
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से एक ऐसी चक्रव्यूह रचना शुरू कर दी है, जिसने विपक्षी खेमे की नींद उड़ा दी है। बीजेपी का सबसे बड़ा फोकस राज्य की उन 61 विधानसभा सीटों पर है, जिन्हें समाजवादी पार्टी (SP) का अभेद्य किला माना जाता है। इन सीटों पर सपा या उसके सहयोगियों का लंबे समय से एकतरफा दबदबा रहा है और पिछले कई चुनावों में बीजेपी लाख कोशिशों के बाद भी यहां कमल खिलाने में नाकाम रही है। अब पार्टी ने इन कमजोर कड़ियों को मजबूत करने के लिए एक बेहद गुप्त और बड़ा रणनीतिक खाका तैयार किया है, जिसे ‘मेगा प्लान 2027’ का नाम दिया जा रहा है।
सपा के अभेद्य किलों को ढहाने की नई रणनीति
राजनीतिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, इन 61 सीटों में से अधिकांश पश्चिमी यूपी, रुहेलखंड और पूर्वांचल के उन इलाकों में हैं जहां मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण या फिर विपक्ष का ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला बेहद मजबूत है। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि अगर 2027 में पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में वापसी करनी है, तो सपा के इन पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगाना अनिवार्य है। इसके लिए पार्टी ने इन सभी 61 सीटों की प्रोफाइलिंग की है और स्थानीय स्तर पर जातिगत समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए अभी से जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है।
बड़े चेहरों को सौंपी गई इन ‘कमजोर’ सीटों की कमान
इस विशेष अभियान के तहत, बीजेपी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। इन 61 विधानसभा सीटों की कमान संगठन के बड़े और कद्दावर नेताओं के साथ-साथ मंत्रियों को सौंपी गई है। इन प्रभारियों का काम सिर्फ चुनावी रैलियां करना नहीं होगा, बल्कि वे इन क्षेत्रों में लगातार प्रवास करेंगे, स्थानीय जनता की नब्ज टटोलेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक पहुंचाएंगे जो अब तक बीजेपी से दूर रहे हैं। रणनीति यह भी है कि इन क्षेत्रों के असंतुष्ट विपक्षी नेताओं और प्रभावशाली सामाजिक चेहरों को चुनाव से पहले बीजेपी के पाले में लाया जाए, ताकि सपा के पारंपरिक वोट बैंक को बिखेरा जा सके।
बूथ स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट और नए चेहरों पर दांव
बीजेपी इस बार इन सीटों पर पुराने ढर्रे से हटकर बिल्कुल नए चेहरों और स्थानीय समीकरणों में फिट बैठने वाले उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी में है। इसके लिए बूथ स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट शुरू कर दिया गया है। पार्टी का मानना है कि इन सीटों पर भले ही सपा एकतरफा जीतती आई हो, लेकिन अगर गैर-यादव ओबीसी, दलित और युवा वोटर्स को एक मंच पर लाया जाए तो पासा पलटा जा सकता है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी का यह मेगा प्लान अखिलेश यादव के विजयी रथ को रोकने में कितना कामयाब हो पाता है और सपा अपने इन 61 अभेद्य किलों को बचाने के लिए क्या जवाबी रणनीति अपनाती है।
girls globe