Crude Oil Prices Crash: अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘डील फाइनल’, होर्मुज स्ट्रेट से हटेगी नाकेबंदी; कच्चे तेल की कीमतों में 5% की भारी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार (Global Market) से व्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। सोमवार को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil Prices) की कीमतें मार्च के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। इस भारी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता (US-Iran Peace Deal) फाइनल होना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने आधिकारिक घोषणा की है कि दोनों देश युद्ध खत्म करने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर से सुरक्षित शुरू करने के लिए एक शुरुआती समझौते पर पहुंच गए हैं।

ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई में 5 फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावट

राष्ट्रपति ट्रंप के इस बड़े और अप्रत्याशित एलान के बाद अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में कच्चे तेल के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं।

  • ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4.2 डॉलर या लगभग 5% की भारी गिरावट के साथ 83.07 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

  • WTI क्रूड (West Texas Intermediate): अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल भी 4.7 डॉलर या 5.6% की बड़ी गिरावट के साथ 80.12 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।

    आपको बता दें कि इससे पहले बीते शुक्रवार को भी दोनों तेल कॉन्ट्रैक्ट्स में 3% से ज्यादा की नरमी देखी गई थी, जो इस डील की सुगबुगाहट का असर था।

स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को होगी साइन; पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका

रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि इस शुरुआती समझौते के तहत 60 दिनों के सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा की गई है। इस शांति अवधि के दौरान दोनों देश एक ज्यादा व्यापक और स्थायी समझौते के रोडमैप पर आगे बातचीत करेंगे।

इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि इस डील पर आधिकारिक रूप से आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड (Switzerland) की धरती पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। भू-राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस कड़वाहट और युद्ध को शांत कराने के लिए पाकिस्तान ने एक मुख्य मध्यस्थ (Mediator) के रूप में अहम कूटनीतिक भूमिका निभाई है।

ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी होगी खत्म; टोल-फ्री रहेगा होर्मुज स्ट्रेट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बयान में साफ किया कि समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट पूरी दुनिया के व्यापारिक जहाजों के लिए टोल-फ्री (बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के) खुला रहेगा। साथ ही, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिकों द्वारा की गई सख्त नाकेबंदी (Naval Blockade) को भी पूरी तरह से हटा लिया जाएगा।

ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर समाचार एजेंसी (Mehr News Agency) के अनुसार, समझौते के तैयार ड्राफ्ट में कहा गया है कि ईरानी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों के तहत अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के रूट के लिए पूरी तरह से री-ओपन (फिर से चालू) कर दिया जाएगा।

क्यों पूरी दुनिया के लिए संजीवनी है होर्मुज स्ट्रेट का खुलना?

गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से जारी भीषण युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट पिछले तीन महीने से अधिक समय से लगभग पूरी तरह बंद पड़ा था। इसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार को लाखों बैरल कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति (Supply Chain Disruption) का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया था।

होर्मुज स्ट्रेट का आर्थिक महत्व: यह संकरा समुद्री मार्ग पूरी दुनिया के लिए लाइफलाइन की तरह है। वैश्विक स्तर पर कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कुल वैश्विक आपूर्ति का पांचवां हिस्सा (लगभग 20%) अकेले इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इस मार्ग के दोबारा खुलने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी और भारत सहित कई विकासशील देशों में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और नियंत्रित होने की उम्मीद है।

भारतीय बाजार पर असर और संबंधित बड़ी खबरें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का सीधा और सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) पर देखने को मिल सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 80 से 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है।

  • भारत-रूस तेल व्यापार: एक तरफ जहां वैश्विक कीमतें गिर रही हैं, वहीं ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत का रूस से कच्चे तेल और अन्य ईंधनों का आयात मई महीने में बढ़कर 6.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही भारत, रूस के कच्चे तेल का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है।

  • पेट्रोल-डीजल के दाम: वैश्विक बाजार में आई 5% की इस गिरावट के बाद भारतीय तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) द्वारा घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती करने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।