी बरतने का अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर के जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में भारी वर्षा के चलते पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) और नालों में अचानक उफान (Flash Floods) आने की आशंका जताई गई है। श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर मलबे के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी चारधाम यात्रा और अमरनाथ यात्रा के संवेदनशील मार्गों पर राष्ट्रीय व प्रांतीय आपदा प्रबंधन टीमों (SDRF & NDRF) को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक यात्राओं से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करें।
जलभराव और यातायात प्रबंधन: प्रशासन की तैयारी
दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में तूफानी बारिश की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और नगर निगम हाई अलर्ट पर आ गए हैं। दिल्ली में मिंटो ब्रिज अंडरपास, आईटीओ, धौलाकुआं, आश्रम और महरौली-बदरपुर रोड जैसे संवेदनशील जलभराव वाले स्थलों पर जल निकासी के लिए हाई-पावर पंप तैनात कर दिए गए हैं। पीडब्ल्यूडी (PWD) और एमसीडी (MCD) के कर्मचारियों को चौबीसों घंटे तैनात रहने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी वाहन चालकों के लिए परामर्श जारी किया है। पुलिस ने कहा है कि भारी बारिश के समय दृश्यता (Visibility) कम हो सकती है, इसलिए चालक अपनी गाड़ियों की हेडलाइट्स चालू रखें और जलभराव वाले रास्तों की जगह वैकल्पिक मार्गों का चुनाव करें।
किसानों और आम नागरिकों के लिए मौसम विभाग की खास सलाह
आईएमडी के वैज्ञानिकों ने इस मानसूनी स्पेल के दौरान नागरिकों और किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है:
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आकाशीय बिजली से बचाव: बारिश और आंधी-तूफान के दौरान खुले मैदानों, जल स्रोतों, ऊंचे वृक्षों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें। ग्रामीण इलाकों में खेत पर काम करने वाले किसान सुरक्षित पक्के आश्रयों में जाएं।
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कृषि संबंधी सलाह: जिन इलाकों में धान की रोपाई हो चुकी है, वहां पानी के भराव पर नजर रखें और जल निकासी की व्यवस्था सुचारू बनाएं। भारी बारिश की चेतावनी के दौरान फसलों में किसी भी तरह के कीटनाशक या रासायनिक खाद का छिड़काव न करें।
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स्वास्थ्य की देखभाल: बारिश के मौसम में दूषित पानी और जल जनित बीमारियों (जैसे डेंगू, मलेरिया, डायरिया) के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। अपने आसपास पानी इकट्ठा न होने दें और उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीएं।
कुल मिलाकर, 10 अगस्त तक देश के एक बड़े हिस्से में मानसून की गतिविधियां बेहद असरदार बनी रहेंगी, जिससे जहां एक ओर तापमान गिरने से गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बारिश और जलभराव से सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है।
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