
देश की राजधानी दिल्ली में सर्दियों की आहट के साथ ही प्रदूषण ने खतरनाक रूप ले लिया है और समूचा शहर जहरीली धुंध (Smog) की चादर में लिपटा नजर आ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के ताजा निगरानी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली का जहांगीरपुरी इलाका राजधानी का सबसे प्रदूषित हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। जहांगीरपुरी मॉनिटरिंग स्टेशन पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 के खतरनाक आंकड़े को पार करते हुए ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में दर्ज किया गया है। हवा में अति सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) की सघनता सामान्य सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक दर्ज की गई है। जब किसी क्षेत्र का एक्यूआई 400 से ऊपर पहुंच जाता है, तो वह केवल सांस और हृदय रोगियों के लिए ही नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों के फेफड़ों को भी स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाने लगता है। जहांगीरपुरी के अलावा रोहिणी, वजीरपुर, पंजाबी बाग, बवाना और आनंद विहार जैसे प्रमुख निगरानी केंद्रों पर भी प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ या ‘अत्यंत खराब’ स्थिति में बना हुआ है। वातावरण में छाई भारी धुंध के कारण सुबह और शाम के समय दृश्यता (Visibility) में भारी गिरावट आई है, जिससे सड़कों पर वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जहांगीरपुरी में हवा के सबसे अधिक जहरीले होने के पीछे सबसे बड़ा भौगोलिक और स्थानीय कारण इस इलाके की भलस्वा लैंडफिल साइट (Bhalswa Landfill Site) से निकटता है। कचरे का यह विशाल पहाड़ जहांगीरपुरी आवासीय क्षेत्र के ठीक पास स्थित है। लैंडफिल के मलबे के भीतर मीथेन गैस के अत्यधिक संचय और सतह पर अक्सर लगने वाली स्थानीय सुलगती आग (Sub-surface Smoldering) के कारण लगातार जहरीला धुआं वातावरण में घुलता रहता है। सर्दियों के मौसम में जब तापमान में गिरावट आती है, तो ‘थर्मल इन्वर्जन’ (Thermal Inversion) की मौसमी परिघटना सक्रिय हो जाती है। इसके तहत ठंडी और भारी हवा जमीन के पास ही स्थिर हो जाती है और लैंडफिल से उठने वाले सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और पार्टिकुलेट मैटर वायुमंडल की ऊपरी परतों में जाने के बजाय सीधे जहांगीरपुरी और आसपास की घनी आबादी की सांसों में समाने लगते हैं।
जहांगीरपुरी की भौगोलिक स्थिति राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (GT करनाल रोड) और मुकरबा चौक जैसे बड़े ट्रैफिक जंक्शनों से सटी हुई है। यह दिल्ली के मुख्य प्रवेश द्वारों में से एक है, जहां से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ओर जाने और वहां से राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने वाले हजारों भारी व्यावसायिक ट्रकों, अंतरराज्यीय डीजल बसों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही 24 घंटे लगातार बनी रहती है। मुकरबा चौक और जहांगीरपुरी बाईपास पर लगने वाले भीषण जाम के कारण सैकड़ों वाहन घंटों तक ‘आइडलिंग’ (इंजन चालू रखकर खड़े रहना) की स्थिति में रहते हैं। धीमे ट्रैफिक के कारण डीजल से चलने वाले भारी वाहनों से निकलने वाले अनबर्न हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन ऑक्साइड्स (NOx) और महीन कार्बन कण सड़क की सतह पर ही घने धुएं का घेरा बना लेते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रदूषण का स्तर सामान्य इलाकों के मुकाबले बहुत तेजी से छलांग लगाता है।
जहांगीरपुरी और उससे सटे संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, समयपुर बादली व स्वरूप नगर के इलाकों में बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्ट हब, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप और अनौपचारिक स्क्रैप (कबाड़) बाजार संचालित होते हैं। इन क्षेत्रों में भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही, टूटी सड़कों और फुटपाथों पर जमा अनकवर्ड मलबे के कारण सड़कों पर ‘डस्ट री-सस्पेंशन’ (सड़क की धूल का बार-बार हवा में उड़ना) बड़े पैमाने पर होता है। कई छोटी औद्योगिक व स्क्रैप इकाइयों में रबर, प्लास्टिक के अवशेषों और पैकेजिंग कचरे को खुले में जलाने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। जब स्थानीय स्तर पर उड़ने वाली धूल और कचरे का धुआं आपस में मिल जाता है, तो हवा में PM10 और PM2.5 का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है, जो सांस नली को ब्लॉक करने के लिए जिम्मेदार है।
स्थानीय कारकों के अलावा मौसमी स्थितियां भी जहांगीरपुरी के प्रदूषण को चरम पर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। उत्तर-पश्चिमी हवाओं की धीमी गति (Wind Speed under 5-8 km/h) और हवा की दिशा पंजाब तथा हरियाणा से होकर दिल्ली की ओर आने के कारण पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने (Stubble Burning) से उत्पन्न होने वाला धुआं उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में सबसे पहले और सबसे सघन रूप से प्रवेश करता है। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली का सीमांत इलाका होने के कारण जहांगीरपुरी बाहरी पराली के धुएं और आंतरिक स्थानीय स्रोतों के दोहरे जाल में फंसकर एक ‘गैस चैंबर’ की शक्ल अख्तियार कर लेता है।
हवा के ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्त नियम लागू किए गए हैं। इसके अंतर्गत जहांगीरपुरी और चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, एंटी-स्मॉग गन से पानी का छिड़काव, खुले में निर्माण गतिविधियों पर कड़ी निगरानी और गैर-आवश्यक डीजल जनरेटर सेटों के संचालन पर प्रतिबंध लागू हैं।
| AQI स्तर | स्वास्थ्य पर प्रभाव | अनुशंसित सुरक्षा उपाय |
| 0 – 50 (Good) | न्यूनतम या नगण्य प्रभाव | सामान्य दैनिक गतिविधियां जारी रखें। |
| 101 – 200 (Moderate) | संवेदनशील लोगों को हल्की सांस की तकलीफ | दमा रोगी जरूरी दवाएं साथ रखें। |
| 301 – 400 (Very Poor) | लंबे समय तक संपर्क से श्वसन संबंधी बीमारियां | सुबह व शाम की सैर से परहेज करें। |
| 401 – 500 (Severe) | फेफड़ों और हृदय पर गंभीर प्रभाव; स्वस्थ व्यक्ति भी प्रभावित | बाहर निकलने पर N95 मास्क पहनें, एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें। |
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 450 के स्तर वाले एक्यूआई में सांस लेना दिनभर में 20 से 25 सिगरेट पीने के बराबर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और अस्थमा या ब्रोंकाइटिस से पीड़ित मरीजों को घर के अंदर ही रहने, खिड़कियां बंद रखने और बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला N95/N99 मास्क अनिवार्य रूप से पहनने की सलाह दी गई है।
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